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Panchkula News: पंचकूला की जगह पंचकोला लिख उड़ाए 145 करोड़, सबूत मिटाने के लिए तोड़े सह-आरोपियों के मोबाइल
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ईडी की जांच में खुलासा पूर्व बैंक मैनेजर, एचएसवीपी को किया करोड़ों का भुगतान, मामला दर्ज होने से पहले बेचीं बेनामी संपत्तियांचालाकी, स्पेलिंग में फेरबदल कर बनाईं दो फर्जी ईमेल आईडी
दीपक शाही
पंचकूला। कोटक महिंद्रा के खातों में हुए 145 करोड़ रुपये से अधिक के फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। जांच में खुलासा हुआ है कि कोटक महिंद्रा बैंक सेक्टर-11, पंचकूला के पूर्व शाखा प्रबंधक और डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह ने नगर निगम को धोखे में रखने के लिए अंग्रेजी के अक्षरों का एक शातिर खेल खेला था। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, नगर निगम पंचकूला के दफ्तर में मुख्य रूप से mcpanchkula2019@ gmail.com और acctmcpkl@ yahoo.com ईमेल आईडी का इस्तेमाल होता था। आरोपी बैंक मैनेजर पुष्पेंद्र सिंह ने निगम की भनक लगे बिना फर्जी कम्युनिकेशंस और जाली बैंक स्टेटमेंट्स को रूट करने के लिए दो फर्जी ईमेल आईडी तैयार कर लीं। उसने पंचकूला की स्पेलिंग में चालाकी से फेरबदल कर पंचकोला करते हुए mcpanchkola@ gmail.com नाम की मेल आईडी बना दी। इसके साथ ही एक और फर्जी आईडी mcpanchkula.sao@ gmail.com भी बनाई गई जिसका सरकारी सिस्टम से कोई लेना-देना ही नहीं था।
प्रापर्टी के लिए एचएसवीपी को किए करोड़ों के भुगतान
ईडी की ओर से पुष्पेंद्र सिंह के बैंक खातों के किए गए गहन विश्लेषण से साफ हुआ है कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जुटाए गए सरकारी फंड को अचल संपत्तियों में बदला था। नगर निगम के खातों से उड़ाए फंड का एक बड़ा हिस्सा सीधे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के खाते में ट्रांसफर किया गया। पुष्पेंद्र ने अपने और पत्नी प्रीति ठाकुर के खातों से एचएसवीपी को करोड़ों रुपये के भारी-भरकम भुगतान किए और कई कीमती अचल संपत्तियां व प्लॉट खरीदे। हालांकि, कानून के शिकंजे से बचने के लिए शातिर दिमाग पुष्पेंद्र ने मार्च 2026 में ईडी द्वारा केस दर्ज किए जाने से ठीक पहले इन सभी संपत्तियों को आनन-फानन में बेच डाला और रकम को ठिकाने लगा दिया।
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डिजिटल सबूतों को नष्ट किया
जांच में सामने आया है कि पुष्पेंद्र सिंह ने मनी लॉन्ड्रिंग के खेल को छिपाने और डिजिटल सबूतों को नष्ट करने के लिए सह-आरोपियों रजत डहरा और स्वाति तोमर के मोबाइल फोन तक तोड़ डाले थे ताकि उनके बीच हुई बातचीत और चैट का कोई रिकॉर्ड न मिल सके। यही नहीं, घोटाले की रकम से स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर जैसी आलीशान गाड़ियां और एन-मैक्स बाइक खरीदी गईं जिन्हें मार्च 2026 से पहले ही ठिकाने लगा दिया गया। ईडी अब रिमांड के दौरान आरोपी से इन सभी कड़ियों को लेकर राज उगलवाएगी।
बचाव में रची कहानी, सह-आरोपियों ने खोली पोल
ईडी की पूछताछ में आरोपी पुष्पेंद्र ने खुद को बचाने के लिए दावा किया कि उसने और उसकी पत्नी ने साल 2020 से 2023 के बीच सह-आरोपी रजत डहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये का लोन लिया था। हालांकि, स्वाति और रजत ने ईडी को दिए बयान में इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईडी का स्पष्ट मानना है कि यह कोई लोन नहीं बल्कि नगर निगम के फंड की लेयरिंग करके कमाई गई शुद्ध रूप से काली कमाई है, जिसे वैध दिखाने के लिए लोन का नाटक रचा गया था।
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दीपक शाही
पंचकूला। कोटक महिंद्रा के खातों में हुए 145 करोड़ रुपये से अधिक के फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। जांच में खुलासा हुआ है कि कोटक महिंद्रा बैंक सेक्टर-11, पंचकूला के पूर्व शाखा प्रबंधक और डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह ने नगर निगम को धोखे में रखने के लिए अंग्रेजी के अक्षरों का एक शातिर खेल खेला था। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, नगर निगम पंचकूला के दफ्तर में मुख्य रूप से mcpanchkula2019
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प्रापर्टी के लिए एचएसवीपी को किए करोड़ों के भुगतान
ईडी की ओर से पुष्पेंद्र सिंह के बैंक खातों के किए गए गहन विश्लेषण से साफ हुआ है कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जुटाए गए सरकारी फंड को अचल संपत्तियों में बदला था। नगर निगम के खातों से उड़ाए फंड का एक बड़ा हिस्सा सीधे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के खाते में ट्रांसफर किया गया। पुष्पेंद्र ने अपने और पत्नी प्रीति ठाकुर के खातों से एचएसवीपी को करोड़ों रुपये के भारी-भरकम भुगतान किए और कई कीमती अचल संपत्तियां व प्लॉट खरीदे। हालांकि, कानून के शिकंजे से बचने के लिए शातिर दिमाग पुष्पेंद्र ने मार्च 2026 में ईडी द्वारा केस दर्ज किए जाने से ठीक पहले इन सभी संपत्तियों को आनन-फानन में बेच डाला और रकम को ठिकाने लगा दिया।
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डिजिटल सबूतों को नष्ट किया
जांच में सामने आया है कि पुष्पेंद्र सिंह ने मनी लॉन्ड्रिंग के खेल को छिपाने और डिजिटल सबूतों को नष्ट करने के लिए सह-आरोपियों रजत डहरा और स्वाति तोमर के मोबाइल फोन तक तोड़ डाले थे ताकि उनके बीच हुई बातचीत और चैट का कोई रिकॉर्ड न मिल सके। यही नहीं, घोटाले की रकम से स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर जैसी आलीशान गाड़ियां और एन-मैक्स बाइक खरीदी गईं जिन्हें मार्च 2026 से पहले ही ठिकाने लगा दिया गया। ईडी अब रिमांड के दौरान आरोपी से इन सभी कड़ियों को लेकर राज उगलवाएगी।
बचाव में रची कहानी, सह-आरोपियों ने खोली पोल
ईडी की पूछताछ में आरोपी पुष्पेंद्र ने खुद को बचाने के लिए दावा किया कि उसने और उसकी पत्नी ने साल 2020 से 2023 के बीच सह-आरोपी रजत डहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये का लोन लिया था। हालांकि, स्वाति और रजत ने ईडी को दिए बयान में इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईडी का स्पष्ट मानना है कि यह कोई लोन नहीं बल्कि नगर निगम के फंड की लेयरिंग करके कमाई गई शुद्ध रूप से काली कमाई है, जिसे वैध दिखाने के लिए लोन का नाटक रचा गया था।