जीएमएसएच-16 में 100 लोगों को लगा टीका, पढ़ें- टीकाकरण के बाद क्या बोले कोरोना योद्धा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएमएसएच-16 में सबसे पहला टीका सफाई कर्मचारी अरुण को लगाया गया। सबसे पहले अस्पताल के गेट पर सिक्योरिटी ऑफिसर ने अरुण के मोबाइल पर मैसेज चेक किया। उसके बाद उन्हें टीकाकरण केंद्र में भेज दिया गया।
टीकाकरण के बाद डॉक्टरों व कर्मचारियों ने ताली बजाकर अरुण का स्वागत किया। उसके बाद उन्हें निगरानी कक्ष में भेज दिया गया। यहां करीब 30 मिनट रुकने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। इससे पहले उनको प्रमाणपत्र और फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित भी किया गया।
अस्पताल में शनिवार को प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई। अस्पताल में शाम 4 बजे तक 100 लोगों का टीकाकरण हो चुका था। स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर अमनदीप कौर कंग समेत सभी चिकित्सा अधिकारी सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक यहां तैनात रहे और हर लाभार्थी से बातचीत की।
खुशनसीब हूं, मुझे पहली डोज लगी
मैं खुद को खुशनसीब मान रहा हूं कि कोरोना के टीके की पहली डोज मुझे दी गई। टीका लगने के बाद किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई। शुरुआती दौर में थोड़ा डर जरूर लगा था लेकिन अधिकारियों के सहयोग से वह भी दूर हो गया। मैं पूरी तरह फिट हूं। - अरुण, सफाई कर्मचारी, जीएमएसएच-16।
टीकाकरण को सफल बनाएं
सरकार के निर्देशानुसार पहला टीका मैं नहीं लगवा सकती थी इसलिए मैंने दूसरे नंबर पर अपना टीकाकरण करवाया। टीका लगवाते समय मुझे हल्का सा दर्द जरूर हुआ लेकिन किसी प्रकार का कोई डर महसूस नहीं हुआ। मेरा यही कहना है कि नकारात्मक संदेशों पर ध्यान देने के बजाय टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सयोग दें। - डॉ. अमनदीप कौर कंग, स्वास्थ्य निदेशक, चंडीगढ़
अफवाहों से दूर रहें, टीका जरूर लगवाएं
मुझे न तो कोई दर्द महसूस हुआ और न ही टीका लगने के बाद किसी तरह की कोई परेशानी हुई। कोरोना से बचाव के लिए मेरी ही तरह सभी को टीकाकरण के लिए आगे आना चाहिए तभी देश कोरोना महामारी से मुक्त हो पाएगा। मेरी सबसे अपील है कि अफवाहों से दूर रहें और टीका जरूर लगवाएं। -डॉ. सिकंदर सिंह, मेडिकल ऑफिसर, जीएमएसएच-16।
टीका लगने के बाद फिट हूं
कोरोना के टीकाकरण को लेकर मैं पहले से ही आश्वस्त थी इसलिए मैंने पहले 100 स्वास्थ्यकर्मियों में अपना नाम दे दिया था। टीका लगने के बाद मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मेरी ही तरह देश के सभी युवाओं को टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आना होगा, तभी हम सभी इस महामारी से सुरक्षित रह पाएंगे। - डॉ. मनिष्ठा, फिजियोथेरेपिस्ट, जीएमएसएच-16।
पहले नर्वस थी
जब तक टीका नहीं लगा था, तब तक मैं थोड़ा नर्वस थी लेकिन टीका लगने के बाद सारा डर दूर हो गया। टीकाकरण के बाद रेस्ट रूम में एक के बाद एक सहयोगियों को देख मुझे टीके का पता ही नहीं लगा। हम सभी वहां आधे घंटे तक बैठकर हंसी मजाक करते रहे और सारा तनाव गायब हो गया। - अंजुला पॉल, नर्सिंग आफिसर, जीएमएसएच-16।