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तीन परिवारों के बुझ गए चिराग, घर में मची चीख-पुकार

Sat, 19 Mar 2022 11:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2022 11:03 PM IST
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The lamps of three families were extinguished, there was a scream in the house
गांव भिडूकी में तालाब में डूबे बच्चों को निकालने को लगी भीड़ व तालाब में बच्चों को खोजते ग्रामीण - फोटो : Palwal
होडल। तालाब में चार बच्चों के डूबने से तीन परिवारों के चिराग बुझ गए। घरों में चीख पुकार और कोहराम मचा है। बच्चों की मौत पर हर कोई गमजदा है। होली का उल्लास मातम में बदल दिया। हर्षित और नमन की मां कविता दरवाजे पर टकटकी लगाए रोते हुए कहती हैं कि पानी भर दो... मेरे बेटे होली खेलकर आने वाले हैं। आते ही नहाएंगे। वहीं पिता जगदीश बेटों की फोटो देखकर तेज-तेज रोने लगते हैं। ग्रामीण उन्हें सांत्वना देने में लगे हैं।
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नरेंद्र और भूपेंद्र की मौत के बाद उनके घर पर भी यही हाल है। वहां भी शोक में बैठे लोगों के बीच नरेंद्र व भूपेंद्र के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों की माताओं को जहां महिलाएं संभालने में लगी हैं, वहीं पुरुष पिताओं को सांत्वना देने में लगे हैं। इस हादसे ने वर्ष 1984 में गांव में ही आग में झुलसने से हुई छह बच्चों की मौत को भी ताजा कर दिया। केवल-माता-पिता और रिश्तेदार ही नहीं गांव के लोगों के भी आंसू नहीं रुक रहे हैं।
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हर्षित का सैनिक स्कूल में हो गया था चयन
जगदीश ने बताया कि उनका बेटा हर्षित बड़ा ही होनहार था। उसका चयन सैनिक स्कूल में हो गया था। इसके अलावा नमन भी पढ़ाई में काफी होशियार था। उन्होंने बताया दो भाइयों के बीच हर्षित व नमन ही थे। उनके भाई ऊधम की तीन बेटियों, हर्षित और नमन के बीच बहुत प्यार था। उनका भी रो-रोकर बुरा हाल है। वे भी बार-बार अपने भाइयों का पूछ रही हैं।
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नरेंद्र और भूपेंद्र थे चचेरे भाई
नरेंद्र और भूपेंद्र दोनों चचेरे भाई थे। नरेंद्र माता-पिता का एकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है। उसकी मौत के बाद घर का चिराग बुझ गया। नरेंद्र की मां रेणु कहती हैं कि उसका बेटा होली खेलकर जरूर आएगा। वहीं नरेंद्र के चचेरे भाई भूपेंद्र के पिता सुभाष व मां रेखा का भी बुरा हाल है।

तालाब से पानी निकलवाया
चार बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों ने तालाब से पानी पूरी तरह निकाल दिया है। निवर्तमान सरपंच सत्यदेव गौतम ने बताया कि इस हादसे के बाद मंदिर के तालाब में भरे पानी को ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन के माध्यम से बाहर निकलवाया गया है। इस प्रकार के हादसे से बचने के लिए तालाब के आसपास बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम कराए जाएंगे। इससे पहले इतना पानी कभी तालाब में नहीं भरा गया।
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