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वर्ल्ड पंजाबी कांफ्रेंस
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फ्लैग : पंजाब कला भवन में वर्ल्ड पंजाबी कांफ्रेंस के दौरान देश के कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा
सामाजिक न्याय के कानून तो बने, पर क्या न्याय मिल पाता है : कन्हैया कुमार
-दीपिका राजवंत, एन साई बाला, अनुपम गुप्ता ने भी शिरकत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वर्ल्ड पंजाबी कांफ्रेंस का अंतिम दिन देश के ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित रहा। रविवार को पंजाब कला भवन में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध सिविल एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने की। इस दौरान प्रसिद्ध छात्र नेता कन्हैया कुमार, जम्मू कश्मीर की एडवोकेट दीपिका राजवंत और जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष एन साईं बाला मौजूद रहे। प्रसिद्ध छात्र नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि हमें सामाजिक न्याय दिलाने के कानून तो बना दिए गए, पर जब कानून की बात आती है तो न्याय तक नहीं मिल पाता है। वास्तव में जरूरत है ऐसी लीडरशिप की जो समाज का पूरा ध्यान रखकर देश को आगे ले जाए। उन्होंने कहा कि अब जो समय है उसको समझना जरूरी है। हम ऐसे युग में जी रहे हैं जिसमें कुछ भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक विचारधारा बना दी जाती है और लोग उसको फालो करने लगते हैं। ऐसा पहले नहीं होता था। समाज को अपने पक्ष में करने के लिए कुछ राजनेता ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि देश एक बड़े संकट से गुजर रहा है।
नई टेक्नोलॉजी को जानना जरूरी
लुधियाना के अमरजीत ग्रेवाल ने शिक्षा और रोजगार पर पेपर पढ़ा। उन्होंने कहा कि औद्योगिकीकरण ने अब एजुकेशन सिस्टम के प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उन्होेंने कहा कि रोजाना नई से नई टेक्नोलॉजी आ रही है। इसे जानना बेहद जरूरी है। यही वजह से बाजार का सीधा प्रभाव अब एजुकेशन पर है। यह ठीक था यदि इससे रोजगार में बढ़ोतरी होती, लेकिन हो कुछ उल्टा रहा है। पंजाब में खासतौर से इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है कि लोग पंजाब को छोड़कर जा रहे हैं। इस मौके पर चीफ गेस्ट पंजाबी अकादमंी नई दिल्ली के वाइस प्रेसीडेंट जरनैल सिंह मुख्य अतिथि थे। यहां सीनियर एडवोकेट मंजीत सिंह खैरा, प्रोफेसर मंजीत सिंह, अवतार पार सिंह, गुरनाम कंवर मौजूद रहे।
इंस्टीट्यूशन पर भी है नेताओं का प्रभाव
सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि अब कई इंस्टीट्यूशन पर भी नेताओं का प्रभाव झलकने लगा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कई इंस्टीट्यूशन दबाव में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता की बात करें तो कई इंस्टीट्यूशन को स्वायत्त होना चाहिए जिससे वह अपना काम शानदार ढंग से कर सकें।
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अभिव्यक्ति की आजादी भी खतरे में
जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के प्रेसीडेंट एन साईं बाला ने कहा कि ऐसा लगता है कि अभिव्यक्ति की आजादी भी खतरे में है। लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं मिल पा रहा है। संविधान में हमारे लिए जो कानून बनाए गए हैं हमें उसी के आधार पर चलना चाहिए। कुछ बड़े और प्रभावशाली लोगों की वजह से आम जनता फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का उपयोग नहीं कर पाती है। डेमोक्रेटिक कंट्री का मतलब ही है कि फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन हरेक को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को एक बड़े और आर्थिक संकट से उबारना आवश्यक है। इश्यू को दबाया जाता है और यह एक बड़ी विडंबना है।
आशफा का केस छोड़ने के लिए दबाव डाला गया
जम्मू कश्मीर की वकील दीपिका राजवंत ने एक बार फिर पंजाब कला भवन के मंच पर अपनी आपबीती बताई। दीपिका राजवंत ने बताया कि वो आशफा का केस लड़ रही थीं तो उस समय उनको न सिर्फ धमकियां मिलीं बल्कि कई बड़े अधिकारियों ने उनका फोन तक ब्लॉक कर दिया। उन्होंने कहा कि वह तो न्याय के लिए लड़ रही थीं लेकिन उस न्याय के मिलने में पता नहीं लोगों का क्या हित छुपा था जिसकी वजह से लोगों ने उनसे कन्नी काट ली। दीपिका राजवंत ने कहा कि यदि आप अकेले हैं तो लोग तोड़ते हैं। हां, यदि आपके साथ लोग आते हैं तो आप अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।
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सामाजिक न्याय के कानून तो बने, पर क्या न्याय मिल पाता है : कन्हैया कुमार
-दीपिका राजवंत, एन साई बाला, अनुपम गुप्ता ने भी शिरकत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। वर्ल्ड पंजाबी कांफ्रेंस का अंतिम दिन देश के ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित रहा। रविवार को पंजाब कला भवन में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध सिविल एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने की। इस दौरान प्रसिद्ध छात्र नेता कन्हैया कुमार, जम्मू कश्मीर की एडवोकेट दीपिका राजवंत और जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष एन साईं बाला मौजूद रहे। प्रसिद्ध छात्र नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि हमें सामाजिक न्याय दिलाने के कानून तो बना दिए गए, पर जब कानून की बात आती है तो न्याय तक नहीं मिल पाता है। वास्तव में जरूरत है ऐसी लीडरशिप की जो समाज का पूरा ध्यान रखकर देश को आगे ले जाए। उन्होंने कहा कि अब जो समय है उसको समझना जरूरी है। हम ऐसे युग में जी रहे हैं जिसमें कुछ भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक विचारधारा बना दी जाती है और लोग उसको फालो करने लगते हैं। ऐसा पहले नहीं होता था। समाज को अपने पक्ष में करने के लिए कुछ राजनेता ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि देश एक बड़े संकट से गुजर रहा है।
नई टेक्नोलॉजी को जानना जरूरी
लुधियाना के अमरजीत ग्रेवाल ने शिक्षा और रोजगार पर पेपर पढ़ा। उन्होंने कहा कि औद्योगिकीकरण ने अब एजुकेशन सिस्टम के प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उन्होेंने कहा कि रोजाना नई से नई टेक्नोलॉजी आ रही है। इसे जानना बेहद जरूरी है। यही वजह से बाजार का सीधा प्रभाव अब एजुकेशन पर है। यह ठीक था यदि इससे रोजगार में बढ़ोतरी होती, लेकिन हो कुछ उल्टा रहा है। पंजाब में खासतौर से इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है कि लोग पंजाब को छोड़कर जा रहे हैं। इस मौके पर चीफ गेस्ट पंजाबी अकादमंी नई दिल्ली के वाइस प्रेसीडेंट जरनैल सिंह मुख्य अतिथि थे। यहां सीनियर एडवोकेट मंजीत सिंह खैरा, प्रोफेसर मंजीत सिंह, अवतार पार सिंह, गुरनाम कंवर मौजूद रहे।
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इंस्टीट्यूशन पर भी है नेताओं का प्रभाव
सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि अब कई इंस्टीट्यूशन पर भी नेताओं का प्रभाव झलकने लगा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कई इंस्टीट्यूशन दबाव में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता की बात करें तो कई इंस्टीट्यूशन को स्वायत्त होना चाहिए जिससे वह अपना काम शानदार ढंग से कर सकें।
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अभिव्यक्ति की आजादी भी खतरे में
जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन के प्रेसीडेंट एन साईं बाला ने कहा कि ऐसा लगता है कि अभिव्यक्ति की आजादी भी खतरे में है। लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं मिल पा रहा है। संविधान में हमारे लिए जो कानून बनाए गए हैं हमें उसी के आधार पर चलना चाहिए। कुछ बड़े और प्रभावशाली लोगों की वजह से आम जनता फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का उपयोग नहीं कर पाती है। डेमोक्रेटिक कंट्री का मतलब ही है कि फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन हरेक को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को एक बड़े और आर्थिक संकट से उबारना आवश्यक है। इश्यू को दबाया जाता है और यह एक बड़ी विडंबना है।
आशफा का केस छोड़ने के लिए दबाव डाला गया
जम्मू कश्मीर की वकील दीपिका राजवंत ने एक बार फिर पंजाब कला भवन के मंच पर अपनी आपबीती बताई। दीपिका राजवंत ने बताया कि वो आशफा का केस लड़ रही थीं तो उस समय उनको न सिर्फ धमकियां मिलीं बल्कि कई बड़े अधिकारियों ने उनका फोन तक ब्लॉक कर दिया। उन्होंने कहा कि वह तो न्याय के लिए लड़ रही थीं लेकिन उस न्याय के मिलने में पता नहीं लोगों का क्या हित छुपा था जिसकी वजह से लोगों ने उनसे कन्नी काट ली। दीपिका राजवंत ने कहा कि यदि आप अकेले हैं तो लोग तोड़ते हैं। हां, यदि आपके साथ लोग आते हैं तो आप अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।