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कृषि कानून वापिस होना किसानों के संघर्ष की जीत है: भूपेंद्र हुड्डा
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पलवल। पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि कृषि कानून वापस होना किसानों के संघर्ष की जीत है। किसानों का ही संघर्ष था, जिसने मोदी सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया। उन्होंने किसानों को इस जीत के लिए बधाई दी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा शुक्रवार को यहां अटोहां मोड़ पर चल रहे किसानों के धरने में पहुंचे थे। उन्होंने वहां पहुंचने पर पहले किसानों किसानों का हाल-चाल जाना और उनसे बात की। किसानों ने इस खुशी में धरना स्थल पर जलेबी बनवाई, वहां उपस्थित पुलिस कर्मियों तथा गाड़ियों को रुकवाकर भी जलेबी, बताशे और लड्डू भी बांटे गए।
उन्होंने तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के फैसले का स्वागत किया। उनके साथ पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, होडल के पूर्व विधायक उदयभान, कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ चुके इजराइल खान भी थे। धरने की अध्यक्षता किसान मट्टर सिंह ने की। संचालन किसान नेता रूपराम तेवतिया व महेंद्र चौहान ने किया। किसानों के धरने को संबोधित करते हुए हुड्डा ने कहा कि यह किसानों के लंबे संघर्ष और सत्याग्रह की जीत है। सरकार को अब किसान के बाकी बचे अन्य मुद्दों पर भी बातचीत करनी चाहिए। साथ ही उसे कृषि को लाभकारी बनाने की योजनाएं बनानी चाहिए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस विधायक दल की तरफ से शहीद किसानों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है और बार-बार सरकार से भी उनकी मदद के लिए अपील की है।
पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने कहा कि कृषि कानून वापस लेने का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार इस फैसले को पहले ही ले लेती तो अब तक वे किसान जिंदा होते, जो कृषि आंदोलन के चलते शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत संसद सत्र बुलाकर कानूनों को संसद में रद्द करना चाहिए तथा एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए। शहीद हुए किसानों के परिजनों को भी नौकरियां देनी चाहिए। पलवल में दर्ज किसानों पर मुकदमे भी तुरंत वापिस होने चाहिए। इस अवसर पर एसके शर्मा, युवा कांग्रेस अध्यक्ष निखिल भारद्वाज, किसान नेता सोहन पाल, धर्मचंद, राज कुमार ओलिहान, डॉ. रघुवीर आदि मौजूद थे।
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संसद में कानून पास होने तक नहीं हटेंगे धरना
धरना स्थल पर बैठे किसानों का कहना है कि जब तक सरकार संसद में इन कानूनों को रद्द कर एमएसपी का कानून नहीं बनाएगी तथा बिजली संशोधन बिल को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों का धरना अभी खत्म नहीं होगा। किसान नेताओं ने जिले के किसानों से अपील की कि वे संसद में कानून रद्द न होने तक धरना स्थल पर पहुंचे।
पूर्व मंत्री बिरेंद्र सिंह व पूर्व सांसद अवतार भड़ाना भी पहुंचे धरना स्थल पर
कृषि कानूनों की वापिस की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह तथा पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना भी पलवल धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत किया तथा कहा कि यह किसान, मजदूर की एकता की जीत है। लंबे चले किसानों के इस संघर्ष ने दिखा दिया है कि देश का किसान गलत नीतियों के आगे झुकने वाला नहीं है।
हुड्डा की सूचना मिलने पर तैनात किया भारी पुलिस बल
कृषि कानूनों की घोषणा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन ने भारी पुलिस बल धरना स्थल पर तैनात कर दिया। पुलिस बल ने धरना स्थल को चारों तरफ से घेरा हुआ था। भूपेंद्र हुड्डा के धरना स्थल से जाने के बाद ही पुलिस कर्मी वापस लौटे।
पलवल में आंदोलन के दौरान यह रहीं प्रमुख घटनाएं
पलवल में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरना के एक साल के दौरान पलवल में दो बार रेलवे ट्रैक जाम किया गया। इसके अलावा दिल्ली-आगरा राजमार्ग छह माह तक पूरी तरह से जाम रहा। केजीपी व केएमपी भी कई बार जाम किया गया। एक महीने तक पलवल दिल्ली-आगरा राजमार्ग व केजीपी-केएमपी पर टोल बैरियर बंद किए गए। पलवल में दो बार ट्रैक्टर रैली निकाली गई। दो बार सैकड़ों किसानों पर राजमार्ग जाम करने के आरोप में मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।
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उन्होंने तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के फैसले का स्वागत किया। उनके साथ पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, होडल के पूर्व विधायक उदयभान, कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ चुके इजराइल खान भी थे। धरने की अध्यक्षता किसान मट्टर सिंह ने की। संचालन किसान नेता रूपराम तेवतिया व महेंद्र चौहान ने किया। किसानों के धरने को संबोधित करते हुए हुड्डा ने कहा कि यह किसानों के लंबे संघर्ष और सत्याग्रह की जीत है। सरकार को अब किसान के बाकी बचे अन्य मुद्दों पर भी बातचीत करनी चाहिए। साथ ही उसे कृषि को लाभकारी बनाने की योजनाएं बनानी चाहिए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस विधायक दल की तरफ से शहीद किसानों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है और बार-बार सरकार से भी उनकी मदद के लिए अपील की है।
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पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने कहा कि कृषि कानून वापस लेने का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार इस फैसले को पहले ही ले लेती तो अब तक वे किसान जिंदा होते, जो कृषि आंदोलन के चलते शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत संसद सत्र बुलाकर कानूनों को संसद में रद्द करना चाहिए तथा एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए। शहीद हुए किसानों के परिजनों को भी नौकरियां देनी चाहिए। पलवल में दर्ज किसानों पर मुकदमे भी तुरंत वापिस होने चाहिए। इस अवसर पर एसके शर्मा, युवा कांग्रेस अध्यक्ष निखिल भारद्वाज, किसान नेता सोहन पाल, धर्मचंद, राज कुमार ओलिहान, डॉ. रघुवीर आदि मौजूद थे।
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संसद में कानून पास होने तक नहीं हटेंगे धरना
धरना स्थल पर बैठे किसानों का कहना है कि जब तक सरकार संसद में इन कानूनों को रद्द कर एमएसपी का कानून नहीं बनाएगी तथा बिजली संशोधन बिल को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों का धरना अभी खत्म नहीं होगा। किसान नेताओं ने जिले के किसानों से अपील की कि वे संसद में कानून रद्द न होने तक धरना स्थल पर पहुंचे।
पूर्व मंत्री बिरेंद्र सिंह व पूर्व सांसद अवतार भड़ाना भी पहुंचे धरना स्थल पर
कृषि कानूनों की वापिस की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह तथा पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना भी पलवल धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत किया तथा कहा कि यह किसान, मजदूर की एकता की जीत है। लंबे चले किसानों के इस संघर्ष ने दिखा दिया है कि देश का किसान गलत नीतियों के आगे झुकने वाला नहीं है।
हुड्डा की सूचना मिलने पर तैनात किया भारी पुलिस बल
कृषि कानूनों की घोषणा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन ने भारी पुलिस बल धरना स्थल पर तैनात कर दिया। पुलिस बल ने धरना स्थल को चारों तरफ से घेरा हुआ था। भूपेंद्र हुड्डा के धरना स्थल से जाने के बाद ही पुलिस कर्मी वापस लौटे।
पलवल में आंदोलन के दौरान यह रहीं प्रमुख घटनाएं
पलवल में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरना के एक साल के दौरान पलवल में दो बार रेलवे ट्रैक जाम किया गया। इसके अलावा दिल्ली-आगरा राजमार्ग छह माह तक पूरी तरह से जाम रहा। केजीपी व केएमपी भी कई बार जाम किया गया। एक महीने तक पलवल दिल्ली-आगरा राजमार्ग व केजीपी-केएमपी पर टोल बैरियर बंद किए गए। पलवल में दो बार ट्रैक्टर रैली निकाली गई। दो बार सैकड़ों किसानों पर राजमार्ग जाम करने के आरोप में मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।