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क्षमता से तीन गुना अधिक वजन लेकर दौड़ रहे ट्रकों से टूट रहीं सड़कें
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पलवल में केजीपी एक्सप्रेसवे पर टूटी सड़क
- फोटो : Palwal
पलवल। जिले की सड़कों पर क्षमता से अधिक भार लेकर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों के कारण मार्ग बनने से पहले ही टूट रहे हैं। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। पलवल जिले में देखें तो पिछले सात साल में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की सड़कें बनाने के दावे किए गए है, लेकिन सड़कों की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता है कि ये बनाई भी गई थी। क्षमता के मुकाबले 2.5 से तीन गुना अधिक भार लेकर दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों के कारण पलवल जिले की सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं। जिन सड़कों की नौ टन से लेकर 15 टन भार सहने की क्षमता है, उन पर 35 से 40 टन वजन भरकर वाहन चल रहे हैं। इस कारण ही सड़कें जल्दी उखड़ जाती हैं।
लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों की मानें तो उनके द्वारा बनाई जाने वाली सड़कों की क्षमता 15 टन भार सहने की है। इसके अलावा 9 तो कहीं 10 टन भार सहने की है क्षमता है। इसके अलावा सड़कों की क्षमता अधिक भी है, लेकिन सड़कों की भार सहने की क्षमता से अधिक वजन लेकर सड़कों पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। यही कारण है कि सड़कों को बनाने के समय जो उनकी समयावधि तय की जाती है, उस समय तक सड़के चलती ही नहीं हैं। बल्कि बनने के एक से दो महीने के अंदर तथा कहीं-कहीं 10 से 15 दिन में ही उखड़ने लगती हैं।
बनने के कुछ दिन बाद ही उखड़ी ये सड़कें
जिले में मुख्य राजमार्ग की सड़कों पर नजर दौड़ाई जाए तो दिल्ली-आगरा हाइवे पर बनाए गए पुलों के ऊपर की सड़कें बनने के मात्र 15 दिन बाद ही टूटने लगीं। इसके बाद कई बार उनकी मरम्मत की गई, लेकिन वे भी जल्द ही उखड़ जाती हैं। इसके अलावा पलवल-अलीगढ़ रोड का भी यही हाल है। यह सड़क भी 2014 से लेकर अब तक चार बार बनाई जा चुकी है, लेकिन अब तक 6 महीने से अधिक सड़क नहीं चली। इतना ही नहीं कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) और कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे जोकि सरकार द्वारा ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में पेश किए गए थे, उनकी सड़कों का भी यही हाल है। वे भी जब से बनी हैं, तब से लेकर अब तक कई बार उनकी मरम्मत हो चुकी है। फिर भी आज सड़कों की हालत ग्रामीण क्षेत्रों से भी ज्यादा खराब है।
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आरटीआई से मांगा जवाब
लोकनिर्माण विभाग द्वारा बनाई गई रसूलपुर से खेड़ला तक की सड़क बनने के 15 दिन बाद ही उखड़नी शुरू हो गई तो लोगों ने निर्माण सामग्री, लागत तथा ठेकेदार द्वारा सड़क की मोटाई के बारे में जानकारी लेने के लिए आरटीआई लगा दी। इसके अलावा सीएम विंडो पर भी शिकायत की जा चुकी है। इतना ही नहीं इसके अलावा पलवल-रसूलपुर होते हुए हसनपुर जाने वाले वाली सड़क, पलवल से हथीन, पलवल शहर में पुराने जीटी रोड पर हूडा चौक से लेकर आगरा चौक तक, पलवल से नूंह रोड, होडल से नूंह-पुन्हाना रोड सहित अधिकांश सड़कों की भी यही हालत है।
ये है ट्रकों की भार ले जाने की क्षमता
आरटीए विभाग की मानें तो 10 टायरा ट्रक 16.2 टन माल लेकर जा सकता है। 14 टायर वाला ट्रक 25.2 टन और 18 टायर वाला 34.2 टन, 22 टायर वाला 43.2 टन लोड नियम के मुताबिक भर सकता है। जबकि सड़कों पर जो 10 से 22 टायरा वाले ट्रक वजन लेकर दौड़ रहे हैं, वे अपनी क्षमता से 2.5 से से 3 गुना अधिक भार लेकर दौड़ रहे हैं। ऐसे ओवरलोड वाहनों पर न तो पुलिस कार्रवाई करती है और न ही खनन विभाग।
ओवरलोड वाहनों पर सरकार का ध्यान नहीं
ओवरलोड वाहनों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। लोकनिर्माण विभाग द्वारा जो सड़कें बनाई जाती हैं, उनके टूटने का कारण ओवरलोड वाहन ही हैं। कांग्रेस शासन में सड़क ों की की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है।
- करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री लोकनिर्माण विभाग हरियाणा
ओवरलोड वाहनों पर हो रही कार्रवाई
प्रदेश में पिछले तीन सालों में अवैध खनन करने वाले लोगों पर शिकंजा कसा गया है। साथ ही सड़कों पर ओवरलोड सामान लेकर दौड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हर दिन ओवरलोड वाहनों को खनन व पुलिस विभाग के अधिकारियों के अलावा आरटीए विभाग कार्रवाई कर जब्त करता है। - मूलचंद शर्मा, परिवहन मंत्री हरियाणा सरकार
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लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों की मानें तो उनके द्वारा बनाई जाने वाली सड़कों की क्षमता 15 टन भार सहने की है। इसके अलावा 9 तो कहीं 10 टन भार सहने की है क्षमता है। इसके अलावा सड़कों की क्षमता अधिक भी है, लेकिन सड़कों की भार सहने की क्षमता से अधिक वजन लेकर सड़कों पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। यही कारण है कि सड़कों को बनाने के समय जो उनकी समयावधि तय की जाती है, उस समय तक सड़के चलती ही नहीं हैं। बल्कि बनने के एक से दो महीने के अंदर तथा कहीं-कहीं 10 से 15 दिन में ही उखड़ने लगती हैं।
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बनने के कुछ दिन बाद ही उखड़ी ये सड़कें
जिले में मुख्य राजमार्ग की सड़कों पर नजर दौड़ाई जाए तो दिल्ली-आगरा हाइवे पर बनाए गए पुलों के ऊपर की सड़कें बनने के मात्र 15 दिन बाद ही टूटने लगीं। इसके बाद कई बार उनकी मरम्मत की गई, लेकिन वे भी जल्द ही उखड़ जाती हैं। इसके अलावा पलवल-अलीगढ़ रोड का भी यही हाल है। यह सड़क भी 2014 से लेकर अब तक चार बार बनाई जा चुकी है, लेकिन अब तक 6 महीने से अधिक सड़क नहीं चली। इतना ही नहीं कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) और कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे जोकि सरकार द्वारा ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में पेश किए गए थे, उनकी सड़कों का भी यही हाल है। वे भी जब से बनी हैं, तब से लेकर अब तक कई बार उनकी मरम्मत हो चुकी है। फिर भी आज सड़कों की हालत ग्रामीण क्षेत्रों से भी ज्यादा खराब है।
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आरटीआई से मांगा जवाब
लोकनिर्माण विभाग द्वारा बनाई गई रसूलपुर से खेड़ला तक की सड़क बनने के 15 दिन बाद ही उखड़नी शुरू हो गई तो लोगों ने निर्माण सामग्री, लागत तथा ठेकेदार द्वारा सड़क की मोटाई के बारे में जानकारी लेने के लिए आरटीआई लगा दी। इसके अलावा सीएम विंडो पर भी शिकायत की जा चुकी है। इतना ही नहीं इसके अलावा पलवल-रसूलपुर होते हुए हसनपुर जाने वाले वाली सड़क, पलवल से हथीन, पलवल शहर में पुराने जीटी रोड पर हूडा चौक से लेकर आगरा चौक तक, पलवल से नूंह रोड, होडल से नूंह-पुन्हाना रोड सहित अधिकांश सड़कों की भी यही हालत है।
ये है ट्रकों की भार ले जाने की क्षमता
आरटीए विभाग की मानें तो 10 टायरा ट्रक 16.2 टन माल लेकर जा सकता है। 14 टायर वाला ट्रक 25.2 टन और 18 टायर वाला 34.2 टन, 22 टायर वाला 43.2 टन लोड नियम के मुताबिक भर सकता है। जबकि सड़कों पर जो 10 से 22 टायरा वाले ट्रक वजन लेकर दौड़ रहे हैं, वे अपनी क्षमता से 2.5 से से 3 गुना अधिक भार लेकर दौड़ रहे हैं। ऐसे ओवरलोड वाहनों पर न तो पुलिस कार्रवाई करती है और न ही खनन विभाग।
ओवरलोड वाहनों पर सरकार का ध्यान नहीं
ओवरलोड वाहनों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। लोकनिर्माण विभाग द्वारा जो सड़कें बनाई जाती हैं, उनके टूटने का कारण ओवरलोड वाहन ही हैं। कांग्रेस शासन में सड़क ों की की गुणवत्ता की भी जांच कराई जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है।
- करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री लोकनिर्माण विभाग हरियाणा
ओवरलोड वाहनों पर हो रही कार्रवाई
प्रदेश में पिछले तीन सालों में अवैध खनन करने वाले लोगों पर शिकंजा कसा गया है। साथ ही सड़कों पर ओवरलोड सामान लेकर दौड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हर दिन ओवरलोड वाहनों को खनन व पुलिस विभाग के अधिकारियों के अलावा आरटीए विभाग कार्रवाई कर जब्त करता है। - मूलचंद शर्मा, परिवहन मंत्री हरियाणा सरकार