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निंहगों को मोहरा बना लखीमपुर हत्याकांड से ध्यान हटाना चाहती थी सरकार
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पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर पिछले करीब 11 माह से कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। धरने में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रेल मार्ग रोकने के सफल आयोजन के लिए किसानों और मजदूरों का आभार व्यक्त किया गया। किसानों ने कहा कि पलवल के किसान पूरी ताकत के साथ आंदोलनरत हैं। किसानों ने मोर्चा के हर आह्वान को सफल किया है। नरेंद्र सहरावत द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता नंदराम शर्मा सरपंच ने की। धरने में शामिल किसानों ने भगवान बाल्मीकि जयंती मनाई तथा उनके बताए रास्ते पर चलकर आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का फैसला किया।
धरने में राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती और धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि लगभग एक साल से अहिंसक रूप से चल रहे किसान आंदोलन के निशाने पर ये तीन काले कृषि कानून हैं। जिनका मकसद भारत के किसानों और मजदूरों को बड़े पूंजीपतियों का गुलाम बनाना है। लगभग सारी की सारी उपज को विशालकाय गोदामों में जमा कर लिया जाएगा। जनता को इनकी आसान उपलब्धता पर अंकुश लगाते हुए इनके दामों को पेट्रोल व डीजल से भी ज्यादा ऊंची कीमतों के स्तर तक पहुंचाना सरकार का मकसद है। भाजपा परिवार व बहुचर्चित कट्टरपंथी नेताओं की आपसी साठगांठ से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की देशद्रोही कोशिशें की जा रही हैं। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि अब निहंगों को मोहरा बनाकर भाजपा ने किसान आंदोलन को बदनाम करने का नया कुचक्र चलाया है, ताकि किसान आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया जा सके। निहंग सिखों के मुखिया और केंद्रीय कृषिमंत्री के बीच मुलाकात की तस्वीरें वायरल होने के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि इस पूरे षड़यंत्र में दाल में काला ही नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है। यह पूरा षड़यंत्र लखीमपुर खीरी नरसंहार से ध्यान हटाने के लिए रचा गया था।
धरने को डॉ. रघुबीर सिंह, राजेंद्र घरौट, श्रीचंद महाशय, रूपराम तेवतिया, महावीर मलिक, रमेश सौरौत, अतर सिंह, दरियाब सिंह सचिव, पंडित कल्लू, चतर सिंह, गोपी हवलदार, अच्छेलाल, मुंशीराम, रोशनलाल, सुंदर सरपंच, चेतराम मैंबर व शिव सिंह थानेदार ने संबोधित किया।
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धरने में राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती और धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि लगभग एक साल से अहिंसक रूप से चल रहे किसान आंदोलन के निशाने पर ये तीन काले कृषि कानून हैं। जिनका मकसद भारत के किसानों और मजदूरों को बड़े पूंजीपतियों का गुलाम बनाना है। लगभग सारी की सारी उपज को विशालकाय गोदामों में जमा कर लिया जाएगा। जनता को इनकी आसान उपलब्धता पर अंकुश लगाते हुए इनके दामों को पेट्रोल व डीजल से भी ज्यादा ऊंची कीमतों के स्तर तक पहुंचाना सरकार का मकसद है। भाजपा परिवार व बहुचर्चित कट्टरपंथी नेताओं की आपसी साठगांठ से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की देशद्रोही कोशिशें की जा रही हैं। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि अब निहंगों को मोहरा बनाकर भाजपा ने किसान आंदोलन को बदनाम करने का नया कुचक्र चलाया है, ताकि किसान आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया जा सके। निहंग सिखों के मुखिया और केंद्रीय कृषिमंत्री के बीच मुलाकात की तस्वीरें वायरल होने के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि इस पूरे षड़यंत्र में दाल में काला ही नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है। यह पूरा षड़यंत्र लखीमपुर खीरी नरसंहार से ध्यान हटाने के लिए रचा गया था।
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धरने को डॉ. रघुबीर सिंह, राजेंद्र घरौट, श्रीचंद महाशय, रूपराम तेवतिया, महावीर मलिक, रमेश सौरौत, अतर सिंह, दरियाब सिंह सचिव, पंडित कल्लू, चतर सिंह, गोपी हवलदार, अच्छेलाल, मुंशीराम, रोशनलाल, सुंदर सरपंच, चेतराम मैंबर व शिव सिंह थानेदार ने संबोधित किया।
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