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Palwal News: जापानी कंपनी से धोखाधड़ी मामले में महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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कंपनी के पूर्व कर्मचारियों ने परिचितों ने फर्जी वेंडरों के खाते लगाकर दिया था वारदात को अंजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जापानी कंपनी कावासाकी रोबोटिक्स इंडिया से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में जिला अदालत ने आरोपी महिला वैशाली की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश जिला सत्र एवं न्यायाधीश नरेंद्र सुरा की अदालत ने दिया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) हिरोशी मियाके की शिकायत पर सेक्टर-37 थाना पुलिस ने मई 2025 में प्राथमिकी दर्ज की थी। मियाके ने बताया था कि कंपनी के पूर्व वरिष्ठ कर्मचारियों ने साजिश कर कंपनी के बैंक खातों से दूसरे खातों में रकम ट्रांसफर की। फर्जी बिल के साथ फर्जी वेंडर भी बनाए गए।
मामले में पूर्व बिजनेस हेड एवं कंपनी सचिव अर्जुन मलिक, पूर्व वित्त प्रबंधक लोविश बहरी और अन्य कर्मचारियों पर आरोप लगाया गया। वैशाली के खाते में भी कंपनी के खाते से 35.88 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह रकम उनके भाई लोविश बहरी ने भेजी थी और दोनों पक्षों में समझौता भी हो गया है। करीब 5.5 करोड़ रुपये कंपनी को वापस कर दिए गए है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि केवल समझौते और भुगतान से गंभीर आर्थिक अपराध समाप्त नहीं होता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जापानी कंपनी कावासाकी रोबोटिक्स इंडिया से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में जिला अदालत ने आरोपी महिला वैशाली की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश जिला सत्र एवं न्यायाधीश नरेंद्र सुरा की अदालत ने दिया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) हिरोशी मियाके की शिकायत पर सेक्टर-37 थाना पुलिस ने मई 2025 में प्राथमिकी दर्ज की थी। मियाके ने बताया था कि कंपनी के पूर्व वरिष्ठ कर्मचारियों ने साजिश कर कंपनी के बैंक खातों से दूसरे खातों में रकम ट्रांसफर की। फर्जी बिल के साथ फर्जी वेंडर भी बनाए गए।
मामले में पूर्व बिजनेस हेड एवं कंपनी सचिव अर्जुन मलिक, पूर्व वित्त प्रबंधक लोविश बहरी और अन्य कर्मचारियों पर आरोप लगाया गया। वैशाली के खाते में भी कंपनी के खाते से 35.88 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह रकम उनके भाई लोविश बहरी ने भेजी थी और दोनों पक्षों में समझौता भी हो गया है। करीब 5.5 करोड़ रुपये कंपनी को वापस कर दिए गए है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि केवल समझौते और भुगतान से गंभीर आर्थिक अपराध समाप्त नहीं होता।
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