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हरियाणा : प्रदेश में 2021-22 का शैक्षणिक सत्र खत्म होने को, 10710 बच्चों को नियम-134ए के तहत निजी स्कूलों में नहीं मिला दाखिला
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चंडीगढ़/रोहतक। शैक्षणिक सत्र 2021-22 खत्म होने को है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 10710 बच्चे निजी स्कूलों में दाखिले के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। नियम-134ए के तहत इन्हें अब तक स्कूलों में दाखिला नहीं मिला है। 530 स्कूलों ने तो एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिया। निजी स्कूलों का कहना है कि फीस प्रतिपूर्ति की बकाया 1000 करोड़ से अधिक राशि सरकार दे, तो दाखिला देने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इधर, स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए कड़े कदम उठाए, तो स्कूल संचालक हाईकोर्ट पहुंच गए। जिससे अब निजी स्कूलों पर कार्रवाई करना आसान नहीं है। फरीदाबाद, रेवाड़ी, पलवल, रोहतक, यमुनानगर, गुरुग्राम, अंबाला, सोनीपत, पंचकूला इत्यादि जिलों के स्कूल नियम-134ए के तहत बच्चों को दाखिला नहीं देने पर अड़े हैं। डीईओ की ओर से कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा गया कि क्यों न मान्यता वापस ले ली जाए। इससे स्कूल संचालक बिफर गए।
41331 सीटें आवंटित, 24 हजार बच्चों को ही दाखिला
विभाग को पहले चरण के ड्रॉ के तहत बच्चों को दाखिला दिलाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दूसरी से आठवीं कक्षा तक 22 जिलों के निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के लिए 41331 सीटें आवंटित की गईं। जिनमें से लगभग 24 हजार से अधिक बच्चों को दाखिला मिला। 6371 बच्चों की दावेदारी खारिज कर दी गई। दूसरे चरण का ड्रॉ भी निकाला गया है, जिसके तहत कुछ ही दाखिल हुए।
वंचित बच्चों को सरकारी स्कूल भी दाखिला देने में कर रहे आनाकानी
मौलिक शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर कहा है कि नियम-134ए के तहत 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए प्रथम चरण के तहत 10710 बच्चों के दाखिला बाकी हैं। इनकी सीटें सुरक्षित रखी गई हैं। इन सीटों पर दूसरे चरण के बच्चों का दाखिल नहीं किया जाएगा। इनमें अधिकतर बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले स्कूल से एसएलसी (स्कूल लिविंग सर्टीफिकेट) ले लिया था, लेकिन निजी स्कूलों में दाखिला न होने के कारण घर बैठे हैं। इन बच्चों को सरकारी स्कूल भी दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने साफ निर्देश दिए हैं कि इन्हें सरकारी स्कूल हर हाल में दाखिला दें। इसके अलावा जिन बच्चों ने निजी स्कूलों से एसएलसी ले लिया है, अगर वे दोबारा वहीं दाखिल होना चाहते हैं तो उन्हें पुरानी फीस पर ही दाखिला दिलवाएं। नए सिरे से पूरी फीस मांगने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करें। सभी डीईईओ अपने-अपने जिले में दाखिला से वंचित बच्चों की मदद कर उन्हें सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाएं।
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मांगन मानी तो सड़कों पर उतरेंगे
सरकार निजी स्कूलों को गरीब बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के एक हजार रुपये से अधिक जल्द जारी करे। ये राशि न मिलने से विवाद और बढ़ेगा। अभी तो स्कूल दाखिला देने से इनकार कर रहे हैं, भविष्य में सड़कों पर भी उतरेंगे।
- कुलभूषण शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, निसा
स्कूल संचालकों की पीड़ा समझे सरकार
सरकार नौवीं से बारहवीं के बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति की राशि भी तय करे। दूसरी से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने का बकाया पैसा जारी किया जाए। निजी स्कूलों पर दबाव बनाने के बजाय सरकार उनकी पीड़ा भी समझे।
- सत्यवान कुंडू, राज्य प्रधान, हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ
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41331 सीटें आवंटित, 24 हजार बच्चों को ही दाखिला
विभाग को पहले चरण के ड्रॉ के तहत बच्चों को दाखिला दिलाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दूसरी से आठवीं कक्षा तक 22 जिलों के निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के लिए 41331 सीटें आवंटित की गईं। जिनमें से लगभग 24 हजार से अधिक बच्चों को दाखिला मिला। 6371 बच्चों की दावेदारी खारिज कर दी गई। दूसरे चरण का ड्रॉ भी निकाला गया है, जिसके तहत कुछ ही दाखिल हुए।
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वंचित बच्चों को सरकारी स्कूल भी दाखिला देने में कर रहे आनाकानी
मौलिक शिक्षा विभाग ने पत्र जारी कर कहा है कि नियम-134ए के तहत 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए प्रथम चरण के तहत 10710 बच्चों के दाखिला बाकी हैं। इनकी सीटें सुरक्षित रखी गई हैं। इन सीटों पर दूसरे चरण के बच्चों का दाखिल नहीं किया जाएगा। इनमें अधिकतर बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले स्कूल से एसएलसी (स्कूल लिविंग सर्टीफिकेट) ले लिया था, लेकिन निजी स्कूलों में दाखिला न होने के कारण घर बैठे हैं। इन बच्चों को सरकारी स्कूल भी दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने साफ निर्देश दिए हैं कि इन्हें सरकारी स्कूल हर हाल में दाखिला दें। इसके अलावा जिन बच्चों ने निजी स्कूलों से एसएलसी ले लिया है, अगर वे दोबारा वहीं दाखिल होना चाहते हैं तो उन्हें पुरानी फीस पर ही दाखिला दिलवाएं। नए सिरे से पूरी फीस मांगने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करें। सभी डीईईओ अपने-अपने जिले में दाखिला से वंचित बच्चों की मदद कर उन्हें सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाएं।
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मांगन मानी तो सड़कों पर उतरेंगे
सरकार निजी स्कूलों को गरीब बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के एक हजार रुपये से अधिक जल्द जारी करे। ये राशि न मिलने से विवाद और बढ़ेगा। अभी तो स्कूल दाखिला देने से इनकार कर रहे हैं, भविष्य में सड़कों पर भी उतरेंगे।
- कुलभूषण शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, निसा
स्कूल संचालकों की पीड़ा समझे सरकार
सरकार नौवीं से बारहवीं के बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति की राशि भी तय करे। दूसरी से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने का बकाया पैसा जारी किया जाए। निजी स्कूलों पर दबाव बनाने के बजाय सरकार उनकी पीड़ा भी समझे।
- सत्यवान कुंडू, राज्य प्रधान, हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ