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विरोध: अरावली पहाड़ियों में बन रही जंगल सफारी ने बढ़ाई पशुपालकों की चिंता

Tue, 18 Jul 2023 11:32 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल Updated Tue, 18 Jul 2023 11:32 PM IST
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Protest: Jungle safari being built in Aravalli hills increased the concern of cattle herders
मोहम्मद शाहिद मेवाती
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तावडू। नूंह और गुरुग्राम सीमा में बनाई जा रही विश्व की सबसे बड़ी जंगल सफारी ने अब स्थानीय पशुपालकों की भी चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले जंगल सफारी निर्माण को कुछ पर्यावरण चिंतकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब स्थानीय पशुपालक भी सफारी पार्क बनाने के विरोध में आ गए हैं। इनका डर है कि जंगल सफारी बनने से उनके पशुओं के लिए अरावली पहाड़ियों का रास्ता बंद हो जाएगा। तब पशुओं के लिए चारे का संकट गहराएगा, जो उनकी रोजी-रोटी में सीधा चोट होगी। अरावली से सटे ग्रामीणों का कहना है कि जंगल सफारी पार्क का निर्माण करना प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ है।

स्थानीय पशुपालकों ने सरकार से अरावली पहाड़ियों को यथास्थिति में ही रखने की गुहार लगाई है। मामले में वन व पर्यटन विभाग के बड़े अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। बता दें कि यह जंगल सफारी दस हजार एकड़ में अरावली पहाड़ियों में बनने जा रही है। इसमें छह हजार गुरुग्राम और चार हजार एकड़ भूमि नूंह में चिह्नित की गई है। सरकार के दावे के मुताबिक इस जंगल सफारी में स्तनधारी, जमीन पर चलने वाले, रेंगने वाले, उड़ने वाले, पानी में रहने वाले जीव जंतु और पशु पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए अलग-अलग 10 जोन बनेंगे। सरकार का यह भी दावा है कि जंगल सफारी बनने से इलाके की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, लेकिन एक तरफ विरोध भी है। पहले पर्यावरणविद आए, जिन्होंने सफारी पार्क निर्माण के विरोध में दो बार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी तो एक बार हरियाणा सरकार को पत्र भी लिख चुके हैं। अब स्थानीय पशुपालकों ने भी विश्व की सबसे बड़ी जंगल सफारी का विरोध कर दिया है।
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वहीं, मंगलवार को जिले में पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी मूल सवाल का जवाब देने की बजाय कहा कि जंगल सफारी से संबंधित सभी प्रकार की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विश्व की सबसे बड़ी जंगल सफारी के शिलान्यास के लिए समय मांगा है।
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विरोध का मुख्य कारण यह है कि पार्क की बाउंडरी वाल निर्माण से उनके पशुओं का इसमें जाना बंद हो जाएगा। स्थानीय लोगों का एकमात्र रोजगार पशुपालन है, जिससे यह छिन जाएगा। सरकार से मांग है कि इन अरावली पहाड़ियों को यथास्थिति में ही रहने दिया जाए।



- नसरू, स्थानीय पशुपालक





अरावली पहाड़ियों के साथ सटे गांव के लोग बड़े स्तर पर पशुपालन से जुड़े है। इसमें भैंस, बकरी, गाय आदि शामिल है। अरावली क्षेत्र में इनके लिए चारे की अच्छी व्यवस्था है। पार्क बनाने से पशुओं के लिए चारे का संकट गहरा जाएगा, उनका रोजगार भी बंद हो जाएगा। - पशुपालक ताहिर



अरावली पहाड़ियों के साथ लगे गांव के पशुपालक दूध के कारोबार से भी जुड़े हैं। जो भारी मात्रा में एनसीआर क्षेत्र के दूध आपूर्ति करते हैं।पशुओं के लिए चारे का संकट होगा तो पशुओं में दूध उत्पादन क्षमता भी घटेगी। इससे एनसीआर क्षेत्र में भी दूध की आपूर्ति प्रभावित होगी।


- इसुफ, युवा पशुपालक





पहले तो हरियाणा सरकार के जंगल सफारी परियोजना की ड्राफ्टिंग पर ही शक है। इसका मापदंड क्या है? जंगल सफारी पार्क निर्माण होने से अकेले नूंह सीमा के करीब दस हजार से अधिक पशु और पांच हजार परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। सरकार को इनके हितों पर ध्यान देना होगा। - खालिद चाहल्का, युवा कांग्रेस नेता
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