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शहर की एक संस्था लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करा दिला रहे मुक्ति
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पलवल। एक तरफ जहां लोग सड़क पर किसी हादसे में घायल जिंदा व्यक्ति को हाथ नहीं लगाते, वहीं पलवल जिले में एक ऐसी संस्था है, जो परिवार से बिछड़कर सड़क, रेल हादसों व अन्य कारणों से अपनी जान गवां कर लावारिश हालत में पड़े शवों का वैदिक विधि विधान से अंतिम संस्कार करवाकर उन्हें मुक्ति दिलाने का काम करती है। करुणामयी सोसायटी संस्था पिछले एक साल में अब तक 100 लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करा चुकी है। 4 लोगों से शुरू हुई इस संस्था में अब 15 सदस्य जुुड़ चुके हैं, जो पुलिस व प्रशासन द्वारा लावारिश शव की सूचना देते ही उनका रसूलपुर रोड स्थित स्वर्गाश्रम में ले जाकर अंतिम संस्कार कराते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस संस्था से जुड़े लोग इस कार्य के लिए किसी से एक रुपया भी दान नहीं लेते हैं, बल्कि अपनी कमाई से ही अंतिम संस्कार में आने वाले खर्च का वहन करते हैं। इतना ही नहीं अंतिम संस्कार के बाद जो रीति रिवाज हैं, उसे पूरा करते हैं तथा 10 या अधिक शवों के फूल एकत्रित होने पर रीति रिवाज से उनका हरिद्वार जाकर गंगा में विसर्जन करते हैं।
तीन साथियों संग मिल बनाई संस्था
लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करने का यह नेक कार्य 10 अगस्त 2018 को शुरू किया गया था। इस कार्य की शुरूआत शहर के वरिष्ठ समाजसेवी व रक्तदाता मनोज छाबड़ा ने की। उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त मनीराम शर्मा व पुलिस कप्तान सुलोचना गजराज से मिलकर अपनी इस मंशा को उनके आगें जाहिर किया। दोनों अधिकारियों ने उनकी सोच की सराहना की तथा इसके लिए एक नोटिस निकलवा दिया कि लावारिश शव मिलने पर मनोज छाबड़ा से संपर्क किया जाए। प्रशासन व पुलिस की अनुमति मिलते ही मनोज छाबड़ा ने अपने तीन अन्य साथियों रवि तेवतिया, विनीत गुलाटी व धर्मवीर से इस संदर्भ में बात की तथा उसी समय करुणामयी सोसायटी के नाम से संस्था का गठन कर दिया।
मेरे मन में पिछले कई वर्षों से यह बात थी कि लावारिश शवों को मुक्ति मिलनी चाहिए। जो काम उनके परिजनों को करना चाहिए था, वे जानकारी न मिलने पर नहीं कर पाए, तो अब उन्हें इस कार्य को करना चाहिए। उनकी इसी सोच ने उन्हें इस कार्य को अंजाम देने के लिए तैयार कर दिया। वे बताते हैं कि उन्हें इस कार्य से बेहद आत्म संतुष्टी मिलती है।- मनोज छाबड़ा संस्था अध्यक्ष
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सोसायटी से जुड़े विनीत गुलाटी का कहना है कि इस पुनीत कार्य के लिए वे किसी से एक रुपया भी दान नहीं लेते हैं। जो भी काम होता है अपनी नेक कमाई से करते हैं। उनका कहना है कि और भी लोग अब उनसे जुड़ रहे हैं। विनीत गुलाटी, संस्थ सदस्य
सोसायटी से जुड़े रवि तेवतिया का कहना है कि मनोज छाबड़ा ने जब उन्हें इस बात की चर्चा की तो वे तुरंत तैयार हो गए। समाजसेवा के कार्य तो लोग बहुत करते हैं, लेकिन लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर उन्हें मुक्ति दिलाना एक बड़ा ही पुण्य का काम है। उन्हें बहुत संतुष्टी मिलती है कि किसी को वे पूरे रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कर मुक्ति दिला रहे हैं।
सोसायटी से जूड़े धर्मपाल का कहना है कि मनोज छाबड़ा के साथ मिलकर इस पुनीत कार्य में जुटे हैं। आज उनके साथ शहर के अन्य लोग भी जुड़ चुके हैं। लावारिश शव की सूचना मिलते ही सभी सदस्य स्वर्गाश्रम में पहुंच जाते हैं तथा अपनी नेक कमाई से पैसा एकत्रित कर उनका अंतिम संस्कार कराते हैं।
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तीन साथियों संग मिल बनाई संस्था
लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करने का यह नेक कार्य 10 अगस्त 2018 को शुरू किया गया था। इस कार्य की शुरूआत शहर के वरिष्ठ समाजसेवी व रक्तदाता मनोज छाबड़ा ने की। उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त मनीराम शर्मा व पुलिस कप्तान सुलोचना गजराज से मिलकर अपनी इस मंशा को उनके आगें जाहिर किया। दोनों अधिकारियों ने उनकी सोच की सराहना की तथा इसके लिए एक नोटिस निकलवा दिया कि लावारिश शव मिलने पर मनोज छाबड़ा से संपर्क किया जाए। प्रशासन व पुलिस की अनुमति मिलते ही मनोज छाबड़ा ने अपने तीन अन्य साथियों रवि तेवतिया, विनीत गुलाटी व धर्मवीर से इस संदर्भ में बात की तथा उसी समय करुणामयी सोसायटी के नाम से संस्था का गठन कर दिया।
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मेरे मन में पिछले कई वर्षों से यह बात थी कि लावारिश शवों को मुक्ति मिलनी चाहिए। जो काम उनके परिजनों को करना चाहिए था, वे जानकारी न मिलने पर नहीं कर पाए, तो अब उन्हें इस कार्य को करना चाहिए। उनकी इसी सोच ने उन्हें इस कार्य को अंजाम देने के लिए तैयार कर दिया। वे बताते हैं कि उन्हें इस कार्य से बेहद आत्म संतुष्टी मिलती है।- मनोज छाबड़ा संस्था अध्यक्ष
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सोसायटी से जुड़े विनीत गुलाटी का कहना है कि इस पुनीत कार्य के लिए वे किसी से एक रुपया भी दान नहीं लेते हैं। जो भी काम होता है अपनी नेक कमाई से करते हैं। उनका कहना है कि और भी लोग अब उनसे जुड़ रहे हैं। विनीत गुलाटी, संस्थ सदस्य
सोसायटी से जुड़े रवि तेवतिया का कहना है कि मनोज छाबड़ा ने जब उन्हें इस बात की चर्चा की तो वे तुरंत तैयार हो गए। समाजसेवा के कार्य तो लोग बहुत करते हैं, लेकिन लावारिश शवों का अंतिम संस्कार कर उन्हें मुक्ति दिलाना एक बड़ा ही पुण्य का काम है। उन्हें बहुत संतुष्टी मिलती है कि किसी को वे पूरे रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कर मुक्ति दिला रहे हैं।
सोसायटी से जूड़े धर्मपाल का कहना है कि मनोज छाबड़ा के साथ मिलकर इस पुनीत कार्य में जुटे हैं। आज उनके साथ शहर के अन्य लोग भी जुड़ चुके हैं। लावारिश शव की सूचना मिलते ही सभी सदस्य स्वर्गाश्रम में पहुंच जाते हैं तथा अपनी नेक कमाई से पैसा एकत्रित कर उनका अंतिम संस्कार कराते हैं।