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किसानों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर भगाया
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किसानों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर भगाया
पलवल। पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण सिंह दलाल ने कहा है कि किसान आंदोलन को लेकर धरने पर बैठे दूसरे राज्यों के किसानों को पुलिस ने झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर भगाया है। सरकार पर किसानों के आंदोलन की आड़ में लाल किले पर अपने ही लोगों से झंडा फहरवाकर किसानों को बदनाम करने का काम किया गया है। यह सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी। उन्होंने बृहस्पतिवार को यह बातें पत्रकार वार्ता में कहीं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि किसानों ने जिस तरह से लगातार 65 दिनों तक कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर बैठकर लड़ाई लड़ी है, वह लड़ाई बेकार नहीं जाएगी। पलवल की इस धरती पर आकर दूसरे राज्यों के किसानों ने जो आवाज किसानों के हक में उठाई थी, उसे दबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धरने पर बैठे किसानों को उन्होंने समझाने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस द्वारा कुछ गुंडा तत्वों से धमकी दिलवाने व झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर कोई सराहनीय काम नहीं किया गया है। पुलिस-प्रशासन यह न समझे कि किसान चुप बैठ जाएंगे। ये तो बाहर के किसान थे, जो डरकर चले गए हैं। अब इस आंदोलन को स्थानीय स्तर पर भी चलाया जाएगा। सरकार को इस कायरतापूर्ण रवैया अपनाने का दंड भुगतना पड़ेगा।
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पलवल। पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण सिंह दलाल ने कहा है कि किसान आंदोलन को लेकर धरने पर बैठे दूसरे राज्यों के किसानों को पुलिस ने झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर भगाया है। सरकार पर किसानों के आंदोलन की आड़ में लाल किले पर अपने ही लोगों से झंडा फहरवाकर किसानों को बदनाम करने का काम किया गया है। यह सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी। उन्होंने बृहस्पतिवार को यह बातें पत्रकार वार्ता में कहीं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि किसानों ने जिस तरह से लगातार 65 दिनों तक कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर बैठकर लड़ाई लड़ी है, वह लड़ाई बेकार नहीं जाएगी। पलवल की इस धरती पर आकर दूसरे राज्यों के किसानों ने जो आवाज किसानों के हक में उठाई थी, उसे दबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धरने पर बैठे किसानों को उन्होंने समझाने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस द्वारा कुछ गुंडा तत्वों से धमकी दिलवाने व झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर कोई सराहनीय काम नहीं किया गया है। पुलिस-प्रशासन यह न समझे कि किसान चुप बैठ जाएंगे। ये तो बाहर के किसान थे, जो डरकर चले गए हैं। अब इस आंदोलन को स्थानीय स्तर पर भी चलाया जाएगा। सरकार को इस कायरतापूर्ण रवैया अपनाने का दंड भुगतना पड़ेगा।
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