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Palwal News: प्रधानाध्यापकों को दिया गया प्रशिक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। विद्यालयों को मिलने वाली सरकारी ग्रांट के उपयोग में पारदर्शिता और वित्तीय नियमों की अनदेखी रोकने के लिए बुधवार को खंड संसाधन समन्वयक (बीआरसी) कार्यालय पुन्हाना में 210 विद्यालयों के मुखियाओं को प्रशिक्षण दिया गया। एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राचार्यों, मुख्याध्यापकों, मौलिक मुख्याध्यापकों, मुख्य शिक्षकों और बीआरसी को सरकारी राशि के नियमानुसार खर्च, भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय रिकॉर्ड के रखरखाव की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि ग्रांट खर्च करने के साथ-साथ उसका पूरा हिसाब और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना भी विद्यालय मुखिया की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीआरसी पुन्हाना होशियार रावत ने की। खंड समन्वयक कार्यालय नगीना के अकाउंटेंट शिवचरण ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया। वहीं, पुन्हाना कार्यालय के अकाउंटेंट सुधीर कुमार और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पुन्हाना के अकाउंटेंट नवीन कुमार ने भी वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी बारीकियां समझाईं।
होशियार रावत ने कहा कि सरकार विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों, आधारभूत सुविधाओं और विद्यार्थियों के हित में विभिन्न मदों के तहत ग्रांट उपलब्ध कराती है। इस राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य और विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। विद्यालय मुखिया वित्तीय कार्यों में लापरवाही न बरतें और प्रत्येक खर्च का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखें। दस्तावेजों में कमी या नियमों की अनदेखी से भविष्य में परेशानी हो सकती है।
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हर भुगतान का बिल और वाउचर रखना जरूरी
मास्टर ट्रेनर शिवचरण ने ग्रांट खर्च करने से पहले पूरी की जाने वाली औपचारिकताओं, भुगतान के नियमों और वित्तीय प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक भुगतान के साथ संबंधित बिल, वाउचर और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सही तरीके से संधारण किया जाना चाहिए। अकाउंटेंट सुधीर कुमार और नवीन कुमार ने विद्यालयों में होने वाले विभिन्न खर्चों का लेखा-जोखा रखने, भुगतान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने और वित्तीय अभिलेख व्यवस्थित रखने के तरीके बताए।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय मुखियाओं ने ग्रांट के उपयोग, भुगतान और दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर सवाल पूछे। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से उनकी शंकाओं का समाधान किया। साथ ही बताया कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड इस तरह व्यवस्थित रखे जाएं कि जरूरत पड़ने पर उनका आसानी से सत्यापन किया जा सके।
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पुन्हाना। विद्यालयों को मिलने वाली सरकारी ग्रांट के उपयोग में पारदर्शिता और वित्तीय नियमों की अनदेखी रोकने के लिए बुधवार को खंड संसाधन समन्वयक (बीआरसी) कार्यालय पुन्हाना में 210 विद्यालयों के मुखियाओं को प्रशिक्षण दिया गया। एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राचार्यों, मुख्याध्यापकों, मौलिक मुख्याध्यापकों, मुख्य शिक्षकों और बीआरसी को सरकारी राशि के नियमानुसार खर्च, भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय रिकॉर्ड के रखरखाव की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि ग्रांट खर्च करने के साथ-साथ उसका पूरा हिसाब और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना भी विद्यालय मुखिया की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीआरसी पुन्हाना होशियार रावत ने की। खंड समन्वयक कार्यालय नगीना के अकाउंटेंट शिवचरण ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण दिया। वहीं, पुन्हाना कार्यालय के अकाउंटेंट सुधीर कुमार और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पुन्हाना के अकाउंटेंट नवीन कुमार ने भी वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी बारीकियां समझाईं।
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होशियार रावत ने कहा कि सरकार विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों, आधारभूत सुविधाओं और विद्यार्थियों के हित में विभिन्न मदों के तहत ग्रांट उपलब्ध कराती है। इस राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य और विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। विद्यालय मुखिया वित्तीय कार्यों में लापरवाही न बरतें और प्रत्येक खर्च का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखें। दस्तावेजों में कमी या नियमों की अनदेखी से भविष्य में परेशानी हो सकती है।
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हर भुगतान का बिल और वाउचर रखना जरूरी
मास्टर ट्रेनर शिवचरण ने ग्रांट खर्च करने से पहले पूरी की जाने वाली औपचारिकताओं, भुगतान के नियमों और वित्तीय प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक भुगतान के साथ संबंधित बिल, वाउचर और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सही तरीके से संधारण किया जाना चाहिए। अकाउंटेंट सुधीर कुमार और नवीन कुमार ने विद्यालयों में होने वाले विभिन्न खर्चों का लेखा-जोखा रखने, भुगतान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने और वित्तीय अभिलेख व्यवस्थित रखने के तरीके बताए।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय मुखियाओं ने ग्रांट के उपयोग, भुगतान और दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर सवाल पूछे। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से उनकी शंकाओं का समाधान किया। साथ ही बताया कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड इस तरह व्यवस्थित रखे जाएं कि जरूरत पड़ने पर उनका आसानी से सत्यापन किया जा सके।