{"_id":"5ac3b0c54f1c1bcf618b537b","slug":"15227742189-nawanshahr-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोनों मृतकों को पंचतव में विलीन, डीसी, एसएसपी व विधायक रहे मौजूद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोनों मृतकों को पंचतव में विलीन, डीसी, एसएसपी व विधायक रहे मौजूद
Updated Tue, 03 Apr 2018 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधायक ने दिया मदद का आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
नवांशहर।
इराक में मारे गए जिले की तहसील बलाचौर के गांव जगतपुर और मैहंदपुर के लोगों के अवशेषों का मंगलवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान डीसी अमित कुमार, एससएसपी सतिंदर पाल सिंह, विधायक दर्शन लाल मंगुपुर के अलावा इलाके के कई गणमान्य लोग शामिल थे। जगतपुर निवासी मृतक परविंदर 2012 में इराक गए थे। इसके बाद उनकी लगातार परिवार वालों से बात होती रही, लेकिन 15 जून 2014 को परविंदर के अगवा होने की खबर आई। इसके बाद परविंदर के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। पिता जीत राम ने बताया कि जब कुछ महीने पहले उनके परिवार का डीएनए लिया गया। तभी उन्हें परविंदर की मौत का आभास होने लगा था। इस तरह बलाचौर के ही गांव मैहंदपुर को जसबीर 31 अगस्त 2013 को इराक गए थे। वह तारिक नूर कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे। उनकी भी परिवार के साथ आखिरी बात 15 जून 2014 को ही हुई और उसके बाद से उनका भी कुछ पता नहीं चला। इस दौरान दर्शन लाल मंगुपुर ने कहा कि सरकार की ओर से दोनों मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मदद राशि देने और नौकरी देने की घोषणा की है। इसके अलावा वह प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार से मृतकों के परिवारों को और ज्यादा मदद राशि दिलवाने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नवांशहर।
इराक में मारे गए जिले की तहसील बलाचौर के गांव जगतपुर और मैहंदपुर के लोगों के अवशेषों का मंगलवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान डीसी अमित कुमार, एससएसपी सतिंदर पाल सिंह, विधायक दर्शन लाल मंगुपुर के अलावा इलाके के कई गणमान्य लोग शामिल थे। जगतपुर निवासी मृतक परविंदर 2012 में इराक गए थे। इसके बाद उनकी लगातार परिवार वालों से बात होती रही, लेकिन 15 जून 2014 को परविंदर के अगवा होने की खबर आई। इसके बाद परविंदर के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता। पिता जीत राम ने बताया कि जब कुछ महीने पहले उनके परिवार का डीएनए लिया गया। तभी उन्हें परविंदर की मौत का आभास होने लगा था। इस तरह बलाचौर के ही गांव मैहंदपुर को जसबीर 31 अगस्त 2013 को इराक गए थे। वह तारिक नूर कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे। उनकी भी परिवार के साथ आखिरी बात 15 जून 2014 को ही हुई और उसके बाद से उनका भी कुछ पता नहीं चला। इस दौरान दर्शन लाल मंगुपुर ने कहा कि सरकार की ओर से दोनों मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये मदद राशि देने और नौकरी देने की घोषणा की है। इसके अलावा वह प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार से मृतकों के परिवारों को और ज्यादा मदद राशि दिलवाने का प्रयास करेंगे।