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चौहान पाल से आई महिलाओं ने भजनों व नृत्य से बांधा समा
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पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में अटोहां चौक पर चल रहा धरना पहले की तरह तेज होने लगा है। धरने में प्रतिदिन अलग-अलग पालों द्वारा कमान संभाली जा रही है। पालों से लोग ट्रैक्टरों में भर-भरकर धरने पर पहुंचते हैं और कृषि कानूनों के विरोध के साथ किसानों का मनोरंजन करते हैं। शुक्रवार को धरने की कमान संभाल रहीं चौहान पाल से आई महिलाओं की भजन मंडली ने विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उन्होंने सावन व ब्रज के गीतों पर जमकर नृत्य किया, जिसे देखे बिना राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले लोग भी नहीं रह सके।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता छिद्दी सरपंच घोड़ी ने की, जबकि संचालन मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने किया। धरने में शुक्रवार को मीतरौल चौहान ने समर्थन दिया। पाल की तरफ महिलाए नाचती-गाती हुई पहुंची। चौहान पाल के गांव अटोहां से आई भजन मंडली ने सावन व ब्रज के गीतों पर जमकर नृत्य किया। इस दौरान उन्होंने अपने गीतों के जरिये सरकार व कृषि कानूनों पर जमकर कटाक्ष किया। महिला भजन मंडली अपने साथ ढोलक, मजीरा व बाजा लेकर आई, जिनसे उन्होंने भजन गाए। महिलाओं ने नीम की निंबोली सावन जल्दी अइयो रे, पड़ गए झूला अमुआ की डाल पर सहित अन्य भजन गाए। महिलाओं के अलावा धरने में हरी मेंबर घोड़ी, रणजीत महाशय, बीर सिंह चौहान व भजन पार्टी लालवा ने भजन प्रस्तुत किए।
मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि ब्रज क्षेत्र में सावन के महीने का विशेष महत्व है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर महिलाएं नृत्य करती हैं। पूरे ब्रज क्षेत्र में यह परंपरा सावन के महीने में जारी रहती है। महिलाओं ने धरने में भजनों को विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत कर धरने को यादगार बनाने का काम किया है। किसान ऐसे कार्यक्रम प्रस्तुत कर सरकार को बताना चाहता है कि किसान का जीवन संघर्षपूर्ण है। विपरीत परिस्थितियों में किसान हंसते-गाते हुए हर संकट से उभरने का काम करता है। सरकार कृषि कानूनों पर जितना लंबा समय खींच रही है, किसानों के हौसले उतने ही बुलंद होते जा रहे हैं।
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धरने को रणजीत सिंह थानेदार, श्रीचंद महाशय, बीर सिंह दलाल, चेतराम मैंबर, सोहनपाल चौहान, बिजेंद्र लालवा, कर्ण सिंह मितरौल, रूपचंद दलाल, धर्म सिंह प्रधान, नरेंद्र सहरावत, रूपराम तेवतिया व ताराचंद प्रधान ने संबोधित किया।
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किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता छिद्दी सरपंच घोड़ी ने की, जबकि संचालन मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने किया। धरने में शुक्रवार को मीतरौल चौहान ने समर्थन दिया। पाल की तरफ महिलाए नाचती-गाती हुई पहुंची। चौहान पाल के गांव अटोहां से आई भजन मंडली ने सावन व ब्रज के गीतों पर जमकर नृत्य किया। इस दौरान उन्होंने अपने गीतों के जरिये सरकार व कृषि कानूनों पर जमकर कटाक्ष किया। महिला भजन मंडली अपने साथ ढोलक, मजीरा व बाजा लेकर आई, जिनसे उन्होंने भजन गाए। महिलाओं ने नीम की निंबोली सावन जल्दी अइयो रे, पड़ गए झूला अमुआ की डाल पर सहित अन्य भजन गाए। महिलाओं के अलावा धरने में हरी मेंबर घोड़ी, रणजीत महाशय, बीर सिंह चौहान व भजन पार्टी लालवा ने भजन प्रस्तुत किए।
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मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि ब्रज क्षेत्र में सावन के महीने का विशेष महत्व है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर महिलाएं नृत्य करती हैं। पूरे ब्रज क्षेत्र में यह परंपरा सावन के महीने में जारी रहती है। महिलाओं ने धरने में भजनों को विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत कर धरने को यादगार बनाने का काम किया है। किसान ऐसे कार्यक्रम प्रस्तुत कर सरकार को बताना चाहता है कि किसान का जीवन संघर्षपूर्ण है। विपरीत परिस्थितियों में किसान हंसते-गाते हुए हर संकट से उभरने का काम करता है। सरकार कृषि कानूनों पर जितना लंबा समय खींच रही है, किसानों के हौसले उतने ही बुलंद होते जा रहे हैं।
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धरने को रणजीत सिंह थानेदार, श्रीचंद महाशय, बीर सिंह दलाल, चेतराम मैंबर, सोहनपाल चौहान, बिजेंद्र लालवा, कर्ण सिंह मितरौल, रूपचंद दलाल, धर्म सिंह प्रधान, नरेंद्र सहरावत, रूपराम तेवतिया व ताराचंद प्रधान ने संबोधित किया।