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कुतों के आतंक से बचाने को कंज्यूमर्स की आपात बैठक
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कुत्तों के आतंक से बचाने को हुई आपात बैठक
- हर महीने 200 -250 कुत्तों के काटने के मामले आ रहे सामने
- कंज्यूमर्स एसोसिएशन ने निगम प्रशासक को लिखा शिकायती पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहे है। हर महीने दो सौ से लेकर ढाई सौ केस सामने आ रहे हैं। इसके बाद भी नगर निगम अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। कुत्तों के आतंक से छुटकारा पाने के लिए शनिवार को कंज्यूमर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों की एक अहम मीटिंग हुई। जिसमें सदस्यों ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिये। संस्था के प्रधान एनसी राणा ने बताया कि पिछले कई दिनों से कुत्तों का आतंक शहर में बढ़ गया है। सुबह और शाम सैर के लिए निकलने से भी लोग कतराने लगे हैं। सबसे ज्यादा बच्चे और वरिष्ठ नागरिक शिकार हो रहे हैं।
हर महीने करीब 200 से 250 कुत्तों के काटने के केस सामने आ रहे हैं। इसके पीछे का कारण एक ही शहर में कुत्तों की संख्या का बढ़ना है। उन्होंने बताया कि शहर में कुत्तों की संख्या 3500 से बढ़कर 5000 से पहुंच गई है। रोजाना 8 से 10 कुत्तों के काटने के केस आ हो रहे हैं। ये बात भी सामने आई कि सामान्य अस्पताल में वैक्सीनेशन की उपलब्धता न होने के कारण मरीजों को चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। एसोसिएशन के महासचिव वीके वर्मा ने कहा कि पिछले दिनों सक्षम (6) व प्रशांत ठाकुर (9) निवासी सेक्टर-20 को कुत्तों ने बुरी तरह काटा। इसके अलावा फतेह सिंह (84) निवासी सेक्टर-18 कुत्ते ने काटा। सदस्यों ने कहा कि पिछले साल के अंत में 50 साल की रेशमा, 62 साल की आमना, 30 साल की निशा व 9 साल के रेहान को सेक्टर-10 में आवारा कुत्तों ने काटा था। इसके अलावा एक वृद्ध औरत और 5-6 लोगों कोे सेक्टर-10 की गली में कुत्ते ने काट कर घायल कर दिया था।
निगम अधिकारी कब उठाएंगे कदम
एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान कर्नल पीएस गोपाल ने कहा कि कुत्तों के आतंक से बचाने के लिए निगम कब पुख्ता कदम उठाएगा। निगम द्वारा दिए जा रहे आश्वासन केवल हवाहवाई साबित हो रहे हैं। एसोसिएशन प्रधान एनसी राणा व महासचिव वीके वर्मा ने कहा कि जब तक निगम व स्वास्थ्य विभाग द्वारा समाधान नहीं निकालते लोग शिकार होते रहेंगे।
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- हर महीने 200 -250 कुत्तों के काटने के मामले आ रहे सामने
- कंज्यूमर्स एसोसिएशन ने निगम प्रशासक को लिखा शिकायती पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहे है। हर महीने दो सौ से लेकर ढाई सौ केस सामने आ रहे हैं। इसके बाद भी नगर निगम अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। कुत्तों के आतंक से छुटकारा पाने के लिए शनिवार को कंज्यूमर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों की एक अहम मीटिंग हुई। जिसमें सदस्यों ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिये। संस्था के प्रधान एनसी राणा ने बताया कि पिछले कई दिनों से कुत्तों का आतंक शहर में बढ़ गया है। सुबह और शाम सैर के लिए निकलने से भी लोग कतराने लगे हैं। सबसे ज्यादा बच्चे और वरिष्ठ नागरिक शिकार हो रहे हैं।
हर महीने करीब 200 से 250 कुत्तों के काटने के केस सामने आ रहे हैं। इसके पीछे का कारण एक ही शहर में कुत्तों की संख्या का बढ़ना है। उन्होंने बताया कि शहर में कुत्तों की संख्या 3500 से बढ़कर 5000 से पहुंच गई है। रोजाना 8 से 10 कुत्तों के काटने के केस आ हो रहे हैं। ये बात भी सामने आई कि सामान्य अस्पताल में वैक्सीनेशन की उपलब्धता न होने के कारण मरीजों को चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। एसोसिएशन के महासचिव वीके वर्मा ने कहा कि पिछले दिनों सक्षम (6) व प्रशांत ठाकुर (9) निवासी सेक्टर-20 को कुत्तों ने बुरी तरह काटा। इसके अलावा फतेह सिंह (84) निवासी सेक्टर-18 कुत्ते ने काटा। सदस्यों ने कहा कि पिछले साल के अंत में 50 साल की रेशमा, 62 साल की आमना, 30 साल की निशा व 9 साल के रेहान को सेक्टर-10 में आवारा कुत्तों ने काटा था। इसके अलावा एक वृद्ध औरत और 5-6 लोगों कोे सेक्टर-10 की गली में कुत्ते ने काट कर घायल कर दिया था।
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निगम अधिकारी कब उठाएंगे कदम
एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान कर्नल पीएस गोपाल ने कहा कि कुत्तों के आतंक से बचाने के लिए निगम कब पुख्ता कदम उठाएगा। निगम द्वारा दिए जा रहे आश्वासन केवल हवाहवाई साबित हो रहे हैं। एसोसिएशन प्रधान एनसी राणा व महासचिव वीके वर्मा ने कहा कि जब तक निगम व स्वास्थ्य विभाग द्वारा समाधान नहीं निकालते लोग शिकार होते रहेंगे।
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