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Palwal News: बारिश से कहीं किसानों के चेहरे खिले तो कहीं छाई मायुसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2025 10:15 PM IST
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The rain brought joy to farmers' faces at some places and disappointment at others.
गेहूं, जौ, सरसों की फसल के लिए बारिश फायदेमंद वहीं सब्जियों के खराब होने का खतरा बढ़ा
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बारिश के बाद ठंड ने बढ़ाई लोगों की परेशानी, सब्जियों की फसल खराब होने का खतरा बढ़ा
बारिश से किसानों के चेहरे खिले, फसलों में होगा फायदा, जलभराव से आफत भी
संवाद न्यूज एजेंसी

पलवल/होडल। जिले में शनिवार रात व रविवार सुबह हुई हल्की बारिश किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुई है। गेहूं की फसल के लिए बारिश की बूंदे सोने के समान मानी जा रही हैं। हालांकि सब्जियों में यह बारिश रोग पैदा कर सकती है। बारिश से जिले का तापमान गिर गया, जिससे एकाएक ठंड में बढ़त हो गई है। बढ़ी ठंड के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, हल्की बारिश से कुछ स्थानों पर जलभराव भी देखा गया। शहर के रेलवे रोड व राष्ट्रीय राजमार्ग के सर्विस लेन पर जलभराव हो गया।
मौसम विभाग के मुताबिक रविवार से मौसम में परिवर्तन होगा। कोहरा पड़ने व बूंदाबांदी होने की संभावना है। शनिवार की दोपहर बाद मौसम परिवर्तनशील होने के कारण शाम बूंदाबांदी से बढ़ी ठंडक ने किसानों के चेहरों पर रौनक लौटा दी। किसान बूंदाबांदी को गेहूं, जौ, सरसों, चना व मटर की फसल के लिए फायदेमंद मान रहे हैं। किसान राम अवतार, हरि सिंह, लोकेश ने बताया कि सर्दी के इस मौसम में बूंदाबांदी ऐसे समय हुई है, जब इसकी सर्वाधिक जरूरत थी। कृषि विशेषज्ञ महावीर मलिक ने बताया कि हल्की बूंदाबांदी रबी की फसलों के लिए संजीवनी साबित होगी। फसलें बेहतर ढंग से पोषक तत्व ग्रहण कर अपना विकास कर पाएंगी। बूंदाबांदी से किसानों की गेहूं व सरसों की फसल को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।
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हथीन में पांच व बहीन में हुई तीन एमएम बारिश
मौसम विभाग के अनुसार हसनपुर में सबसे ज्यादा पांच एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं, होडल व पलवल में चार-चार एमएम व हसनपुर व बहीन में सबसे कम तीन-तीन एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश के बाद रविवार को अधिकतम तापमान 16 डिग्री तो न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
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बारिश से सब्जियों में हो सकता है नुकसान
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बूंदाबांदी के बाद आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा पैदा हो गया है। मौसम में उतार-चढ़ाव ने सब्जियों का उत्पादन करने वाले किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। इससे आलू की फसल में रोग का खतरा बढ़ गया है। किसान इस बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के कारण फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञ महावीर मलिक ने बताया कि आलू फसल में झुलसा रोग के लक्षण दिखाई पड़ने पर मौंकोजेब का छिड़काव करें। आलू की फसल में झुलसा रोग के प्रकोप को रोकने के लिए मैंकोजेब दो ग्राम एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही झुलसा लगने पर रीडोमिल दो ग्राम एक लीटर पानी में मिला कर छिड़काव कर सकते हैं।
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