फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   Three and a quarter lakh cusecs of water will reach in 72 hours, eight thousand acres of crops in the district will be affected.

Palwal News: 72 घंटे में पहुंचेगा सवा तीन लाख क्यूसेक पानी, जिले की आठ हजार एकड़ फसल होगी प्रभावित

Mon, 01 Sep 2025 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल Updated Mon, 01 Sep 2025 11:02 PM IST
विज्ञापन
Three and a quarter lakh cusecs of water will reach in 72 hours, eight thousand acres of crops in the district will be affected.
पलवल। हथिनीकुंड बैराज से सोमवार सुबह लगभग सवा तीन लाख क्यूसेक (3,21,653) पानी छोड़ा गया है जो अगले 72 घंटे के भीतर पलवल में पहुंचेगा। जिले के लिए यह पानी संकट लेकर आ रहा है, क्योंकि पहले ही लगातार बारिश और पहले छोड़े गए पानी से करीब तीन हजार एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है। अब आशंका जताई जा रही है कि अगले तीन दिनों में पांच से आठ हजार एकड़ तक की फसल प्रभावित हो सकती है।
विज्ञापन


यमुना के तेज बहाव ने हाल ही में बनाए गए हसनपुर से उत्तर प्रदेश जाने वाले चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को भी अपनी चपेट में ले लिया। सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया, जिससे गांवों का संपर्क टूट गया। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे अपने ही खेतों तक नहीं जा पा रहे हैं। इससे कृषि कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं और नुकसान की संभावना और बढ़ गई है।
विज्ञापन


गांवों में जलभराव, फसलें प्रभावित
जिले के यमुना किनारे बसे गांवों बागपुर, दोस्तपुर, भोल्डा, सोलड़ा, राजुपुर, शेखपुर, अतवा, बिल्लोचपुर, काशीपुर, लहरपुर, फाटनगर, सदुआगढ़ी, माहोली, इंदिरा नगर, गुरवाड़ी, रहीमपुर, बलई और भवाना में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। इन इलाकों में बोई गई धान, भिंडी, लौकी, तोरई, बैंगन और टिंडा जैसी सब्जियां पानी में डूब चुकी हैं। किसानों ने बताया कि खेतों में बोया गया पशुओं के लिए हरा चारा भी प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सब्जियों और चारे की किल्लत

ग्रामीणों का कहना है कि आमदनी का एकमात्र साधन सब्जियां ही थीं, जो अब बड़ी मात्रा में प्रभावित हो गई हैं। इससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। दूसरी ओर पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी समस्या चारे की किल्लत बन गई है। खेतों में खड़ा चारा प्रभावित होने से पशुओं को खिलाने के लिए पर्याप्त साधन नहीं बचे हैं।

ग्रामीणों का आरोप, पुलिया का निर्माण नहीं किया गया
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सड़क के निर्माण के दौरान पुलिया नहीं बनाई गई, बल्कि पाइपलाइन दबा दी गई थी। भारी बारिश और यमुना के बहाव ने इस पाइपलाइन को बेअसर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया। अब ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है।

आम जनता की जेब पर भी असर

किसानों की फसल प्रभावित होने का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता पर भी सीधा पड़ेगा। सब्जियों की प्रभावित आपूर्ति के कारण बाजार में कीमतें आसमान छूने की आशंका है। पहले ही सब्जियों के दाम बढ़े हुए हैं, अब स्थिति और बिगड़ सकती है।


हर सेकेंड पहुंच रहा 91 लाख लीटर पानी
यमुना में हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी लाखों-करोड़ों लीटर में मापा जाता है। सोमवार सुबह छोड़े गए 3,21,653 क्यूसेक पानी का मतलब है कि हर सेकेंड करीब 91 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है। इसे आसान भाषा में समझें तो इतना पानी केवल एक सेकेंड में लगभग 216 ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल भर सकता है। एक ओलंपिक पूल की लंबाई 50 मीटर, चौड़ाई 25 मीटर और औसत गहराई दो मीटर होती है, उसमें लगभग 42 हजार लीटर पानी आता है। यानी, जब तक कोई पलक झपके, उतने समय में ही सैकड़ों बड़े पूल पानी से भर जाएंगे। वहीं, अगर दिल्ली के इंडिया गेट स्थित बोट क्लब झील से तुलना करें तो उसका अनुमानित आयतन करीब दो से तीन करोड़ लीटर है। हथिनीकुंड से छोड़ा गया पानी इस झील को सिर्फ 30 से 40 सेकंड में पूरी तरह भर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed