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किसानों की गरिमा व एकता का प्रतीक है आंदोलन

Thu, 29 Jul 2021 05:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jul 2021 05:21 PM IST
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'The movement is a symbol of the dignity and unity of the farmers'
पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसानों का धरना बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। धरनारत किसानों ने जंतर-मंतर पर संपन्न हुई महिला किसान संसद द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम में सरकार द्वारा किए संशोधन के कारण बढ़ रही जमाखोरी व कालाबाजारी के निंदा प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन करते हुए कृषि कानून वापस होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। किशन सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित धरने का संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। यहां कहा गया कि ये आंदोलन किसानों की गरिमा का प्रतीक बन चुका है।
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किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में बारिश के दौरान भी धरना जारी रहा। किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतनसिंह सौरौत ने कहा कि इस ऐतिहासिक आंदोलन ने भाजपा सरकार के किसान विरोधी और अलोकतांत्रिक उपायों को चुनौती दी है। यह आंदोलन किसानों की गरिमा और एकता का प्रतीक बन गया है। किसान आंदोलन अब जन आंदोलन बन चुका है, जो भारत के लोकतंत्र की रक्षा और देश को बचाने का पर्याय बन चुका है।
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आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन ने खाद्य आपूर्ति में बड़े कॉर्पोरेट द्वारा जमाखोरी व कालाबाजारी को कानूनी मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि कानून का असर केवल किसानों पर ही नहीं पडे़गा, बल्कि कमा के खाने वाले हर नागरिक को इन कानूनों के दुष्प्रभाव झेलने पडे़ंगे। इन कानूनों के कारण गरीब जनता को भोजन भी उपलब्ध नहीं होगा, तब उन्हें खाने में कटौती करने पर मजबूर होना पडे़गा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसानों की जमीन बचाने और तीव्र, सघन और असरदार बनाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन का विस्तार करने का फैसला किया है।
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उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा दिया गया बयान कि सरकार के पास मौजूदा आंदोलन में शामिल किसानों की मौत का कोई डाटा नहीं है, बेहद शर्मनाक व निंदनीय है। मास्टर महेंद्र चौहान ने बताया कि शुक्रवार को चौहान पाल धरने की कमान संभालेगी।

धरने को किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद, रमेश सौरौत, कुलभाण कुमार, नरेंद्र सहरावत, सोहनपाल चौहान, छिद्दी नंबरदार, गोविंद राम, रघुबीर सिंह, शिवसिंह छाता, बीधू सिंह, इक्लाब सिंह खेडा, अच्छेलाल, चंद्रमुनि, बीर सिंह, करतार सिंह, फतेहसिंह और गयालाल ने संबोधित किया।
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