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शिक्षा विभाग के गले की फांस बनी अध्यापक पात्रता परीक्षा
Updated Thu, 22 Feb 2018 10:33 PM IST
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परीक्षार्थियों को ही बना दिया परीक्षक
शिक्षा विभाग के गले की फांस बनी अध्यापक पात्रता परीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर।
अध्यापकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश सरकार की खिंचाई किए जाने के बाद 25 फरवरी को आयोजित की जा रही अध्यापक पात्रता परीक्षा (टैट) शिक्षा विभाग के गले की फांस बनती जा रही है क्योंकि विभाग ने इसके सभी पहलुओं पर विचार न करते हुए ऐसे हजारों परीक्षार्थियों को ही परीक्षक के तौर पर नियुक्त कर दिया जो स्वंय यह परीक्षा देना चाहते हैं। सरकार ने अगर इस गलती पर तुरंत संज्ञान न लिया तो हजारों शिक्षक टैट परीक्षा देने से वंचित रह जाएंगे। जिससे उन्हें अस्थाई नौकरी से भी हाथ धोने पड़ सकता हैं। कई अध्यापकों ने सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ अदालत में जाने की तैयारी की है। जानकारी के अनुसार केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार प्रति वर्ष अध्यापक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया जाना जरूरी है। लेकिन बीते वर्ष सरकारी विद्यालयों में हजारों अध्यापकों के पद रिक्त होने के बावजूद जब पंजाब सरकार ने इस परीक्षा का आयोजन नहीं किया तो योग्य अध्यापकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। अदालत से लगी फटकार के बाद सरकार ने आनन-फानन में परीक्षा की तिथि 31 दिसंबर तय करते हुए 26 दिसंबर तक आवेदन मांग लिए। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत हजारों की संख्या में आवेदन जमा होने से एससीईआरटी की वेबसाइट ही क्रैश कर गई। इसके बाद सरकार ने आवेदन जमा करवाने की तिथि 31 दिसंबर और शुल्क जमा कराने की अंतिम तिथि 2 जनवरी तय करते हुए 11 फरवरी को टेट परीक्षा का एलान कर दिया। लेकिन राजस्थान सरकार ने पहले ही अध्यापक पात्रता परीक्षा की तिथि 11 फरवरी घोषित की थी। जिससे ऐसे अध्यापकों के लिए समस्या पैदा हो गई जो पंजाब और राजस्थान दोनों राज्यों में परीक्षा देना चाहते थे। अध्यापकों के विरोध पर पंजाब सरकार एक बार फिर परीक्षा की तिथि में परिवर्तन करते हुए 25 फरवरी तय कर दी। वहीं उन अध्यापकों को भी परीक्षक बना दिया जो खुद परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं। वीरवार को संजय कुमार, कुलदीप सिंह, बलजीत कौर तथा सुनीता रानी सहित कई परीक्षार्थियों ने परीक्षा नियंत्रकों से संपर्क करके परीक्षक बनने में असमर्थता जताई। लेकिन परीक्षा नियंत्रकों ने उनकी इस समस्या पर कोई गौर न करते हुए निर्देश दिए कि वे शनिवार बाद दोपहर अपनी ड्यूटी वाले परीक्षा केंद्र में पहुंचकर रविवार को होने वाली परीक्षा की तैयारियां पूरी करें। इसमें कई ऐसे अध्यापक भी हैं जो इस बार टेट परीक्षा न दे पाए तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
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शिक्षा विभाग के गले की फांस बनी अध्यापक पात्रता परीक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर।
अध्यापकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश सरकार की खिंचाई किए जाने के बाद 25 फरवरी को आयोजित की जा रही अध्यापक पात्रता परीक्षा (टैट) शिक्षा विभाग के गले की फांस बनती जा रही है क्योंकि विभाग ने इसके सभी पहलुओं पर विचार न करते हुए ऐसे हजारों परीक्षार्थियों को ही परीक्षक के तौर पर नियुक्त कर दिया जो स्वंय यह परीक्षा देना चाहते हैं। सरकार ने अगर इस गलती पर तुरंत संज्ञान न लिया तो हजारों शिक्षक टैट परीक्षा देने से वंचित रह जाएंगे। जिससे उन्हें अस्थाई नौकरी से भी हाथ धोने पड़ सकता हैं। कई अध्यापकों ने सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ अदालत में जाने की तैयारी की है। जानकारी के अनुसार केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार प्रति वर्ष अध्यापक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया जाना जरूरी है। लेकिन बीते वर्ष सरकारी विद्यालयों में हजारों अध्यापकों के पद रिक्त होने के बावजूद जब पंजाब सरकार ने इस परीक्षा का आयोजन नहीं किया तो योग्य अध्यापकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। अदालत से लगी फटकार के बाद सरकार ने आनन-फानन में परीक्षा की तिथि 31 दिसंबर तय करते हुए 26 दिसंबर तक आवेदन मांग लिए। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत हजारों की संख्या में आवेदन जमा होने से एससीईआरटी की वेबसाइट ही क्रैश कर गई। इसके बाद सरकार ने आवेदन जमा करवाने की तिथि 31 दिसंबर और शुल्क जमा कराने की अंतिम तिथि 2 जनवरी तय करते हुए 11 फरवरी को टेट परीक्षा का एलान कर दिया। लेकिन राजस्थान सरकार ने पहले ही अध्यापक पात्रता परीक्षा की तिथि 11 फरवरी घोषित की थी। जिससे ऐसे अध्यापकों के लिए समस्या पैदा हो गई जो पंजाब और राजस्थान दोनों राज्यों में परीक्षा देना चाहते थे। अध्यापकों के विरोध पर पंजाब सरकार एक बार फिर परीक्षा की तिथि में परिवर्तन करते हुए 25 फरवरी तय कर दी। वहीं उन अध्यापकों को भी परीक्षक बना दिया जो खुद परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं। वीरवार को संजय कुमार, कुलदीप सिंह, बलजीत कौर तथा सुनीता रानी सहित कई परीक्षार्थियों ने परीक्षा नियंत्रकों से संपर्क करके परीक्षक बनने में असमर्थता जताई। लेकिन परीक्षा नियंत्रकों ने उनकी इस समस्या पर कोई गौर न करते हुए निर्देश दिए कि वे शनिवार बाद दोपहर अपनी ड्यूटी वाले परीक्षा केंद्र में पहुंचकर रविवार को होने वाली परीक्षा की तैयारियां पूरी करें। इसमें कई ऐसे अध्यापक भी हैं जो इस बार टेट परीक्षा न दे पाए तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है।