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Palwal News: धुंध के दौरान जानलेवा साबित हो सकता है केएमपी एक्सप्रेसवे का सफर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 11:01 PM IST
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Traveling on KMP Expressway during fog can prove fatal
- गड्ढों में तब्दील हुआ एक्सप्रेसवे, सफेद पट्टी व रिफ्लेक्टर नहीं आते नजर
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- जगह-जगह बने अवैध कट व सड़क किनारे खड़े वाहन बन सकते हैं हादसों का कारण
- प्रतिदिन करोड़ों का वसूला जाता है टोल, फिर भी सुविधाएं नदारद

प्रवीण बैंसला

पलवल। कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर सफर करना इन दिनों खतरनाक है। धुंध के दौरान केएमपी पर सफर करना जानलेवा साबित हो सकता है। केएमपी पर टूटी सड़क, अवैध कट व सड़क किनारे खड़े वाहन हादसों का डर बना रहता है। लापरवाही का आलम यह है कि सड़क से कई स्थानों पर सफेद पट्टी गायब हैं और रिफ्लेक्टर भी कहीं नजर नहीं आते हैं। एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा को छोड़कर हर जगह अंधेरा छाया रहता है। ऐसे में धुंध के दौरान वाहन चालक को एक्सप्रेसवे चलना मुश्किल हो रहा है। इस लापरवाही के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, परंतु टोल कंपनी इस पर कोई संज्ञान नहीं ले रही है। जिला उपायुक्त कई बार बैठक कर टूटी सड़कों के निर्माण, अवैध कट को बंद करने व अवैध ढाबों को हटाने के निर्देश दे चुके हैं, परंतु अधिकारियों को उपायुक्त के निर्देशों की कोई परवाह नहीं है।
दरअसल, साल 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने केएमपी एक्सप्रेसवे का शुभारंभ हुआ। साल 2006 में कांग्रेस सरकार ने फोर लेन एक्सप्रेस का शुभारंभ किया। उसके बाद कार्य अधर में लटक गया। भाजपा सरकार बनने पर साल 2015 में दोबारा पलवल से कुंडली तक 135 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन सड़क का शिलान्यास किया गया। पलवल से लेकर मानेसर तक साल 2016 में केएमपी को शुरू कर दिया गया। उसके बाद मानेसर से लेकर कुंडली तक साल 2018 में एक्सप्रेसवे शुरू किया गया। एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यहां वाहनों का दबाव रहा। हालांकि, केजीपी एक्सप्रेसवे के शुरू होने पर यहां कुछ राहत मिली, परंतु दिल्ली-वड़ौदरा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही वाहनों का दबाव फिर से बढ़ गया।
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बदतर हो गई है केएमपी एक्सप्रेसवे की हालत
पलवल की सीमा में करीब 16 किलोमीटर केएमपी एक्सप्रेसवे पड़ता है। इसमें ज्यादातर हिस्से में गड्ढे हो गए हैं। सड़क ही हालत ग्रामीण सड़क से भी खराब है। यहां कहीं पर लाइट नहीं जलती। पूरी सड़क पर अंधेरा छाया रहता है। करीब चार स्थानों पर अवैध कट बने हुए हैं और दर्जनों की संख्या में अवैध ढाबे हैं, जिन पर भारी वाहन रुकते हैं। इसके अलावा आधे से ज्यादा हिस्से में सफेद पट्टी गायब है। टोल प्लाजा को छोड़ दें तो सड़क पर कहीं भी रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं। इससे धुंध के दौरान केएमपी पर सफर करना बेहद खतरनाक हो गया है।
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सड़क किनारे खड़े रहते हैं बड़े ट्रक
केएमपी पर सबसे ज्यादा दबाव भारी वाहनों का है। अधिकांश समय बड़े ट्रक जगह-जगह सड़क किनारे खड़े देखे जा सकते हैं। ज्यादातर तो ये वाहन उन स्थानों पर खड़े नजर आते हैं, जहां साथ लगती जमीनों पर लोगों ने ढाबे बना रखे हैं। वाहन चालक वाहनों को सड़क पर खड़ा कर नीचे उतरकर चाय व खाना खाने चले जाते हैं। इसके अलावा केएमपी पर सबसे ज्यादा खतरनाक घूमने वाले मवेशी साबित हो रहे हैं। मवेशियों का झुंड अक्सर केएमपी पर घूमता रहता है। अचानक वाहनों के सामने आने पर ये हादसों का कारण बनते हैं।
करोड़ो रुपये कलेक्शन के बावजूद नहीं मिल रही सुविधाएं
केएमपी एक्सप्रेस पर लगे टोल प्लाजा पर प्रतिदिन एक करोड़ रुपये शुल्क वसूला जाता है। उसके बावजूद केएमपी पर सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। केएमपी पर न तो इमरजेंसी सेवाएं नजर आती हैं और नहीं सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं। हादसा होने पर आधा घंटे तक भी पीड़ित को सहायता नहीं मिल पाती। टोल पर अव्यवस्थाओं के कारण जाम लगा रहता है, जिससे वाहन चालक परेशान रहते हैं।

केएमपी के साथ जिले की सभी जर्जर सड़कों के निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा अवैध कट को बंद कर अवैध होटल व ढाबों को हटाने के लिए भी कहा गया है। धुंध के दौरान सुरक्षा के इंतजामों को पूरा कराया जाएगा। निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, जिला उपायुक्त
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