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मंडियों में कम आ रहा गेहूं, खाली बैठे हैं मजदूर
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पलवल। उत्तर प्रदेश से गेहूं की आवक न आने से जहां आढ़तियों को इस बार लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गेहूं खरीद सीजन के चलते बिहार, मध्य प्रदेश से आए मजदूर भी खाली बैठे हैं। मजदूरों को अब रोजी रोटी की चिंता सताने लगी है। लगातार कम हो रही गेहूं की आवक को देख मजदूरों ने यहां से पंजाब व उत्तर प्रदेश की मंडियों में मजदूरी करने जाने का मन बना लिया है। मजदूरों का कहना है कि यदि यहां मंडियों में गेहूं की आवक ऐसी ही रही तो उनका अपना व परिवार का पेट पालना मुश्किल हो जाएगा। गर्मी के इस मौसम में किसी-किसी दिन तो मजदूर पूरे दिन गेहूं से भरी बोरियों पर ही आराम कर वापिस घरों को लौट जाते हैं।
इस बार 14 अप्रैल तक जिले की मंडियों में 1 लाख, 26 हजार, 677 मीट्रिक टन यानी कि 2 लाख, 4 हजार, 567 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है। गत वर्ष 14 अप्रैल तक 3 लाख, 95 हजार, 424 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई थी। पिछले साल की तुलना में इस बार एक लाख, 90 हजार क्विंटल के करीब गेहूं की कम आवक हुई है। ऐसा उत्तर प्रदेश में ही हरियाणा से अधिक गेहूं का समर्थन मूल्य होने के चलते गेहूं की आवक न होने के कारण हुआ है। जबकि सरकार द्वारा प्राइवेट को बढ़ावा देने के बाद भी मात्र 14 हजार क्विंटल ही गेहूं की खरीद की गई है। पलवल मंडी में 20 हजार, 272 मीट्रिक टन, होडल मेंडी में 30 हजार 515 मीट्रिक टन, हथीन मंडी में 14 हजार 608 मीट्रिक टन, हसनपुर मंडी में 21 हजार 656 मीट्रिक टन, खाम्बी खरीद केंद्र में 12 हजार 775 मीट्रिक टन, मंडकोला में 813 मीट्रिक टन, दीघोट में 2 हजार 586 मीट्रिक टन, धतीर में 6 हजार 628 मीट्रिक टन, बडौली में 9 हजार 473 मीट्रिक टन, बामनीखेडा में 1 हजार 790 मीट्रिक टन, औरंगाबाद में 3 हजार 936 मीट्रिक टन गेंहू की खरीद की गई।
मैं पिछले 15 सालों से यहां मजदूरों को लेकर गेहूं खरीद के समय मजदूरी के लिए आता हूं। ऐसा पहली बार हुआ है कि मंडियों में काम नहीं है। मेरे साथ 22 मजदूर यहां मजदूरी करने आए हुए हैं।
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- फौजी, ठेकेदार, नेपाल
मै अनाज मंडी में गेहूं तोलने का काम करता हूं। इस बार मजदूरी कम हो गई है, कारण इस बार केवल पलवल के किसान ही गेहूं ला रहे हैं। उत्तर प्रदेश के किसानों का गेहूं नहीं आ रहा है।
- राजेंद्र, मजदूर
मुझे 15 दिन यहां हो गए हैं, लेकिन यहां इस बार मजदूरी नहीं मिल रही है। यहां गेहूं काफी कम आ रहा है। इसलिए मैं अपने साथियों के साथ पंजाब जाने का मन बना रहा हूं। वहां साथी मजदूरों से बात हुई है।
- मंजीत मजदूर बिहार
इस बार तो भूखे मरने की नौबत आ गई है। यहां खर्च करके आए रुपये भी अभी तक नहीं निकले हैं। साथियों से बात कर एक-दो दिन में पलवल मंडी से निकलकर पंजाब, उत्तर प्रदेश की मंडियों में मजदूरी देखूूंगा।
- इंद्रजीत कुमार, मजदूर
पलवल की अनाज मंडियों में जितना गेहूं किसानों का आ रहा है, वह सारा खरीदा जा रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य भी पूरा मिल रहा है। सरकार के आदेश पर किसानों का एक-एक दाना गेहूं खरीदा जा रहा है। आगे भी जो गेहूं मंडियों में आएगा, उसे खरीदा जाएगा।
- नरवीर गहलौत, सचिव मार्केट कमेटी पलवल
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इस बार 14 अप्रैल तक जिले की मंडियों में 1 लाख, 26 हजार, 677 मीट्रिक टन यानी कि 2 लाख, 4 हजार, 567 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है। गत वर्ष 14 अप्रैल तक 3 लाख, 95 हजार, 424 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई थी। पिछले साल की तुलना में इस बार एक लाख, 90 हजार क्विंटल के करीब गेहूं की कम आवक हुई है। ऐसा उत्तर प्रदेश में ही हरियाणा से अधिक गेहूं का समर्थन मूल्य होने के चलते गेहूं की आवक न होने के कारण हुआ है। जबकि सरकार द्वारा प्राइवेट को बढ़ावा देने के बाद भी मात्र 14 हजार क्विंटल ही गेहूं की खरीद की गई है। पलवल मंडी में 20 हजार, 272 मीट्रिक टन, होडल मेंडी में 30 हजार 515 मीट्रिक टन, हथीन मंडी में 14 हजार 608 मीट्रिक टन, हसनपुर मंडी में 21 हजार 656 मीट्रिक टन, खाम्बी खरीद केंद्र में 12 हजार 775 मीट्रिक टन, मंडकोला में 813 मीट्रिक टन, दीघोट में 2 हजार 586 मीट्रिक टन, धतीर में 6 हजार 628 मीट्रिक टन, बडौली में 9 हजार 473 मीट्रिक टन, बामनीखेडा में 1 हजार 790 मीट्रिक टन, औरंगाबाद में 3 हजार 936 मीट्रिक टन गेंहू की खरीद की गई।
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मैं पिछले 15 सालों से यहां मजदूरों को लेकर गेहूं खरीद के समय मजदूरी के लिए आता हूं। ऐसा पहली बार हुआ है कि मंडियों में काम नहीं है। मेरे साथ 22 मजदूर यहां मजदूरी करने आए हुए हैं।
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- फौजी, ठेकेदार, नेपाल
मै अनाज मंडी में गेहूं तोलने का काम करता हूं। इस बार मजदूरी कम हो गई है, कारण इस बार केवल पलवल के किसान ही गेहूं ला रहे हैं। उत्तर प्रदेश के किसानों का गेहूं नहीं आ रहा है।
- राजेंद्र, मजदूर
मुझे 15 दिन यहां हो गए हैं, लेकिन यहां इस बार मजदूरी नहीं मिल रही है। यहां गेहूं काफी कम आ रहा है। इसलिए मैं अपने साथियों के साथ पंजाब जाने का मन बना रहा हूं। वहां साथी मजदूरों से बात हुई है।
- मंजीत मजदूर बिहार
इस बार तो भूखे मरने की नौबत आ गई है। यहां खर्च करके आए रुपये भी अभी तक नहीं निकले हैं। साथियों से बात कर एक-दो दिन में पलवल मंडी से निकलकर पंजाब, उत्तर प्रदेश की मंडियों में मजदूरी देखूूंगा।
- इंद्रजीत कुमार, मजदूर
पलवल की अनाज मंडियों में जितना गेहूं किसानों का आ रहा है, वह सारा खरीदा जा रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य भी पूरा मिल रहा है। सरकार के आदेश पर किसानों का एक-एक दाना गेहूं खरीदा जा रहा है। आगे भी जो गेहूं मंडियों में आएगा, उसे खरीदा जाएगा।
- नरवीर गहलौत, सचिव मार्केट कमेटी पलवल