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ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धरने में पहुंचीं महिलाएं
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पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिछले 47 दिन से चल रहा किसान आंदोलन सोमवार को महिलाओं को समर्पित रहा। किसान महिला दिवस के अवसर पर धरने की अध्यक्षता से लेकर संचालन व संबोधन तक सब कुछ महिलाओं द्वारा किया गया। गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में महिलाएं जत्थों के रूप में नारेबाजी करते हुए पहुंची। वहीं सीटू के नेतृत्व में सैकड़ों आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्स जुलूस के रूप में समर्थन देने पहुंचीं।
सोमवार को धरने की अध्यक्षता चौहान पाल के गांव औरंगाबाद निवासी हेमवती चौहान व संचालन सरोज देवी ने किया। सुबह से ही महिलाएं ट्रॉलियों में बैठकर नारेबाजी करते हुई धरना स्थल पर पहुंचने लगीं। कई जगहों की महिलाएं नाचते-गाते पहुंचीं। वे अपने साथ ढोलक और मंजीरे भी लेकर आईं। उन्होंने धरना स्थल पर भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान गांव बंचारी, चिरवाड़ी, मीतरौल, औरंगाबाद, गोढौता, बढ़ा, अल्लीका, अटोहां, किठवाड़ी, मोहना आदि की महिलाएं पहुंची।
शशिबाला तेवतिया ने कहा कि खेती में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है। महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेत में फसल उगाती हैं। आज जब किसान पर विपदा आई है तो महिलाएं भला कैसे पीछे हट सकती हैं।
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फरीदाबाद से आई जगजीत कौर पन्नू ने कहा कि पिछले डेढ़ महीने से लाखों किसान कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। उनका एक ही संकल्प है कि या तो कृषि के तीनों काले कानून रद्द होंगे या फिर आंदोलन लड़ते-लड़ते वे शहीद हो जाएंगे। इस मौके पर खुशबू कंवर, सरोज सिंह, किरण सिंह, सविता चौधरी कुंडू, रतन देवी चौहान, बरखा, कविता, गीता, महेंद्री सौरोत आदि मौजूद रहे।
महेशपुर के किसानों ने की भूख हड़ताल
सोमवार को गांव महेशपुर के 11 किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल जारी रखी। हड़ताल करने वालों किसानों में मूलचंद, ईश्वर सिंह, बच्चू सिंह, नेतराम, बिजेंद्र सिंह, ब्रह्मजीत, सचिन, बीर सिंह, चंदरपाल, जगदीश चंद व दीपचंद शामिल थे।
मोहना से आई महिलाओं ने दिए एक लाख रुपये
महिला किसान दिवस के अवसर पर गांव मोहना से महिलाएं धरना स्थल पर पहुंची। उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर उन्होंने किसान आंदोलन के लिए एक लाख रुपये की मदद की। इसके अलावा ग्रामीणों के तरफ से एक ट्रॉली खाद्य सामग्री भी भेंट की गई।
जुलूस निकाल पहुंचीं आशा व आंगनबाड़ी वर्कर
महिला किसान दिवस में आशा व आंगनबाड़ी वर्करों ने भी अपनी भागेदारी दर्ज की। वे जुलूस निकालते हुए धरना स्थल पर पहुंची। नेताओं ने बताया कि कृषि व्यवस्था को बचाने व न्यूनतम समर्थन मूल्य हासिल करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, राशन वितरण प्रणाली, पशुपालन व रोजगार को बचाने की किसान व मजदूर लड़ रहा है। धरने को सविता चौहान, उर्मिला रावत व गीता देवी ने संबोधित किया।
भजनों के माध्यम से किया मनोरंजन
महिला किसान दिवस पर महिलाओं की टोलियों ने भजन प्रस्तुत किए। विशेष तौर पर बंचारी, मीतरौल, औरंगाबाद व मोहना से आई हुई महिलाएं ढोलक मजीरों के साथ धरना स्थल पर पहुंची। आंदोलन के साथ-साथ प्रभु भक्ति के भजन प्रस्तुत किए गए।
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सोमवार को धरने की अध्यक्षता चौहान पाल के गांव औरंगाबाद निवासी हेमवती चौहान व संचालन सरोज देवी ने किया। सुबह से ही महिलाएं ट्रॉलियों में बैठकर नारेबाजी करते हुई धरना स्थल पर पहुंचने लगीं। कई जगहों की महिलाएं नाचते-गाते पहुंचीं। वे अपने साथ ढोलक और मंजीरे भी लेकर आईं। उन्होंने धरना स्थल पर भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान गांव बंचारी, चिरवाड़ी, मीतरौल, औरंगाबाद, गोढौता, बढ़ा, अल्लीका, अटोहां, किठवाड़ी, मोहना आदि की महिलाएं पहुंची।
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शशिबाला तेवतिया ने कहा कि खेती में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है। महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेत में फसल उगाती हैं। आज जब किसान पर विपदा आई है तो महिलाएं भला कैसे पीछे हट सकती हैं।
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फरीदाबाद से आई जगजीत कौर पन्नू ने कहा कि पिछले डेढ़ महीने से लाखों किसान कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। उनका एक ही संकल्प है कि या तो कृषि के तीनों काले कानून रद्द होंगे या फिर आंदोलन लड़ते-लड़ते वे शहीद हो जाएंगे। इस मौके पर खुशबू कंवर, सरोज सिंह, किरण सिंह, सविता चौधरी कुंडू, रतन देवी चौहान, बरखा, कविता, गीता, महेंद्री सौरोत आदि मौजूद रहे।
महेशपुर के किसानों ने की भूख हड़ताल
सोमवार को गांव महेशपुर के 11 किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल जारी रखी। हड़ताल करने वालों किसानों में मूलचंद, ईश्वर सिंह, बच्चू सिंह, नेतराम, बिजेंद्र सिंह, ब्रह्मजीत, सचिन, बीर सिंह, चंदरपाल, जगदीश चंद व दीपचंद शामिल थे।
मोहना से आई महिलाओं ने दिए एक लाख रुपये
महिला किसान दिवस के अवसर पर गांव मोहना से महिलाएं धरना स्थल पर पहुंची। उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर उन्होंने किसान आंदोलन के लिए एक लाख रुपये की मदद की। इसके अलावा ग्रामीणों के तरफ से एक ट्रॉली खाद्य सामग्री भी भेंट की गई।
जुलूस निकाल पहुंचीं आशा व आंगनबाड़ी वर्कर
महिला किसान दिवस में आशा व आंगनबाड़ी वर्करों ने भी अपनी भागेदारी दर्ज की। वे जुलूस निकालते हुए धरना स्थल पर पहुंची। नेताओं ने बताया कि कृषि व्यवस्था को बचाने व न्यूनतम समर्थन मूल्य हासिल करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, राशन वितरण प्रणाली, पशुपालन व रोजगार को बचाने की किसान व मजदूर लड़ रहा है। धरने को सविता चौहान, उर्मिला रावत व गीता देवी ने संबोधित किया।
भजनों के माध्यम से किया मनोरंजन
महिला किसान दिवस पर महिलाओं की टोलियों ने भजन प्रस्तुत किए। विशेष तौर पर बंचारी, मीतरौल, औरंगाबाद व मोहना से आई हुई महिलाएं ढोलक मजीरों के साथ धरना स्थल पर पहुंची। आंदोलन के साथ-साथ प्रभु भक्ति के भजन प्रस्तुत किए गए।