{"_id":"5952c51d4f1c1bcf188b4869","slug":"151498596637-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्ट्रासाउंड ठप होने के मामले में एडवाइजर ने मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्ट्रासाउंड ठप होने के मामले में एडवाइजर ने मांगी रिपोर्ट
Updated Wed, 28 Jun 2017 02:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्ट्रासाउंड नहीं होने के मामले में एडवाइजर ने मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पिछले कई सालों से सरकारी अस्पतालों में ठप चल रहे अल्ट्रासाउंड के मामले में एडवाइजर परिमल राय ने चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। एडवाइजर ने एडमिनिस्ट्रेटिव पोर्टल में स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस से पूछा है कि आखिर इन अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं चल रहे। शहर के सेक्टर 22, 45 और मनीमाजरा में पिछले कई सालों से अल्ट्रासाउंड की सुविधा ठप पड़ी है। इससे प्रेग्नेंट महिलाओं को प्राइवेट पैथोलाजी सेंटर व चैरिटेबल ट्रस्ट मेें भेजा जाता है। जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और परेशानी भी उठानी पड़ती है। चाहे जितनी इमरजेंसी हो, उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट पैथोलाजी में ही जाना पड़ता है। मंगलवार के अंक में अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया था। मंगलवार को एडवाइजर साहब! सिविल अस्पतालों में कब होंगे अल्ट्रासाउंड के शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इन तीनों हास्पिटल में अल्ट्रासाउंड की मशीने हैं, लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से मशीने रखे-रखे खराब हो रही हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पिछले कई सालों से सरकारी अस्पतालों में ठप चल रहे अल्ट्रासाउंड के मामले में एडवाइजर परिमल राय ने चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। एडवाइजर ने एडमिनिस्ट्रेटिव पोर्टल में स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस से पूछा है कि आखिर इन अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं चल रहे। शहर के सेक्टर 22, 45 और मनीमाजरा में पिछले कई सालों से अल्ट्रासाउंड की सुविधा ठप पड़ी है। इससे प्रेग्नेंट महिलाओं को प्राइवेट पैथोलाजी सेंटर व चैरिटेबल ट्रस्ट मेें भेजा जाता है। जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और परेशानी भी उठानी पड़ती है। चाहे जितनी इमरजेंसी हो, उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट पैथोलाजी में ही जाना पड़ता है। मंगलवार के अंक में अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया था। मंगलवार को एडवाइजर साहब! सिविल अस्पतालों में कब होंगे अल्ट्रासाउंड के शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इन तीनों हास्पिटल में अल्ट्रासाउंड की मशीने हैं, लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से मशीने रखे-रखे खराब हो रही हैं।