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Palwal News: राजस्थान से लाकर हरियाणा सीमा में जलाया जा रहा केमिकल युक्त कबाड़
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तावडू उपमंडल के भिवाड़ी से सटे गांवों में रात के अंधेरे में जलता है जहरीला कबाड़, प्रदूषण विभाग बेपरवाह
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। हरियाणा-राजस्थान सीमा पर केमिकल और रबर युक्त कबाड़ जलाने का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। नूंह जिले के तावडू उपमंडल के अंतर्गत राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से रबर कबाड़ और केमिकल युक्त ड्रम लाकर हरियाणा सीमा के गांवों में खुले में जलाए जा रहे हैं। इससे निकलने वाले जहरीले काले धुएं से स्थानीय लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और वातावरण प्रदूषित होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार करीब 10 गांवों के लगभग 20 हजार लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में सेवका, गुरनावट, रानयाकि, कांगरका खोरी कला, चिलावली, निजामपुर, मंडारका सहित भिवाड़ी से सटे गांव शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कबाड़ माफिया वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे लाइन के साथ लगती खाली जमीन को चिह्नित कर वहां रबर और केमिकल ड्रम जलाते हैं। कुछ स्थानीय लोग मोटे मुनाफे के लालच में अपनी जमीन भी किराए पर दे देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि दिन में तो प्रदूषण फैलता ही है, रात के समय कबाड़ जलाने से समस्या दोगुनी हो जाती है। इससे भारी बदबू और काले धुएं से पूरा इलाका घिर जाता है। भिवाड़ी-तावडू क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले ही खराब श्रेणी में पहुंच रहा है, ऐसे में यह अवैध गतिविधि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों ने नूंह जिला प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार फोटो, वीडियो और लोकेशन के साथ शिकायत देने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। यह समस्या नई नहीं है, पहले भी अरावली क्षेत्र और भिवाड़ी से सटे इलाकों में केमिकल युक्त ड्रम जलाने के मामले सामने आते रहे हैं। नूंह रोड पर स्थित दो औद्योगिक इकाइयों पर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है। मामला केवल मीडिया या सोशल मीडिया पर उठता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं होती।
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कोट
मामला संज्ञान में आया है। नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी और केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग के नियमों का पालन कराया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण विभाग को मामले की जांच के लिए पत्र लिखा जाएगा। - जितेंद्र कुमार गर्ग, एसडीएम
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संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। हरियाणा-राजस्थान सीमा पर केमिकल और रबर युक्त कबाड़ जलाने का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। नूंह जिले के तावडू उपमंडल के अंतर्गत राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से रबर कबाड़ और केमिकल युक्त ड्रम लाकर हरियाणा सीमा के गांवों में खुले में जलाए जा रहे हैं। इससे निकलने वाले जहरीले काले धुएं से स्थानीय लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और वातावरण प्रदूषित होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार करीब 10 गांवों के लगभग 20 हजार लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में सेवका, गुरनावट, रानयाकि, कांगरका खोरी कला, चिलावली, निजामपुर, मंडारका सहित भिवाड़ी से सटे गांव शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कबाड़ माफिया वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे लाइन के साथ लगती खाली जमीन को चिह्नित कर वहां रबर और केमिकल ड्रम जलाते हैं। कुछ स्थानीय लोग मोटे मुनाफे के लालच में अपनी जमीन भी किराए पर दे देते हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि दिन में तो प्रदूषण फैलता ही है, रात के समय कबाड़ जलाने से समस्या दोगुनी हो जाती है। इससे भारी बदबू और काले धुएं से पूरा इलाका घिर जाता है। भिवाड़ी-तावडू क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले ही खराब श्रेणी में पहुंच रहा है, ऐसे में यह अवैध गतिविधि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों ने नूंह जिला प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार फोटो, वीडियो और लोकेशन के साथ शिकायत देने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। यह समस्या नई नहीं है, पहले भी अरावली क्षेत्र और भिवाड़ी से सटे इलाकों में केमिकल युक्त ड्रम जलाने के मामले सामने आते रहे हैं। नूंह रोड पर स्थित दो औद्योगिक इकाइयों पर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है। मामला केवल मीडिया या सोशल मीडिया पर उठता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं होती।
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मामला संज्ञान में आया है। नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी और केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग के नियमों का पालन कराया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण विभाग को मामले की जांच के लिए पत्र लिखा जाएगा। - जितेंद्र कुमार गर्ग, एसडीएम