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अजब हाल, सर्दियों में दिया जाने वाला बाजार गर्मियों में मिला
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रोशन लाल शर्मा
होडल। सुनिए उपमुख्यमंत्री जी, इस भीषण गर्मी और कोरोना महामारी में गरीबों को अनाज चाहिए न कि बाजरा। आपकी सरकार को जब सर्दियों में बाजरा देना चाहिए था, तब तो दिया नहीं और अब जब गरीबों को गेहूं की जरूरत है, तब बाजरा दिया जा रहा है। इस गर्मी में बाजरे की रोटी खाकर मरने से बेहतर है भूखे रहना। यह फरियाद जिले के उन लाखों गरीब लोगों की है जो गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन यापन कर रहे है और जिला खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा उन्हें गेहूं के साथ-साथ बाजरा राशन डिपो दिया जा रहा है। इन दिनों तापमान भी 36 से 40 डिग्री के आसपास चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की बुजुर्ग महिला उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजरे की तासीर भी गरम होती है। ऐसे में विभाग की ओर से दिया जा रहा बाजरा लोगों की सेहत के लिए कितना फायदेमंद होगा। यह सोचने वाली बात है।
महिला उपभोक्ताओं की ओर से इस मामले में राशन डिपो पर ही आपत्ति भी जताई गई थी। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उधर, राशन डिपो होल्डर्स का भी कहना है कि बाजरा सर्दियों में दिया जाता है। लेकिन इस बार गर्मी के मौसम में बाजरा दिया जाना असमंजस पैदा कर रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग की ओर से पीले, गुलाबी व खाकी राशन कार्ड पर सरकार की ओर से राशन वितरित किया जाता है। पहले जहां आटा दिया जाता था। वहीं अब गेहूं के साथ बाजरा भी दिया जा रहा है। राशन कार्ड पर प्रति व्यक्ति दो किलो बाजरा दिया जा रहा है। यदि राशन कार्ड में पांच व्यक्ति हैं तो उनको 10 किलो बाजरा दिया जा रहा है। जबकि प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं दिए जा रहे हैं। इसके अलावा तेल व चीनी आदि भी विभाग की ओर से दिया जा रहा है। हालांकि सब वस्तुएं सही हैं लेकिन गर्मी में बाजरा दिया जाना अटपटा लग रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस संबंध में जब अधिकारियों से बातचीत की जाती है तो वे कहते हैं कि सरकार का जो फैसला है।, उसी के अनुसार वस्तुएं दी जा रही है।
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हमें गेहूं चाहिए बाजरा नहीं
सरकार का अजीब हिसाब है। सर्दियों में बाजरे की गरीबों को आवश्यकता होती है, लेकिन अब गर्मियों में बाजरा दिया जा रहा है। जबकि इस कोरोना महामारी में केवल गेहूं चाहिए। सरकार गेहूं उपलब्ध कराए, बाजरे की जगह।
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नीलम, ग्रामीण महिला
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सही अनाज मिलना चाहिए
सरकार को चाहिए बाजरा की जगह इस समय गेहूं उपलब्ध कराए, ताकि कोरोना महामारी में गरीब परिवारों को ठीक से रोटी खाने को मिल सके। सरकार को चाहिए गरीबों को सही इलाज व खाने का सामान राशन डिपो से उपलब्ध कराए।
-सीमा, ग्रामीण महिला
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बाजरे की हमें कोई जरूरत नहीं
मुझे आज बाजरे की जरूरत नहीं है। हमें रोटी खाने को गेहूं की जरूरत है। बाजरा सर्दियों में चाहिए होता है, जब तो सरकार ने दिया नहीं। सरकार गेहूं उपलब्ध कराए।
-सुनीता देवी, ग्रामीण महिला
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सर्दियों का अनाज है बाजरा
मैंने राशन डिपो होल्डर से कई बार कहा कि बाजरे की जगह गेहूं दे दे, लेकिन नहीं दिया। बाजरा सर्दियों में ठीक रहता है। गर्मियों में गेहूं की जरूरत होती है, ताकि गेहं के आटे की रोटियां बनाकर खाई जा सके।
गजन देवी, ग्रामीण महिला
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क्या कहते हैं चिकित्सक
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अच्छे स्वास्थ्य के लिए मौसम के अनुसार ही हमें अपना खानपान रखना चाहिए। बाजरे का सेवन इस मौसम में अनुकूल नहीं कहा जा सकता। गर्मी के दिनों में इसके सेवन से मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है और गैस व कब्ज आदि पेट संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
-डॉ सतीश वर्मा, उपमंडल चिकित्सा अधिकारी होडल
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खाद्य वस्तुएं सरकार की ओर से तय की गई है। सरकार के निर्णय के अनुसार विभाग की ओर से उन वस्तुओं को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। राशन वितरण का कार्य पूरी पारदर्शिता से किया जा रहा है।
-नरेंद्र सहरावत, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक
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कितने कार्ड धारको मिलेगा राशन
जिले में अन्त्योदय अन्न योजना (एएवाई) यानी कि गुलाबी कार्ड की कुल संख्या 9188 व परिवार के सदस्य 40399, बीपीएल यानी पीला कार्ड की कुल संख्या 28443 व सदस्य 149893 और ओपीएच यानी खाकी कार्ड की कुल संख्या 57906 व 298269 सदस्य शामिल हैं
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होडल। सुनिए उपमुख्यमंत्री जी, इस भीषण गर्मी और कोरोना महामारी में गरीबों को अनाज चाहिए न कि बाजरा। आपकी सरकार को जब सर्दियों में बाजरा देना चाहिए था, तब तो दिया नहीं और अब जब गरीबों को गेहूं की जरूरत है, तब बाजरा दिया जा रहा है। इस गर्मी में बाजरे की रोटी खाकर मरने से बेहतर है भूखे रहना। यह फरियाद जिले के उन लाखों गरीब लोगों की है जो गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन यापन कर रहे है और जिला खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा उन्हें गेहूं के साथ-साथ बाजरा राशन डिपो दिया जा रहा है। इन दिनों तापमान भी 36 से 40 डिग्री के आसपास चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की बुजुर्ग महिला उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजरे की तासीर भी गरम होती है। ऐसे में विभाग की ओर से दिया जा रहा बाजरा लोगों की सेहत के लिए कितना फायदेमंद होगा। यह सोचने वाली बात है।
महिला उपभोक्ताओं की ओर से इस मामले में राशन डिपो पर ही आपत्ति भी जताई गई थी। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उधर, राशन डिपो होल्डर्स का भी कहना है कि बाजरा सर्दियों में दिया जाता है। लेकिन इस बार गर्मी के मौसम में बाजरा दिया जाना असमंजस पैदा कर रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग की ओर से पीले, गुलाबी व खाकी राशन कार्ड पर सरकार की ओर से राशन वितरित किया जाता है। पहले जहां आटा दिया जाता था। वहीं अब गेहूं के साथ बाजरा भी दिया जा रहा है। राशन कार्ड पर प्रति व्यक्ति दो किलो बाजरा दिया जा रहा है। यदि राशन कार्ड में पांच व्यक्ति हैं तो उनको 10 किलो बाजरा दिया जा रहा है। जबकि प्रति व्यक्ति पांच किलो गेहूं दिए जा रहे हैं। इसके अलावा तेल व चीनी आदि भी विभाग की ओर से दिया जा रहा है। हालांकि सब वस्तुएं सही हैं लेकिन गर्मी में बाजरा दिया जाना अटपटा लग रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस संबंध में जब अधिकारियों से बातचीत की जाती है तो वे कहते हैं कि सरकार का जो फैसला है।, उसी के अनुसार वस्तुएं दी जा रही है।
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हमें गेहूं चाहिए बाजरा नहीं
सरकार का अजीब हिसाब है। सर्दियों में बाजरे की गरीबों को आवश्यकता होती है, लेकिन अब गर्मियों में बाजरा दिया जा रहा है। जबकि इस कोरोना महामारी में केवल गेहूं चाहिए। सरकार गेहूं उपलब्ध कराए, बाजरे की जगह।
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नीलम, ग्रामीण महिला
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सही अनाज मिलना चाहिए
सरकार को चाहिए बाजरा की जगह इस समय गेहूं उपलब्ध कराए, ताकि कोरोना महामारी में गरीब परिवारों को ठीक से रोटी खाने को मिल सके। सरकार को चाहिए गरीबों को सही इलाज व खाने का सामान राशन डिपो से उपलब्ध कराए।
-सीमा, ग्रामीण महिला
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बाजरे की हमें कोई जरूरत नहीं
मुझे आज बाजरे की जरूरत नहीं है। हमें रोटी खाने को गेहूं की जरूरत है। बाजरा सर्दियों में चाहिए होता है, जब तो सरकार ने दिया नहीं। सरकार गेहूं उपलब्ध कराए।
-सुनीता देवी, ग्रामीण महिला
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सर्दियों का अनाज है बाजरा
मैंने राशन डिपो होल्डर से कई बार कहा कि बाजरे की जगह गेहूं दे दे, लेकिन नहीं दिया। बाजरा सर्दियों में ठीक रहता है। गर्मियों में गेहूं की जरूरत होती है, ताकि गेहं के आटे की रोटियां बनाकर खाई जा सके।
गजन देवी, ग्रामीण महिला
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क्या कहते हैं चिकित्सक
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अच्छे स्वास्थ्य के लिए मौसम के अनुसार ही हमें अपना खानपान रखना चाहिए। बाजरे का सेवन इस मौसम में अनुकूल नहीं कहा जा सकता। गर्मी के दिनों में इसके सेवन से मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है और गैस व कब्ज आदि पेट संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
-डॉ सतीश वर्मा, उपमंडल चिकित्सा अधिकारी होडल
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खाद्य वस्तुएं सरकार की ओर से तय की गई है। सरकार के निर्णय के अनुसार विभाग की ओर से उन वस्तुओं को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। राशन वितरण का कार्य पूरी पारदर्शिता से किया जा रहा है।
-नरेंद्र सहरावत, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक
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कितने कार्ड धारको मिलेगा राशन
जिले में अन्त्योदय अन्न योजना (एएवाई) यानी कि गुलाबी कार्ड की कुल संख्या 9188 व परिवार के सदस्य 40399, बीपीएल यानी पीला कार्ड की कुल संख्या 28443 व सदस्य 149893 और ओपीएच यानी खाकी कार्ड की कुल संख्या 57906 व 298269 सदस्य शामिल हैं