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भय के साये में पढ़ने को मजबूर हैं बाता सरकारी स्कूल के बच्चे
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पलवल। गांव बाता के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की इमारत जर्जर हो गई है, जो कभी भी गिर सकती है। बारिश में छत से पानी टपकता है। इमारत जर्जर होने की वजह से शिक्षक विद्यार्थियों को खुले में पढ़ाने को मजबूर हैं। स्कूल के मैदान की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। स्कूल में बड़ी-बड़ी झाड़ियां खड़ी हैं, जिसमें सांप-बिच्छू घूमते रहते हैं। शौचालय जाने वाले रास्ते पर भी झाड़ियां खड़ी है, जिससे बच्चों को वहां जाने में डर लगता है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल की अव्यवस्थाओं के बारे में कई बार हैडमास्टर से शिकायत की गई है, परंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
दरअसल, गांव बाता के सरकारी स्कूल को एक साल पहले ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिला है। इससे पहले यह उच्च विद्यालय था। स्कूल को अपग्रेड तो कर दिया गया, परंतु सुविधाओं में इजाफा नहीं किया गया। स्कूल में अभी तक प्रधानाचार्य की नियुक्ति भी नहीं की गई है। स्कूल में करीब 500 विद्यार्थी पढ़ते हैं। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से शिक्षक भी पर्याप्त नहीं हैं। स्कूल का भवन जर्जर अवस्था में है। बारिश में कमरों में पानी आता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
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मैदान में खड़ी हैं झाड़ियां
स्कूल के मैदान में बड़ी-बड़ी झाड़ियां खड़ी हैं। खेतों के समीप होने की वजह से झाड़ियों में सांप-बिच्छू घूमते रहते हैं। शौचालय जाने वाले रास्ते पर भी झाड़ियां है, जिससे विद्यार्थी शौचालय जाने से भी डरते हैं। स्कूल की चारदीवारी टूटी हुई है, जहां से ग्रामीण स्कूल के अंदर कूड़ा डालते हैं। स्कूल में आवारा पशु भी विचरण करते रहते हैं।
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गांव के सरकारी स्कूल में अव्यवस्थाएं बनी हुई है। इमारत काफी पुरानी हो गई है, जिससे बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है।
- चंदीराम, निवासी बाता
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सरकारी स्कूल की खामियों को देखते हुए बच्चों को स्कूल भेजने का मन नहीं करता। स्कूल में न तो अच्छी इमारत है और न ही सफाई। स्टाफ की भी कमी है। - राहुल, निवासी बाता
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यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं जल्द ही बाता स्कूल का निरीक्षण करूंगा। स्कूल की खामियों को दूर किया जाएगा। यदि भवन जर्जर है तो उसके निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा। - अशोक कुमार बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी
फोटो कैप्शन
14श्चड्डद्यश्च8- गांव बाता के सरकारी स्कूल के मैदान में खड़ी बड़ी-बड़ी झाड़ियां।
14श्चड्डद्यश्च9- स्कूल के कमरे की जर्जर हालत, जिसमें छत से बारिश का पानी आता है।
14श्चड्डद्यश्च10- खुले मैदान में पेड़ के नीचे पढ़ते बच्चे।
14श्चड्डद्यश्च11- चंदीराम, निवासी बाता
14श्चड्डद्यश्च12- राहुल, निवासी बाता
14श्चड्डद्यश्च13- अशोक कुमार बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी
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दरअसल, गांव बाता के सरकारी स्कूल को एक साल पहले ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दर्जा मिला है। इससे पहले यह उच्च विद्यालय था। स्कूल को अपग्रेड तो कर दिया गया, परंतु सुविधाओं में इजाफा नहीं किया गया। स्कूल में अभी तक प्रधानाचार्य की नियुक्ति भी नहीं की गई है। स्कूल में करीब 500 विद्यार्थी पढ़ते हैं। विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से शिक्षक भी पर्याप्त नहीं हैं। स्कूल का भवन जर्जर अवस्था में है। बारिश में कमरों में पानी आता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
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मैदान में खड़ी हैं झाड़ियां
स्कूल के मैदान में बड़ी-बड़ी झाड़ियां खड़ी हैं। खेतों के समीप होने की वजह से झाड़ियों में सांप-बिच्छू घूमते रहते हैं। शौचालय जाने वाले रास्ते पर भी झाड़ियां है, जिससे विद्यार्थी शौचालय जाने से भी डरते हैं। स्कूल की चारदीवारी टूटी हुई है, जहां से ग्रामीण स्कूल के अंदर कूड़ा डालते हैं। स्कूल में आवारा पशु भी विचरण करते रहते हैं।
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गांव के सरकारी स्कूल में अव्यवस्थाएं बनी हुई है। इमारत काफी पुरानी हो गई है, जिससे बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है।
- चंदीराम, निवासी बाता
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सरकारी स्कूल की खामियों को देखते हुए बच्चों को स्कूल भेजने का मन नहीं करता। स्कूल में न तो अच्छी इमारत है और न ही सफाई। स्टाफ की भी कमी है। - राहुल, निवासी बाता
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यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं जल्द ही बाता स्कूल का निरीक्षण करूंगा। स्कूल की खामियों को दूर किया जाएगा। यदि भवन जर्जर है तो उसके निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा। - अशोक कुमार बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी
फोटो कैप्शन
14श्चड्डद्यश्च8- गांव बाता के सरकारी स्कूल के मैदान में खड़ी बड़ी-बड़ी झाड़ियां।
14श्चड्डद्यश्च9- स्कूल के कमरे की जर्जर हालत, जिसमें छत से बारिश का पानी आता है।
14श्चड्डद्यश्च10- खुले मैदान में पेड़ के नीचे पढ़ते बच्चे।
14श्चड्डद्यश्च11- चंदीराम, निवासी बाता
14श्चड्डद्यश्च12- राहुल, निवासी बाता
14श्चड्डद्यश्च13- अशोक कुमार बघेल, जिला शिक्षा अधिकारी
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