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Palwal News: हर्षोल्लास के साथ मनाया देवोत्थानी एकादशी का पर्व
Thu, 23 Nov 2023 11:35 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
Updated Thu, 23 Nov 2023 11:35 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। उपमंडल में बृहस्पतिवार को देव उत्थानी एकादशी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के आयोजन को लेकर गांव शेषसाई स्थित भगवान लक्ष्मीनारायण के मंदिर में दर्शनों के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर प्रांगण को फूल मालाओं से भव्य तरीके से सजाया गया। मंदिर में आसपास के गावों के अलावा अन्य राज्यों के हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शनों के लिए पहुंचे।
देव उत्थानी एकादशी के पर्व पर मंदिर प्रांगण में प्रात: समय होने वाली मंगला आरती में हिस्सा लेने के लिए श्रद्धालुओं का प्रात: चार बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। श्रद्धालु यहां मंदिर के सामने बने क्षीर सागर में हाथ, मुंह धोकर व स्नान कर भगवान के दर्शन कर पूजा अर्चना करते हैं और मंदिर की परिक्रमा करते हैं। उन्होंने बताया कि शेषशाई मंदिर में आज के दिन विशेष पूजा अर्चना होती है।
देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन की गई पूजा का होता है खास महत्व
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कार्तिक स्नान करके तुलसी तथा शालिग्राम का विवाह करने का नियम है। जिसके चलते श्रद्धालुओं द्वारा तुलसी और शालिग्राम का विवाह का आयोजन भी किया गया, जिसमें महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आचार्य कुलभूषण शास्त्री ने बताया कि देव प्रबोधिनी एकादशी का दिन भगवान विष्णु के घर पधारने का दिन होता है। चार महीनों के लंबे आराम के बाद इस दिन भगवान विष्णु जागते हैं।
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होडल। उपमंडल में बृहस्पतिवार को देव उत्थानी एकादशी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के आयोजन को लेकर गांव शेषसाई स्थित भगवान लक्ष्मीनारायण के मंदिर में दर्शनों के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर प्रांगण को फूल मालाओं से भव्य तरीके से सजाया गया। मंदिर में आसपास के गावों के अलावा अन्य राज्यों के हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शनों के लिए पहुंचे।
देव उत्थानी एकादशी के पर्व पर मंदिर प्रांगण में प्रात: समय होने वाली मंगला आरती में हिस्सा लेने के लिए श्रद्धालुओं का प्रात: चार बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। श्रद्धालु यहां मंदिर के सामने बने क्षीर सागर में हाथ, मुंह धोकर व स्नान कर भगवान के दर्शन कर पूजा अर्चना करते हैं और मंदिर की परिक्रमा करते हैं। उन्होंने बताया कि शेषशाई मंदिर में आज के दिन विशेष पूजा अर्चना होती है।
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देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन की गई पूजा का होता है खास महत्व
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कार्तिक स्नान करके तुलसी तथा शालिग्राम का विवाह करने का नियम है। जिसके चलते श्रद्धालुओं द्वारा तुलसी और शालिग्राम का विवाह का आयोजन भी किया गया, जिसमें महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आचार्य कुलभूषण शास्त्री ने बताया कि देव प्रबोधिनी एकादशी का दिन भगवान विष्णु के घर पधारने का दिन होता है। चार महीनों के लंबे आराम के बाद इस दिन भगवान विष्णु जागते हैं।
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