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रैन बसेरे के लिए कब तक इंतजार
Updated Fri, 14 Dec 2018 02:02 AM IST
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रैन बसेरे के लिए गरीबों को
करना होगा अभी इंतजार
प्रशासन ने नगर निगम को सौंपा रैन बसेरे का काम, निगम ने टेंडर अलॉट किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मौसम का पारा गिरने के साथ शहर में रैन बसेरे की आस लगाए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। इस बार प्रशासन ने रैन बसेरा लगवाने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी है। अभी तक यह काम सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट करता था, लेकिन उसकी देखरेख भी नगर निगम ही किया करता था, इसलिए दोनों में आपसी खींचतान बनी रहती थी। इसे देखते हुए अब प्रशासन ने पूरा काम निगम को ही अलॉट कर दिया है।
इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के पर्सनल एवं सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने बताया कि इस बार रैन बसेरे का पूरा काम नगर निगम को दे दिया गया है, इसलिए निगम की ओर से ही शहर के सभी स्थानों पर रैन बसेरे बनवाएं जाएंगे। उन्होंने बताया कि रैन बसेरे का काम अलग-अलग होने से दोनों डिपार्टमेंट में परेशानी आ रही थी। अब रैन बसेरे लगाने से लेकर साफ-सफाई तक का कार्य खुद निगम ही करेगा। उधर, एमसी कमिश्नर का कहना है कि सोशल वेलफेयर ने कार्य ट्रांसफर कर दिया है। इसका टेंडर भी हो चुका है और जल्द ही निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा।
अफसरों को अभी नहीं हुआ सर्दी का अहसास
शहर में रात के समय पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर निगम और प्रशासन के अधिकारियों पर नहीं पड़ा है। यही वजह है कि अभी तक शहर में रैन बसेरे लगने की शुरुआत तक नहीं हुई है। गरीब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं। वहीं, दूर-दराज से आने वाले लोगों को शहर के किसी होटल अथवा सराय मेें सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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काम अलॉट में देरी के चलते हो रहा विलंब
रैन बसेरे सर्दी की शुरुआत के साथ ही बनने शुरू हो जाते थे। इसका काम नवंबर महीने के चौथे सप्ताह में पूरा भी हो जाता था। पिछले साल तक शहर के 45 स्थानों पर रैन बसेरे बने थे, जो सरकारी अस्पतालों और चौकों पर बनाए गए थे। इसमें कोई भी व्यक्ति अपना पहचान पत्र जमा कराकर रात को रुक सकता था। इस बार नगर निगम को ट्रांसफर करने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह काम के अलॉटमेंट में हुई देरी को बताया जा रहा है।
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करना होगा अभी इंतजार
प्रशासन ने नगर निगम को सौंपा रैन बसेरे का काम, निगम ने टेंडर अलॉट किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मौसम का पारा गिरने के साथ शहर में रैन बसेरे की आस लगाए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। इस बार प्रशासन ने रैन बसेरा लगवाने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी है। अभी तक यह काम सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट करता था, लेकिन उसकी देखरेख भी नगर निगम ही किया करता था, इसलिए दोनों में आपसी खींचतान बनी रहती थी। इसे देखते हुए अब प्रशासन ने पूरा काम निगम को ही अलॉट कर दिया है।
इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के पर्सनल एवं सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी बीएल शर्मा ने बताया कि इस बार रैन बसेरे का पूरा काम नगर निगम को दे दिया गया है, इसलिए निगम की ओर से ही शहर के सभी स्थानों पर रैन बसेरे बनवाएं जाएंगे। उन्होंने बताया कि रैन बसेरे का काम अलग-अलग होने से दोनों डिपार्टमेंट में परेशानी आ रही थी। अब रैन बसेरे लगाने से लेकर साफ-सफाई तक का कार्य खुद निगम ही करेगा। उधर, एमसी कमिश्नर का कहना है कि सोशल वेलफेयर ने कार्य ट्रांसफर कर दिया है। इसका टेंडर भी हो चुका है और जल्द ही निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा।
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अफसरों को अभी नहीं हुआ सर्दी का अहसास
शहर में रात के समय पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर निगम और प्रशासन के अधिकारियों पर नहीं पड़ा है। यही वजह है कि अभी तक शहर में रैन बसेरे लगने की शुरुआत तक नहीं हुई है। गरीब खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं। वहीं, दूर-दराज से आने वाले लोगों को शहर के किसी होटल अथवा सराय मेें सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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काम अलॉट में देरी के चलते हो रहा विलंब
रैन बसेरे सर्दी की शुरुआत के साथ ही बनने शुरू हो जाते थे। इसका काम नवंबर महीने के चौथे सप्ताह में पूरा भी हो जाता था। पिछले साल तक शहर के 45 स्थानों पर रैन बसेरे बने थे, जो सरकारी अस्पतालों और चौकों पर बनाए गए थे। इसमें कोई भी व्यक्ति अपना पहचान पत्र जमा कराकर रात को रुक सकता था। इस बार नगर निगम को ट्रांसफर करने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह काम के अलॉटमेंट में हुई देरी को बताया जा रहा है।