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तिलहन खेती की तरफ बढ़ेगा रुझान, किसान होंगे मालामाल, खाते में सब्सिडी जाने के कारण खत्म होगी बिचौलिया प्रथा
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पलवल में एक खेत में खड़ी सरसों की फसल
- फोटो : Palwal
पलवल। आम बजट में पेश की गई घोषणाओं से किसानों का रुझान तिलहन खेती की ओर बढ़ेगा। इससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी और उत्पादन भी। आमतौर पर कम लागत वाली इन फसलों की ओर किसान ज्यादा आकर्षित रहते हैं। सीधे खाते में सब्सिडी जाने से बिचौलिया प्रथा भी खत्म हो जाएगी। वह आसानी से फसलों को बाजारों में बेच सकेंगे।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तिलहन खेती को बजट में प्राथमिकता देने का उद्देश्य बाहर के देशों से आयात हो रहे तेल पर अंकुश लगाकर बढ़ती तेल की कीमतों को कम करना है। यदि किसान गेहूं और धान के साथ-साथ तिलहन खेती पर ध्यान दें तो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ सकती है, बल्कि गेहूं और धान से काफी कम लागत में तिलहन की खेती की जा सकेगी। इसके अलावा देश में तेल की कमी नहीं रहेगी और बाहर से तेल का आयात करना नहीं पड़ेगा। लोगों को सस्ता तेल मिलने लगेगा। सरकार की तिलहन खेती को बढ़ावा देने की बजट में घोषणा से जिले में तिलहन खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ सकता है।
पिछले कई वर्षों से किए जा रहे कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद पलवल जिले के किसान सरसों के अलावा अन्य तिलहनी फसलों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरसों की फसलों का भी उत्पादन जिले में इस बार ही बढ़ा है। इसका कारण पिछले सालों की तुलना में इस बार सरसों का समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिलना है।
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8 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई
पलवल जिले में इस बार 8 हजार हेक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बुवाई की गई है। पिछले साल तक यही पांच हजार हेक्टेयर में होती थी। पिछले साल समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिलने पर किसानों का झुकाव सरसों की तरफ बढ़ गया। इसके अलावा सूरजमुखी, मूंगफली, सोयाबीन तथा तोरिया की फसल जिले में मात्र 20 से 25 हेक्टेयर भूमि में उगाई जा रही है।
गेहूं और धान के अलावा सरसों की फसल भी बोता हूं। सरसों की फसल बोने से लाभ हुआ। इस बार समर्थन मूल्य से अधिक कीमत सरसों को मिली। प्रयास रहेगा कि आगे भी सरसों की फसल की बिजाई अधिक करूं।
- चरण, बाता
सरसों की फसल उगाने से लाभ हुआ। अन्य फसलों के मुकाबले मंडी में सरसों को समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिला। आगे भी सरसों की फसल की अधिक बुवाई करूंगा।
- जगदीश महाशय, लुलवाड़ी
तेल का होगा निर्यात, बढ़ेगी आय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर मलिक का कहना है कि यदि किसान तिलहन खेती करते हैं तो न सिर्फ जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, बल्कि बिजली और पानी की भी बचत होगी। क्योंकि, तिलहन खेती में पानी की कम जरूरत पड़ती है। इसके अलावा खाद और यूरिया की भी दिक्कत नहीं होगी। इन फसलों में देसी उपज का उपयोग हो पाएगा। तिलहन खेती से तेल निकलेगा तथा दूसरे देशों से आयात के बजाय तेल का निर्यात हो सकेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तिलहन खेती को बजट में प्राथमिकता देने का उद्देश्य बाहर के देशों से आयात हो रहे तेल पर अंकुश लगाकर बढ़ती तेल की कीमतों को कम करना है। यदि किसान गेहूं और धान के साथ-साथ तिलहन खेती पर ध्यान दें तो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ सकती है, बल्कि गेहूं और धान से काफी कम लागत में तिलहन की खेती की जा सकेगी। इसके अलावा देश में तेल की कमी नहीं रहेगी और बाहर से तेल का आयात करना नहीं पड़ेगा। लोगों को सस्ता तेल मिलने लगेगा। सरकार की तिलहन खेती को बढ़ावा देने की बजट में घोषणा से जिले में तिलहन खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ सकता है।
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पिछले कई वर्षों से किए जा रहे कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद पलवल जिले के किसान सरसों के अलावा अन्य तिलहनी फसलों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। सरसों की फसलों का भी उत्पादन जिले में इस बार ही बढ़ा है। इसका कारण पिछले सालों की तुलना में इस बार सरसों का समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिलना है।
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8 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई
पलवल जिले में इस बार 8 हजार हेक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बुवाई की गई है। पिछले साल तक यही पांच हजार हेक्टेयर में होती थी। पिछले साल समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिलने पर किसानों का झुकाव सरसों की तरफ बढ़ गया। इसके अलावा सूरजमुखी, मूंगफली, सोयाबीन तथा तोरिया की फसल जिले में मात्र 20 से 25 हेक्टेयर भूमि में उगाई जा रही है।
गेहूं और धान के अलावा सरसों की फसल भी बोता हूं। सरसों की फसल बोने से लाभ हुआ। इस बार समर्थन मूल्य से अधिक कीमत सरसों को मिली। प्रयास रहेगा कि आगे भी सरसों की फसल की बिजाई अधिक करूं।
- चरण, बाता
सरसों की फसल उगाने से लाभ हुआ। अन्य फसलों के मुकाबले मंडी में सरसों को समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिला। आगे भी सरसों की फसल की अधिक बुवाई करूंगा।
- जगदीश महाशय, लुलवाड़ी
तेल का होगा निर्यात, बढ़ेगी आय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर मलिक का कहना है कि यदि किसान तिलहन खेती करते हैं तो न सिर्फ जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी, बल्कि बिजली और पानी की भी बचत होगी। क्योंकि, तिलहन खेती में पानी की कम जरूरत पड़ती है। इसके अलावा खाद और यूरिया की भी दिक्कत नहीं होगी। इन फसलों में देसी उपज का उपयोग हो पाएगा। तिलहन खेती से तेल निकलेगा तथा दूसरे देशों से आयात के बजाय तेल का निर्यात हो सकेगा और किसानों की आय बढ़ेगी।