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विजय जुलूस निकालकर करेंगे किसान आंदोलन का समापन
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पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा की बृहस्पतिवार को सिंधू बॉर्डर पर हुए बैठक में धरना समाप्ति की औपचारिक घोषणा के बाद पलवल के किसानों ने खुशी व्यक्त की है। धरने में बुजुर्ग किसानों को फूलमाला पहनाकर जीत का जश्न मनाया गया। किसान संघर्ष समिति पलवल ने आपातकाल बैठक कर निर्णय लिया कि 11 दिसंबर को भारी संख्या ट्रैक्टरों के साथ विजय जुलूस निकालकर धरने को समाप्त किया जाएगा। इस दौरान किसान एक साल के संघर्ष को याद करेंगे। साथ ही संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले किसानों को सम्मानित किया जाएगा। पिछले एक साल से गर्मी, सर्दी, बरसात के दौरान विषम परिस्थितियों में बिताए पलों को सांझा भी किया जाएगा।
पलवल के केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर जारी धरने की अध्यक्षता बृहस्पतिवार को कुलभानु कुमार ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने में पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना भी शामिल हुए। इस अवसर पर किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा लंबित मांगों के निपटारे संबंधित पत्र जारी कर दिया है, जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आंदोलन स्थगित करने की औपचारिक घोषणा की है। किसान संघर्ष समिति पलवल संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय का स्वागत करता है। 11 दिसंबर को जिले के किसान, मजदूर, छात्र, युवा, वकील, कर्मचारी व बुद्धिजीवी सुबह 10 बजे धरना स्थल पर एकत्रित होकर विजय जलूस निकालेंगे।
राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने प्रस्ताव में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों को एमएसपी पर बनने वाली कमेटी में शामिल करने पर सहमति व्यक्त करने के साथ-साथ पराली जलाने से जुड़ी आपराधिक धाराओं को भी निरस्त करने की बात स्वीकार कर ली है। केंद्र सरकार ने बिजली संशोधन बिल को संसद में पेश करने से पहले विचार विमर्श करने की बात को स्वीकार कर लिया है।
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धरने में किसान नेता उदय सिंह सरपंच, बीधू सिंह, ब्रह्म सिंह छाता, ज्ञासीराम छाता, ताराचंद, हरिश्चंद चेयरमैन, सरदार उपकार सिंह, हरदयाल सिंह, नरेंद्र सहरावत, राजेंद्र घरौट, ज्ञान सिंह चौहान, ऋषि पाल चौहान, बिजेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह बैंसला, मूलचंद व दरियाब बंचारी ने विचार व्यक्त किए।
मानी गई मांगों का तय समय सीमा में निकालें समाधान
धरने में सर्वसम्मति से मांग की गई कि सरकार द्वारा मानी गई मांगों का एक निश्चित समयसीमा में समाधान किया जाए। एक साल के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं, जिसके लिए केंद्र सरकार ठोस कदम उठाए। राज्यों को लिखित हिदायत और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश जारी किए जाएं। एमएसपी पर बनने वाली कमेटी में कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके संगठनों के प्रतिनिधि शामिल न हों। आंदोलन में जान गंवाने वाले 700 से ज्यादा मृतक किसानों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि
बृहस्पतिवार को धरना शुरू करने से पहले किसानों ने बुधवार को वायुसेना के दुर्घटनाग्रस्त हैलीकॉप्टर में जान गंवाने वाले सीडीएस विपिन रावत व उनकी पत्नी सहित सभी सैनिकों की मृत्यु पर शोक प्रकट किया गया। इस अवसर पर पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की गई। सभी की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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पलवल के केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर जारी धरने की अध्यक्षता बृहस्पतिवार को कुलभानु कुमार ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने में पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना भी शामिल हुए। इस अवसर पर किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा लंबित मांगों के निपटारे संबंधित पत्र जारी कर दिया है, जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आंदोलन स्थगित करने की औपचारिक घोषणा की है। किसान संघर्ष समिति पलवल संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय का स्वागत करता है। 11 दिसंबर को जिले के किसान, मजदूर, छात्र, युवा, वकील, कर्मचारी व बुद्धिजीवी सुबह 10 बजे धरना स्थल पर एकत्रित होकर विजय जलूस निकालेंगे।
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राष्ट्रीय एकता विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने प्रस्ताव में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों को एमएसपी पर बनने वाली कमेटी में शामिल करने पर सहमति व्यक्त करने के साथ-साथ पराली जलाने से जुड़ी आपराधिक धाराओं को भी निरस्त करने की बात स्वीकार कर ली है। केंद्र सरकार ने बिजली संशोधन बिल को संसद में पेश करने से पहले विचार विमर्श करने की बात को स्वीकार कर लिया है।
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धरने में किसान नेता उदय सिंह सरपंच, बीधू सिंह, ब्रह्म सिंह छाता, ज्ञासीराम छाता, ताराचंद, हरिश्चंद चेयरमैन, सरदार उपकार सिंह, हरदयाल सिंह, नरेंद्र सहरावत, राजेंद्र घरौट, ज्ञान सिंह चौहान, ऋषि पाल चौहान, बिजेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह बैंसला, मूलचंद व दरियाब बंचारी ने विचार व्यक्त किए।
मानी गई मांगों का तय समय सीमा में निकालें समाधान
धरने में सर्वसम्मति से मांग की गई कि सरकार द्वारा मानी गई मांगों का एक निश्चित समयसीमा में समाधान किया जाए। एक साल के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं, जिसके लिए केंद्र सरकार ठोस कदम उठाए। राज्यों को लिखित हिदायत और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश जारी किए जाएं। एमएसपी पर बनने वाली कमेटी में कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके संगठनों के प्रतिनिधि शामिल न हों। आंदोलन में जान गंवाने वाले 700 से ज्यादा मृतक किसानों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि
बृहस्पतिवार को धरना शुरू करने से पहले किसानों ने बुधवार को वायुसेना के दुर्घटनाग्रस्त हैलीकॉप्टर में जान गंवाने वाले सीडीएस विपिन रावत व उनकी पत्नी सहित सभी सैनिकों की मृत्यु पर शोक प्रकट किया गया। इस अवसर पर पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की गई। सभी की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।