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Palwal News: मां से कहा था-जल्दी घर लौटूंगा
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रिजवान खान
नूंह। रविवार की रात नवीन घर से यह कहकर निकला था कि बर्थडे पार्टी में शामिल होकर जल्द वापस लौट आएगा। मां कविता को क्या पता था कि बेटे से यह उसकी आखिरी बातचीत होगी। रात गुजरती रही और मां बेटे के लौटने का इंतजार करती रही। लेकिन सुबह दरवाजे पर बेटे की आवाज नहीं, उसकी अर्थी पहुंची। करीब 21 वर्षीय नवीन और उसके चाचा करीब 40 वर्षीय विजय की सड़क हादसे में मौत ने पूरे कानोली गांव को गम में डुबो दिया।
नवीन की मां कविता पर दुखों का पहाड़ एक बार फिर टूट पड़ा है। करीब एक साल पहले ही उसके पति की हत्या कर दी गई थी। पति की मौत के बाद जवान बेटा नवीन ही उनके बुढ़ापे का सहारा था। उसी बेटे के साथ अब उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा भी चला गया।
नवीन की मौत की खबर मिलते ही कविता बदहवास हो गई। वह बेटे को पुकार-पुकारकर रोती रही। उसकी आंखों के सामने शायद वही आखिरी बात घूम रही थी, जब नवीन ने घर से निकलते समय जल्द लौटने का भरोसा दिया था। मां इंतजार करती रही, लेकिन बेटा लौटकर नहीं आया।
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नवीन की दो बहनें भी भाई की मौत से टूट गईं। कभी घर में उनकी हंसी की वजह बनने वाला भाई अब तस्वीर में रह गया। बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस असहनीय दुख के सामने हर कोशिश छोटी नजर आ रही थी।
सोमवार को जब चाचा विजय और भतीजे नवीन की अर्थियां एक साथ घर से उठीं तो गांव की गलियां भी जैसे खामोश हो गईं। परिवार के लोग फूट-फूटकर रो रहे थे और हर आंख नम थी।
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नूंह। रविवार की रात नवीन घर से यह कहकर निकला था कि बर्थडे पार्टी में शामिल होकर जल्द वापस लौट आएगा। मां कविता को क्या पता था कि बेटे से यह उसकी आखिरी बातचीत होगी। रात गुजरती रही और मां बेटे के लौटने का इंतजार करती रही। लेकिन सुबह दरवाजे पर बेटे की आवाज नहीं, उसकी अर्थी पहुंची। करीब 21 वर्षीय नवीन और उसके चाचा करीब 40 वर्षीय विजय की सड़क हादसे में मौत ने पूरे कानोली गांव को गम में डुबो दिया।
नवीन की मां कविता पर दुखों का पहाड़ एक बार फिर टूट पड़ा है। करीब एक साल पहले ही उसके पति की हत्या कर दी गई थी। पति की मौत के बाद जवान बेटा नवीन ही उनके बुढ़ापे का सहारा था। उसी बेटे के साथ अब उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा भी चला गया।
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नवीन की मौत की खबर मिलते ही कविता बदहवास हो गई। वह बेटे को पुकार-पुकारकर रोती रही। उसकी आंखों के सामने शायद वही आखिरी बात घूम रही थी, जब नवीन ने घर से निकलते समय जल्द लौटने का भरोसा दिया था। मां इंतजार करती रही, लेकिन बेटा लौटकर नहीं आया।
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नवीन की दो बहनें भी भाई की मौत से टूट गईं। कभी घर में उनकी हंसी की वजह बनने वाला भाई अब तस्वीर में रह गया। बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस असहनीय दुख के सामने हर कोशिश छोटी नजर आ रही थी।
सोमवार को जब चाचा विजय और भतीजे नवीन की अर्थियां एक साथ घर से उठीं तो गांव की गलियां भी जैसे खामोश हो गईं। परिवार के लोग फूट-फूटकर रो रहे थे और हर आंख नम थी।