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एक दिन में सिर्फ 200 किसान ही देंगे धरना
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पलवल। गेहूं कटाई को देखते हुए किसानों ने धरने के लिए नई रूपरेखा तैयार की है। अब धरना स्थल पर एक दिन में सिर्फ 200 किसान मौजूद रहेंगे। बाकी किसान अपने खेतों में फसल पर ध्यान देंगे। आंदोलन के साथ-साथ खेती भी जरूरी है। शनिवार को धरने के दौरान किसान नेताओं ने सभी से यह अपील की। उन्होंने कहा कि कानून वापसी तक यह धरना जारी रहेगा।
केएमपी-केजीपी पर धरने के 20वें दिन राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि किसान आंदोलन में मरने वाले किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सरकार को राष्ट्रहित में किसानों की मांगो को मानना ही होगा, क्योंकि लोकशक्ति लोकतंत्र में सर्वोपरि होती है। अब ये आंदोलन जन आंदोलन बन चुका है। किसान, मजदूर, व्यापारी व कर्मचारी पूरी तरह से केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन है, अगर सरकार में थोड़ी बहुत भी नैतिकता है तो वह किसानों का सम्मान करे और उन्हें आंदोलनजीवी या परजीवी कहकर अपमानित न करे।
मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति का आंदोलन नही है। वर्तमान सरकार महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नौकरशाही पर रोक लगाने में विफल है। पेट्रोल व डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। इस मौके पर राजकुमार ओहलियान, धर्मचंद घुघेरा, सोहनपाल चौहान, ऋषिपाल चौहान आदि मौजूद रहे।
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तेवतिया पाल ने बुना खाट
धरना स्थल पर लगे तंबुओं में अब किसान जमीन की जगह खाटों पर सोने की तैयारी में हैं। तेवतिया पाल की तरफ से शनिवार को इसकी शुरुआत की गई है। पाल की तरफ से खाट बुनना शुरू कर दिया गया। किसानों ने बताया कि पिछले करीब तीन माह से वे धरना स्थल पर जमीन पर सो रहे है, लेकिन अब आंदोलन लंबा चलने की उम्मीद है, इसलिए खाट लानी शुरू कर दी है।
चौपाई प्रतियोगिता के लिए दिया निमंत्रण
किसान आंदोलन को मजबूती देने के लिए आयोजित की जाने वाली चौपाई प्रतियोगिता को लेकर निमंत्रण देना शुरू कर दिया गया। 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार ने बताया कि पाल व गांवों के हिसाब से चौपाई पार्टियों को आमंत्रित किया जा रहा है। चौबीसी के गांव बंचारी की नगाड़ी पार्टी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। बंचारी की नगाड़ा पार्टी विशेष रूप से चौपाई प्रतियोगिता के दौरान अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी।
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केएमपी-केजीपी पर धरने के 20वें दिन राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि किसान आंदोलन में मरने वाले किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सरकार को राष्ट्रहित में किसानों की मांगो को मानना ही होगा, क्योंकि लोकशक्ति लोकतंत्र में सर्वोपरि होती है। अब ये आंदोलन जन आंदोलन बन चुका है। किसान, मजदूर, व्यापारी व कर्मचारी पूरी तरह से केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन है, अगर सरकार में थोड़ी बहुत भी नैतिकता है तो वह किसानों का सम्मान करे और उन्हें आंदोलनजीवी या परजीवी कहकर अपमानित न करे।
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मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति का आंदोलन नही है। वर्तमान सरकार महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नौकरशाही पर रोक लगाने में विफल है। पेट्रोल व डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। इस मौके पर राजकुमार ओहलियान, धर्मचंद घुघेरा, सोहनपाल चौहान, ऋषिपाल चौहान आदि मौजूद रहे।
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तेवतिया पाल ने बुना खाट
धरना स्थल पर लगे तंबुओं में अब किसान जमीन की जगह खाटों पर सोने की तैयारी में हैं। तेवतिया पाल की तरफ से शनिवार को इसकी शुरुआत की गई है। पाल की तरफ से खाट बुनना शुरू कर दिया गया। किसानों ने बताया कि पिछले करीब तीन माह से वे धरना स्थल पर जमीन पर सो रहे है, लेकिन अब आंदोलन लंबा चलने की उम्मीद है, इसलिए खाट लानी शुरू कर दी है।
चौपाई प्रतियोगिता के लिए दिया निमंत्रण
किसान आंदोलन को मजबूती देने के लिए आयोजित की जाने वाली चौपाई प्रतियोगिता को लेकर निमंत्रण देना शुरू कर दिया गया। 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार ने बताया कि पाल व गांवों के हिसाब से चौपाई पार्टियों को आमंत्रित किया जा रहा है। चौबीसी के गांव बंचारी की नगाड़ी पार्टी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। बंचारी की नगाड़ा पार्टी विशेष रूप से चौपाई प्रतियोगिता के दौरान अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी।