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डाटा ऑनलाइन होने से मिलेगी राहत
Updated Sun, 05 Aug 2018 01:21 AM IST
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रेंट हाउस का डाटा होगा ऑनलाइन
24 हजार कर्मियों को मिलेगी राहत
- आए दिन हाउस रेंट विभाग की कार्यशैली पर उठते रह हैं सवाल
- दिसंबर तक रेंट हाउस का पूरा डाटा हो जाएगा ऑनलाइन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रशासन में सरकारी आवास अलॉटमेंट में पारदर्शिता लाने के लिए हाउस रेंट विभाग पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने जा रहा है। हाउस रेंट का डाटा ऑनलाइन होने से विभागीय कार्य प्रणाली में सरल होगी। वहीं, कर्मचारियों को सरकारी आवास छोड़ने के बाद नो ड्यूज और एनओसी लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। यूटी प्रशासन में वर्तमान समय में करीब 24 हजार कर्मचारी तैनात हैं।
हाउस रेंट विभाग कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर लगातार असहज रहता है। सरकारी आवास के रेंट को लेकर दर्जनों मामले लंबित हैं। इन मामलों को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं, लेकिन अब कर्मचारियों को सरकारी मकान छोड़ने के बाद नोड्यूज और एनओसी लेने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अभी फिलहाल कर्मचारियों को इस काम के लिए कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार एनओसी लेने के बावजूद भी विभाग की ओर से कर्मचारियों को बकाया राशि क्लीयर न करने के नोटिस जारी कर दिए जाते हैं।
14 हजार के करीब सरकारी मकान
शहर में 14 हजार के करीब सरकारी मकान है, जोकि विभिन्न सेक्टरों में स्थित है। विभाग की ओर से इनकी अलॉटमेंट का काम पहले ही ऑनलाइन कर दिया था, लेकिन रेंट विभाग की कार्यप्रणाली सरल न होने के चलते कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनमें से चार हजार के करीब मकान तो कई कारणों के चलते खाली भी पड़े हैं। इनमें से कई मकानों की हालत खस्ता बनी हुई हैं। प्रक्रिया में पारदर्शिता आने से खाली पड़े आवासों की वास्तविक स्थिति का भी पता चल जाएगा।
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पूरा डाटा हो जाएगा ऑनलाइन
नए सिस्टम के शुरू होने के साथ ही जैसे ही किसी भी कर्मचारी को सरकारी मकान अलॉट होगा, तो उसका पूरा डाटा ऑनलाइन हो जाएगा। इसमें कब उसे मकान की अलॉटमेंट हुई और हर माह जमा करवाए जाने वाले रेंट और अन्य ड्यूज अपडेट होते रहेंगे। इससे यह फायदा होगा कि रिटायरमेंट या अन्य किसी केस में जब भी वह मकान खाली करेगा तो ऑनलाइन सारा डाटा उपलब्ध होने के चलते तुरंत उसे नो ड्यूज और एनओसी मिल जाएगी।
कर्मचारियों को नहीं होगी दिक्कत
कई बार तो एनओसी लेने के बावजूद भी सही रिकार्ड उपलब्ध न होने के चलते कर्मचारियों को बकाया राशि के नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। कई कर्मचारियों का साथ ऐसा हुआ भी, जिसके बाद उन्होंने विभाग को शिकायत दी और उसके बाद जाकर ही उनका मामला सेटल हुआ। कर्मचारियों को मकान हैंडओवर करने से पहले नो ड्यूज, एनओसी के अलावा हाउस अलॉटमेंट विभाग के एरिया इंस्पेक्टर से हैंडओवर का लेटर भी लेना होता है, लेकिन अब ऐसी दिक्कत कर्मचारियों को ऐसी दिक्कत से निजात मिल जाएगा।
तेजी से चल रहा काम
हाउस अलॉटमेंट कमेटी के सेक्रेटरी जितेंद्र यादव ने बताया कि रेंट अलॉटमेंट की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। इस साल दिसंबर तक वह इसे शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि ई-आवास के तहत मॉड्यूल तैयार है। अब सिर्फ इसमें डाटा और अन्य काम करने बाकी है। उन्होंने कहा कि विभाग का काम ऑनलाइन होने से कर्मचारियों को नोड्यूज और एनओसी पाने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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24 हजार कर्मियों को मिलेगी राहत
- आए दिन हाउस रेंट विभाग की कार्यशैली पर उठते रह हैं सवाल
- दिसंबर तक रेंट हाउस का पूरा डाटा हो जाएगा ऑनलाइन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रशासन में सरकारी आवास अलॉटमेंट में पारदर्शिता लाने के लिए हाउस रेंट विभाग पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने जा रहा है। हाउस रेंट का डाटा ऑनलाइन होने से विभागीय कार्य प्रणाली में सरल होगी। वहीं, कर्मचारियों को सरकारी आवास छोड़ने के बाद नो ड्यूज और एनओसी लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। यूटी प्रशासन में वर्तमान समय में करीब 24 हजार कर्मचारी तैनात हैं।
हाउस रेंट विभाग कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर लगातार असहज रहता है। सरकारी आवास के रेंट को लेकर दर्जनों मामले लंबित हैं। इन मामलों को लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं, लेकिन अब कर्मचारियों को सरकारी मकान छोड़ने के बाद नोड्यूज और एनओसी लेने में कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अभी फिलहाल कर्मचारियों को इस काम के लिए कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार एनओसी लेने के बावजूद भी विभाग की ओर से कर्मचारियों को बकाया राशि क्लीयर न करने के नोटिस जारी कर दिए जाते हैं।
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14 हजार के करीब सरकारी मकान
शहर में 14 हजार के करीब सरकारी मकान है, जोकि विभिन्न सेक्टरों में स्थित है। विभाग की ओर से इनकी अलॉटमेंट का काम पहले ही ऑनलाइन कर दिया था, लेकिन रेंट विभाग की कार्यप्रणाली सरल न होने के चलते कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनमें से चार हजार के करीब मकान तो कई कारणों के चलते खाली भी पड़े हैं। इनमें से कई मकानों की हालत खस्ता बनी हुई हैं। प्रक्रिया में पारदर्शिता आने से खाली पड़े आवासों की वास्तविक स्थिति का भी पता चल जाएगा।
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पूरा डाटा हो जाएगा ऑनलाइन
नए सिस्टम के शुरू होने के साथ ही जैसे ही किसी भी कर्मचारी को सरकारी मकान अलॉट होगा, तो उसका पूरा डाटा ऑनलाइन हो जाएगा। इसमें कब उसे मकान की अलॉटमेंट हुई और हर माह जमा करवाए जाने वाले रेंट और अन्य ड्यूज अपडेट होते रहेंगे। इससे यह फायदा होगा कि रिटायरमेंट या अन्य किसी केस में जब भी वह मकान खाली करेगा तो ऑनलाइन सारा डाटा उपलब्ध होने के चलते तुरंत उसे नो ड्यूज और एनओसी मिल जाएगी।
कर्मचारियों को नहीं होगी दिक्कत
कई बार तो एनओसी लेने के बावजूद भी सही रिकार्ड उपलब्ध न होने के चलते कर्मचारियों को बकाया राशि के नोटिस जारी कर दिए जाते हैं। कई कर्मचारियों का साथ ऐसा हुआ भी, जिसके बाद उन्होंने विभाग को शिकायत दी और उसके बाद जाकर ही उनका मामला सेटल हुआ। कर्मचारियों को मकान हैंडओवर करने से पहले नो ड्यूज, एनओसी के अलावा हाउस अलॉटमेंट विभाग के एरिया इंस्पेक्टर से हैंडओवर का लेटर भी लेना होता है, लेकिन अब ऐसी दिक्कत कर्मचारियों को ऐसी दिक्कत से निजात मिल जाएगा।
तेजी से चल रहा काम
हाउस अलॉटमेंट कमेटी के सेक्रेटरी जितेंद्र यादव ने बताया कि रेंट अलॉटमेंट की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। इस साल दिसंबर तक वह इसे शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि ई-आवास के तहत मॉड्यूल तैयार है। अब सिर्फ इसमें डाटा और अन्य काम करने बाकी है। उन्होंने कहा कि विभाग का काम ऑनलाइन होने से कर्मचारियों को नोड्यूज और एनओसी पाने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।