{"_id":"5b784d7b42c792463110195c","slug":"15346108027-ropar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरटीआई एक्टाविष्ट ने रोपड़ जिला में करोडो रूपयों की अवैध माइनिंग के लगाये आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरटीआई एक्टाविष्ट ने रोपड़ जिला में करोडो रूपयों की अवैध माइनिंग के लगाये आरोप
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:16 PM IST
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स्वीकृत से दस गुना अधिक माइनिंग से सरकार को करोड़ों की चपत
रोपड़ में आरटीआई कार्यकर्ता ने करोड़ों की अवैध माइनिंग के लगाए आरोप
कहा- प्रशासन अपनी रिपोर्ट पर भी नहीं कर रहा बड़े ठेकेदारों पर कार्रर्वाई
अमर उजाला ब्यूरो
रोपड़। आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश चड्ढा ने जिले की तीन लीगल माइनिंग खड्डों में बडे़ पैमाने पर गैरकानूनी माइनिंग के आरोप लगाते हुए बड़े ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। चड्ढा ने कहा कि माइनिंग ठेकेदारों ने प्रशासन द्वारा आरटीआई में दिए आंकड़ों के अनुसार सालाना 15 से 20 करोड़ रुपये अवैध माइनिंग मैटेरियल खोदकर कमाए है। दिनेश चड्ढा ने इस संबंध में रूपनगर प्रेस क्लब में प्रेस कान्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सारा अवैध कारोबार जिनकी सरपरस्ती में हुआ है, उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने सरकार से किसी एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की। चड्ढा ने कहा कि अवैध माइनिंग से जिले में कुदरती स्रोतों का बड़े पैमाने पर नुकसान होने के साथ साथ पानी का स्तर भी घट गया है, जिसके नतीजे आने वाले समय में इलाके के लोगों को भुगतने पड़ेंगे। लेकिन प्रशासन इस संबंध में गंभीर नहीं है, क्योंकि मानसून के दौरान भी जिले में अवैध माइनिंग का कारोबार चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इक्का दुक्का ट्रालियां भरने वालों पर कार्रवाई कर लोगों की आंखों धूल झोंक रहा है।
30 से 40 फुट तक माइनिंग हो चुकी है
दिनेश चड्ढा ने कहा कि जिला की हरसा बेला, सवाड़ा तथा बेइहारा खड्ड में 9 फुट तक माइनिंग करने की परमिशन है, जबकि यहां पर 30 से 40 फुट तक माइनिंग प्रशासन के आंकड़ों अनुसार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन खड्डों में निशानदेही या कोई पिलर तक नहीं लगाए हैं, जिसके चलते इन खड्डों का एरिया पता नहीं लगता और ठेकेदार खड्डों के बाहर भी अवैध माइनिंग करते है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के अधिकारी और सरकार सब जानकर भी चुप हैं। इससे साबित होता है कि सारा कारोबार मिलीभगत से चल रहा है।
माइनिंग की खड्डों के ये हैं हालात
दिनेश चड्ढा ने बताया कि जिले की हरसा बेला खड्ड का एरिया 79.29 हेक्टेयर है और यहां से सालाना 93 हजार टन मैटेरियल निकाला जा सकता है। जबकि जिला की सवाड़ा खड्ढ का 69.69 हेक्टेयर एरिया है और यहां से 69 हजार 500 टन मैटेरियल निकाला जा सकता है। बेइहारा खड्ड का एरिया 29.01 हेक्टेयर है, यहां से 29 हजार 500 टन मैटेरियल सालाना निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिले की तीनों खड्डों में से कुल एक लाख 92 हजार टन मैटेरियल निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों ने 10 गुणा से ज्यादा अवैध माइनिंग कर करोड़ों रुपये का मैटेरियल निकाला जा चुका है, जिसमें कई लोगों की मिलीभगत भी है।
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जानते हुए भी केस क्यों नहीं दर्ज कर रही पुलिस
दिनेश चड्डा ने कहा कि डायरेक्टर और जीएम माइनिंग विभाग ने अभी तक जांच के बाद भी माइनिंग ठेकेदारों पर मामला दर्ज क्यों नहीं कराया, जबकि उनकी रिपोर्टों में अवैध कारोबार साबित हो रहा है। इस संबंध में वह जिला पुलिस मुखी को भी शिकायत दे चुके हैं और उन्होंने इसकी जांच डीएसपी को सौंपी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
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रोपड़ में आरटीआई कार्यकर्ता ने करोड़ों की अवैध माइनिंग के लगाए आरोप
कहा- प्रशासन अपनी रिपोर्ट पर भी नहीं कर रहा बड़े ठेकेदारों पर कार्रर्वाई
अमर उजाला ब्यूरो
रोपड़। आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश चड्ढा ने जिले की तीन लीगल माइनिंग खड्डों में बडे़ पैमाने पर गैरकानूनी माइनिंग के आरोप लगाते हुए बड़े ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। चड्ढा ने कहा कि माइनिंग ठेकेदारों ने प्रशासन द्वारा आरटीआई में दिए आंकड़ों के अनुसार सालाना 15 से 20 करोड़ रुपये अवैध माइनिंग मैटेरियल खोदकर कमाए है। दिनेश चड्ढा ने इस संबंध में रूपनगर प्रेस क्लब में प्रेस कान्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सारा अवैध कारोबार जिनकी सरपरस्ती में हुआ है, उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने सरकार से किसी एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की। चड्ढा ने कहा कि अवैध माइनिंग से जिले में कुदरती स्रोतों का बड़े पैमाने पर नुकसान होने के साथ साथ पानी का स्तर भी घट गया है, जिसके नतीजे आने वाले समय में इलाके के लोगों को भुगतने पड़ेंगे। लेकिन प्रशासन इस संबंध में गंभीर नहीं है, क्योंकि मानसून के दौरान भी जिले में अवैध माइनिंग का कारोबार चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इक्का दुक्का ट्रालियां भरने वालों पर कार्रवाई कर लोगों की आंखों धूल झोंक रहा है।
30 से 40 फुट तक माइनिंग हो चुकी है
दिनेश चड्ढा ने कहा कि जिला की हरसा बेला, सवाड़ा तथा बेइहारा खड्ड में 9 फुट तक माइनिंग करने की परमिशन है, जबकि यहां पर 30 से 40 फुट तक माइनिंग प्रशासन के आंकड़ों अनुसार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन खड्डों में निशानदेही या कोई पिलर तक नहीं लगाए हैं, जिसके चलते इन खड्डों का एरिया पता नहीं लगता और ठेकेदार खड्डों के बाहर भी अवैध माइनिंग करते है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के अधिकारी और सरकार सब जानकर भी चुप हैं। इससे साबित होता है कि सारा कारोबार मिलीभगत से चल रहा है।
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माइनिंग की खड्डों के ये हैं हालात
दिनेश चड्ढा ने बताया कि जिले की हरसा बेला खड्ड का एरिया 79.29 हेक्टेयर है और यहां से सालाना 93 हजार टन मैटेरियल निकाला जा सकता है। जबकि जिला की सवाड़ा खड्ढ का 69.69 हेक्टेयर एरिया है और यहां से 69 हजार 500 टन मैटेरियल निकाला जा सकता है। बेइहारा खड्ड का एरिया 29.01 हेक्टेयर है, यहां से 29 हजार 500 टन मैटेरियल सालाना निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिले की तीनों खड्डों में से कुल एक लाख 92 हजार टन मैटेरियल निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों ने 10 गुणा से ज्यादा अवैध माइनिंग कर करोड़ों रुपये का मैटेरियल निकाला जा चुका है, जिसमें कई लोगों की मिलीभगत भी है।
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जानते हुए भी केस क्यों नहीं दर्ज कर रही पुलिस
दिनेश चड्डा ने कहा कि डायरेक्टर और जीएम माइनिंग विभाग ने अभी तक जांच के बाद भी माइनिंग ठेकेदारों पर मामला दर्ज क्यों नहीं कराया, जबकि उनकी रिपोर्टों में अवैध कारोबार साबित हो रहा है। इस संबंध में वह जिला पुलिस मुखी को भी शिकायत दे चुके हैं और उन्होंने इसकी जांच डीएसपी को सौंपी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।