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अब कै आर-पार की कर देंगे, सुनलै सरकार हमारी

Sun, 14 Mar 2021 11:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 11:18 PM IST
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Now we will cross the border, Sunale Sarkar is our
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे धरने में रविवार को गांव स्यारौली की चौपाई पार्टी ने किसान आंदोलन का पूरा इतिहास सुनाया। उन्होंने गीतों के माध्यम से सरकार पर जमकर कटाक्ष किए। मेधीराम सरंपच की पार्टी ने ‘अब कै आर-पार की कर देंगे, सुनलै सरकार हमारी’ गीत के जरिये जमकर वाहवाही लूटी। इस अवसर पर तुक के जरिये किसानों को मनोरंजन किया। वहीं किसानों ने गांव वजादा पहाड़ी व गहलब में सभाएं आयोजित कर लोगों को कृषि कानूनों के खिलाफ जागरूक किया।
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स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि किसान ज्यादा से ज्यादा संख्या में किसान आंदोलन से जुड़े। सत्ता के दलालों का सामाजिक बहिष्कार करें व वोट की राजनीति करने वालों को गांवों में घुसने न दें। किसानों की एकता को देखकर प्रदेश का मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री व अन्य नेता भय के साए में हैं। कोई भी नेता प्रदेश में सभा करने से डर रहा है। आने वाले समय में वोट की चोट से सरकार से किसानों के अपमान का बदला लेना है। महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन खेती बचाने के साथ-साथ देश बचाने का आंदोलन है। वर्तमान सरकार तेजी से देश को बेचने में लगी है। सभी सरकारी विभागों का निजीकरण किया जा रहा है। सरकार रोजगार के अवसर खत्म करती जा रही है। तेजी से बेरोजगारी बढ़ रही है। रोजगार न मिलने पर युवा भटक रहे हैं। अपराध बढ़ता जा रहा है। मुसीबत के समय में देश का पेट भरने वाला किसान सड़कों पर संघर्ष कर रहा है तथा सरकार संवेदनहीनता का परिचय दे रही है। धरने की अध्यक्षता चौधरी रूपचंद दलाल जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। इस मौके पर राजकुमार ओलिहान, धर्मचंद, रतन सिंह, हरप्रसाद चौहान, अच्छेलाल आदि मौजूद रहे।
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सभाएं कर कृषि कानूनों के खिलाफ किया जागरूक
किसान आंदोलन को मजबूती देने के लिए रविवार को गांव गहलब व वजादा पहाड़ी में सभाएं आयोजित की गईं। गांव गहलब में बिजेंद्र सरपंच, अतर मैंबर, रतन, ओमी, छज्जन व गांव वजादा पहाड़ी में धर्मबीर व नंदराम सरपंच ने संयोजन किया। इस अवसर पर किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद आदि ने किसानों से 23 मार्च को शहीदी दिवस व 26 मार्च को भारत बंद में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने का आह्वान किया।
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गर्मी से बचने से बनाई जा रही झोपड़ियां
मौसम बदलने के साथ किसानों ने तैयारियां शुरू कर दी है। गर्मी से बचने के लिए तंबुओं के स्थान पर झोपड़ियां बनानी शुरू कर दी हैं। किसानों का कहना है कि झोपड़ी में गर्मी से काफी बचाव होता है। वहीं इसमें लू भी नहीं लगती है।
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