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Palwal News: तीन साल में भी पूरी नहीं हुई ट्रांजिट फ्लैट योजना
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नूंह सचिवालय परिसर में अधूरे पड़े ट्रांजिट फ्लैट।
तैयार ढांचा भी हो रहा जर्जर, अधिकारी-कर्मचारी अब भी किराये के मकानों में
32 सरकारी आवास अधर में
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ट्रांजिट फ्लैट आवासीय योजना तीन साल बाद भी अधूरी पड़ी है। योजना के तहत बनाए जा रहे करीब 32 फ्लैटों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य लंबे समय से बंद होने के कारण तैयार हो चुका ढांचा भी खराब होने लगा है। ऐसे में सरकारी आवास उपलब्ध कराने की योजना खुद सरकारी उपेक्षा की शिकार होती दिखाई दे रही है।
योजना के तहत करीब 32 फ्लैट तैयार किए जाने थे, ताकि तबादले के बाद नूंह आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल सरकारी आवास उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए करीब 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। योजना के अनुसार पहले इन फ्लैटों का निर्माण पुरानी तहसील के समीप किया जाना था, लेकिन जमीन संबंधी विवाद के चलते स्थान बदलना पड़ा। बाद में योजना को नए सचिवालय के समीप ऑफिसर्स कॉलोनी के पास स्थानांतरित किया गया।
स्थान बदलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और तीन वर्ष पहले फ्लैटों का स्ट्रक्चर तैयार कर दिया गया, लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब बिजली, पानी, रंग-रोगन समेत कई जरूरी कार्य अधूरे हैं। लंबे समय से निर्माण बंद रहने के कारण भवन की स्थिति भी खराब होने लगी है।
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बजट नहीं मिला तो रुका काम
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना के शेष कार्यों को पूरा कराने के लिए बजट की आवश्यकता है। विभाग की ओर से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की डिमांड की गई है। बजट उपलब्ध होने के बाद शेष निर्माण कार्य पूरा कराया जा सकेगा। निर्माण पूरा नहीं होने का सीधा असर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जिन्हें नूंह में तैनाती के दौरान सरकारी आवास नहीं मिल पाता। उन्हें या तो किराये के मकानों में रहना पड़ता है या दूसरे शहरों से रोजाना आवागमन करना पड़ता है।
सरकारी आवास की जरूरत, लेकिन तैयार इमारत बेकार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय पर अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास की जरूरत लगातार बनी हुई है, तो तीन साल से अधूरी पड़ी इस योजना को पूरा कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है। एक तरफ सरकारी आवास की कमी है, दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन का हिस्सा लंबे समय से उपयोग में नहीं आ पा रहा।
कोट
फ्लैटों के निर्माण को पूरा करने के लिए विभाग से बजट मांगा गया है। बजट कम होने के कारण इनका कार्य रुक गया था। अब जल्द ही इनका काम शुरू किया जाएगा, ताकि अधिकारियों कर्मचारियों को जिला मुख्यालय पर रोकने के लिए कोई दिक्कत ना हो। - प्रदीप सिंह संधू, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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32 सरकारी आवास अधर में
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ट्रांजिट फ्लैट आवासीय योजना तीन साल बाद भी अधूरी पड़ी है। योजना के तहत बनाए जा रहे करीब 32 फ्लैटों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। निर्माण कार्य लंबे समय से बंद होने के कारण तैयार हो चुका ढांचा भी खराब होने लगा है। ऐसे में सरकारी आवास उपलब्ध कराने की योजना खुद सरकारी उपेक्षा की शिकार होती दिखाई दे रही है।
योजना के तहत करीब 32 फ्लैट तैयार किए जाने थे, ताकि तबादले के बाद नूंह आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल सरकारी आवास उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए करीब 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। योजना के अनुसार पहले इन फ्लैटों का निर्माण पुरानी तहसील के समीप किया जाना था, लेकिन जमीन संबंधी विवाद के चलते स्थान बदलना पड़ा। बाद में योजना को नए सचिवालय के समीप ऑफिसर्स कॉलोनी के पास स्थानांतरित किया गया।
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स्थान बदलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और तीन वर्ष पहले फ्लैटों का स्ट्रक्चर तैयार कर दिया गया, लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब बिजली, पानी, रंग-रोगन समेत कई जरूरी कार्य अधूरे हैं। लंबे समय से निर्माण बंद रहने के कारण भवन की स्थिति भी खराब होने लगी है।
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बजट नहीं मिला तो रुका काम
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना के शेष कार्यों को पूरा कराने के लिए बजट की आवश्यकता है। विभाग की ओर से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की डिमांड की गई है। बजट उपलब्ध होने के बाद शेष निर्माण कार्य पूरा कराया जा सकेगा। निर्माण पूरा नहीं होने का सीधा असर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जिन्हें नूंह में तैनाती के दौरान सरकारी आवास नहीं मिल पाता। उन्हें या तो किराये के मकानों में रहना पड़ता है या दूसरे शहरों से रोजाना आवागमन करना पड़ता है।
सरकारी आवास की जरूरत, लेकिन तैयार इमारत बेकार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय पर अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सरकारी आवास की जरूरत लगातार बनी हुई है, तो तीन साल से अधूरी पड़ी इस योजना को पूरा कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है। एक तरफ सरकारी आवास की कमी है, दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन का हिस्सा लंबे समय से उपयोग में नहीं आ पा रहा।
कोट
फ्लैटों के निर्माण को पूरा करने के लिए विभाग से बजट मांगा गया है। बजट कम होने के कारण इनका कार्य रुक गया था। अब जल्द ही इनका काम शुरू किया जाएगा, ताकि अधिकारियों कर्मचारियों को जिला मुख्यालय पर रोकने के लिए कोई दिक्कत ना हो। - प्रदीप सिंह संधू, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी