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देश की संस्कृति व सभ्यता पर विश्वास रखकर युवा आगे बढ़ें : वेंकैया नायडू
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चंडीगढ़। उपराष्ट्रपति एवं चांसलर एम वेंकैया नायडू रविवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में कई भूमिकाओं में नजर आए। उन्होंने युवाओं को सफलता के मंत्र देकर शिक्षक की भूमिका अदा की। उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वह देश की संस्कृति और सभ्यता पर विश्वास रखकर आगे बढ़ें। सहिष्णुता और सम्मान की परंपराओं का पालन करें। सफलता का शॉर्टकट नहीं है। इसलिए विजन साफ रखते हुए हार्डवर्क करना होगा।
दृष्टि, जुनून और क्षमता का आंकलन करें
पीयू के जिमभनेजियम हॉल में हुए दीक्षांत समारोह में चांसलर एम वेंकैया नायडू ने कहा कि देश बदल रहा है, इसलिए युवाओं की जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी। समाज को आगे ले जाना होगा, इसलिए युवाओं को सामाजिक कार्यों में भागीदारी करनी होगी। सामाजिक संगठनों का निर्माण करना होगा। इसके लिए दृष्टि, जुनून और क्षमता का आंकलन करना होगा। नजरिया हमेशा साफ होना चाहिए। उसकी क्षमता को देखते हुए जुनून होना चाहिए। आने वाले वर्षों में जनसांख्यिकी लाभांश होगा लेकिन इसके लिए अपने आपको सशक्त करने की जरूरत है। सही कौशल व दृष्टिकोण सही रखना होगा।
कॉन्वेंट स्कूल में पढ़कर नहीं, कड़ी मेहनत से मिलती है सफलता
उन्होंने कहा कि कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने से सफलता हासिल नहीं होती, इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हों या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इन सबने कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई नहीं की। इसलिए सरकारी संस्थानों पर विश्वास रखें। उन्होंने युवाओं को जिज्ञासा, नवाचार, लोकाचार की धाराओं पर कार्य करने को कहा। स्वास्थ्य के टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए अच्छा खाना खाएं। युवा जंक फूड का परहेज करें। हेल्दी रहेंगे तो ही देश आगे बढ़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि योग के प्रति कोई धारणा न बनाएं, यह शरीर को स्वस्थ रखता है इसलिए सभी लोग हर दिन योग करें। सूर्यनमस्कार से ऊर्जा मिलती है। कहते हैं कि वह खुद भी खेल गतिविधियों में अभी हिस्सा लेते हैं। संचार प्रौद्योगिकी के आधुनिक साधनों का उपयोग कर कार्य किए जा सकते हैं। सामाजिक समरता को सुगम बनाने की भी उन्होंने सीख दी।
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मातृभाषा है आंख तो देशज भाषाएं हैं चश्मा
उन्होंने मातृभाषा पर जोर देते हुए कहा कि सभी को मातृभाषा में बात करनी चाहिए। विदेशों में हर कोई अपनी भाषा में ही बात करता है इसलिए मदर टंग को प्रमोट करें। मातृभाषा आंख का काम करती हैं तो देशज भाषाएं चश्में का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे आज मम्मी, डैडी बोलकर माता-पिता को पुकारते हैं, लेकिन माता-पिता अपने में अच्छा शब्द है। उन्होंने कहा भारत को विश्वगुरु ऐसे ही नहीं कहा गया, भाषा का भी बड़ा योगदान रहा है। पूरी दुनिया में देश का टैलेंट भी भाषाओं के जरिये पहुंचा है। जिस तरह विदेशों में अपनी भाषाओं में बात की जाती है। उसी तरह यहां भी मातृभाषा में बात करें।
शिक्षण संस्थान राजनीति का अड्डा न बनें
उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम देश में उच्च शिक्षा को लेकर गंभीरतापूर्वक पुनर्विचार करें। इसमें भारतीय मूल्यों, हिंदुस्तानी संस्कृति, देशीय वातावरण और प्राचीन ज्ञान को समाहित करें। इसके लिए जरूरी है कि विश्वविद्यालयी परिसरों में सिर्फ शैक्षणिक गतिविधियां हों। इन परिसरों को ज्ञान की प्राप्ति के केंद्र के रूप में बनाए रखना है। इसकेलिए वह सूचना तकनीकी केउपयोग के समर्थक हैं लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे साधनों का सकारात्मक एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपयोग हो। इस दौरान उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का जिक्र किया। कहा कि इन्हें खुला छोड़ दें यह अपने आप आसमान को छू लेंगी। उन्होंने स्वच्छता अभियान की भी तारीफ की। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि समय समय पर खुद को अपडेट करते रहें। उन्होंने यह भी कहा कि पीयू की रैकिंग में और सुधार होना चाहिए।
इसरो के चेयरमैन डॉ. सिवन को विज्ञान रत्न पुरस्कार
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इस दौरान इसरो के चेयरमैन डॉ. के सिवन को पीयू की ओर से विज्ञान रत्न पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि युवा उनसे सीख लें। यह मेहनत आसानी से हासिल नहीं हुई है। इसकेलिए बहुत हार्डवर्क किया गया है। इस दौरान 1020 लोगों डिग्रियां प्रदान की गईं। 493 पीएचडी की डिग्रियां इसमें शामिल हैं। 16 राज्यों के विद्यार्थियों को यह डिग्रियां दी गईं। इससे पूर्व पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा कि पीयू लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है। आगे भी बेहतर कार्य होंगे। उन्होंने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर यूटी प्रशासक एवं पंजाब गवर्नर वीपी सिंह बदनौर, रजिस्ट्रार करमजीत सिंह, कंट्रोलर परविंदर सिंह, डीसी मनदीप बराड़, डीपीआर रेनुका बी सलवान, पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर आदि मौजूद रहीं। संचालन पीयू हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह ने किया।
दरवाजा बजाते ही हुआ व्यवधान
दीक्षांत समारोह जैसे ही शुरू हुआ तो कई विद्यार्थियों ने हॉल के गेट बजाना शुरू कर दिया। सभी लोगों का ध्यान उस ओर हो गया। कुछ समय तक प्रक्रिया भी बाधित रही। इस दौरान धक्कामुक्की भी हुई। बताया गया कि कुछ विद्यार्थी लेट होने के कारण बाहर खड़े थे।
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दृष्टि, जुनून और क्षमता का आंकलन करें
पीयू के जिमभनेजियम हॉल में हुए दीक्षांत समारोह में चांसलर एम वेंकैया नायडू ने कहा कि देश बदल रहा है, इसलिए युवाओं की जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी। समाज को आगे ले जाना होगा, इसलिए युवाओं को सामाजिक कार्यों में भागीदारी करनी होगी। सामाजिक संगठनों का निर्माण करना होगा। इसके लिए दृष्टि, जुनून और क्षमता का आंकलन करना होगा। नजरिया हमेशा साफ होना चाहिए। उसकी क्षमता को देखते हुए जुनून होना चाहिए। आने वाले वर्षों में जनसांख्यिकी लाभांश होगा लेकिन इसके लिए अपने आपको सशक्त करने की जरूरत है। सही कौशल व दृष्टिकोण सही रखना होगा।
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कॉन्वेंट स्कूल में पढ़कर नहीं, कड़ी मेहनत से मिलती है सफलता
उन्होंने कहा कि कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने से सफलता हासिल नहीं होती, इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हों या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इन सबने कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई नहीं की। इसलिए सरकारी संस्थानों पर विश्वास रखें। उन्होंने युवाओं को जिज्ञासा, नवाचार, लोकाचार की धाराओं पर कार्य करने को कहा। स्वास्थ्य के टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए अच्छा खाना खाएं। युवा जंक फूड का परहेज करें। हेल्दी रहेंगे तो ही देश आगे बढ़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि योग के प्रति कोई धारणा न बनाएं, यह शरीर को स्वस्थ रखता है इसलिए सभी लोग हर दिन योग करें। सूर्यनमस्कार से ऊर्जा मिलती है। कहते हैं कि वह खुद भी खेल गतिविधियों में अभी हिस्सा लेते हैं। संचार प्रौद्योगिकी के आधुनिक साधनों का उपयोग कर कार्य किए जा सकते हैं। सामाजिक समरता को सुगम बनाने की भी उन्होंने सीख दी।
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मातृभाषा है आंख तो देशज भाषाएं हैं चश्मा
उन्होंने मातृभाषा पर जोर देते हुए कहा कि सभी को मातृभाषा में बात करनी चाहिए। विदेशों में हर कोई अपनी भाषा में ही बात करता है इसलिए मदर टंग को प्रमोट करें। मातृभाषा आंख का काम करती हैं तो देशज भाषाएं चश्में का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे आज मम्मी, डैडी बोलकर माता-पिता को पुकारते हैं, लेकिन माता-पिता अपने में अच्छा शब्द है। उन्होंने कहा भारत को विश्वगुरु ऐसे ही नहीं कहा गया, भाषा का भी बड़ा योगदान रहा है। पूरी दुनिया में देश का टैलेंट भी भाषाओं के जरिये पहुंचा है। जिस तरह विदेशों में अपनी भाषाओं में बात की जाती है। उसी तरह यहां भी मातृभाषा में बात करें।
शिक्षण संस्थान राजनीति का अड्डा न बनें
उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि हम देश में उच्च शिक्षा को लेकर गंभीरतापूर्वक पुनर्विचार करें। इसमें भारतीय मूल्यों, हिंदुस्तानी संस्कृति, देशीय वातावरण और प्राचीन ज्ञान को समाहित करें। इसके लिए जरूरी है कि विश्वविद्यालयी परिसरों में सिर्फ शैक्षणिक गतिविधियां हों। इन परिसरों को ज्ञान की प्राप्ति के केंद्र के रूप में बनाए रखना है। इसकेलिए वह सूचना तकनीकी केउपयोग के समर्थक हैं लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे साधनों का सकारात्मक एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपयोग हो। इस दौरान उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का जिक्र किया। कहा कि इन्हें खुला छोड़ दें यह अपने आप आसमान को छू लेंगी। उन्होंने स्वच्छता अभियान की भी तारीफ की। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि समय समय पर खुद को अपडेट करते रहें। उन्होंने यह भी कहा कि पीयू की रैकिंग में और सुधार होना चाहिए।
इसरो के चेयरमैन डॉ. सिवन को विज्ञान रत्न पुरस्कार
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इस दौरान इसरो के चेयरमैन डॉ. के सिवन को पीयू की ओर से विज्ञान रत्न पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि युवा उनसे सीख लें। यह मेहनत आसानी से हासिल नहीं हुई है। इसकेलिए बहुत हार्डवर्क किया गया है। इस दौरान 1020 लोगों डिग्रियां प्रदान की गईं। 493 पीएचडी की डिग्रियां इसमें शामिल हैं। 16 राज्यों के विद्यार्थियों को यह डिग्रियां दी गईं। इससे पूर्व पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा कि पीयू लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है। आगे भी बेहतर कार्य होंगे। उन्होंने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर यूटी प्रशासक एवं पंजाब गवर्नर वीपी सिंह बदनौर, रजिस्ट्रार करमजीत सिंह, कंट्रोलर परविंदर सिंह, डीसी मनदीप बराड़, डीपीआर रेनुका बी सलवान, पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर आदि मौजूद रहीं। संचालन पीयू हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह ने किया।
दरवाजा बजाते ही हुआ व्यवधान
दीक्षांत समारोह जैसे ही शुरू हुआ तो कई विद्यार्थियों ने हॉल के गेट बजाना शुरू कर दिया। सभी लोगों का ध्यान उस ओर हो गया। कुछ समय तक प्रक्रिया भी बाधित रही। इस दौरान धक्कामुक्की भी हुई। बताया गया कि कुछ विद्यार्थी लेट होने के कारण बाहर खड़े थे।