फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   Medicinal plants save over forest

खत्म हो रहे औषधीय पौधों को बचा रहा वन विभाग

Sun, 24 Apr 2016 04:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल
ब्यूरो/अमर उजाला, पलवल Updated Sun, 24 Apr 2016 04:41 PM IST
विज्ञापन
Medicinal plants save over forest
पाौधाराोपण - फोटो : file photo

वन विभाग विलुप्त होते औषधीय पौधों को बचाने में लगा है। विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने पलवल की नर्सरी में विलुप्त हो रही आयुर्वेदिक औषधि पसैन्दु की प्रजाति को खत्म होने से रोकने के लिए इसके पौधे तैयार किए हैं। नर्सरी में इनकी 550 पौध तैयार की जा चुकी हैं, जिन्हें शीघ्र ही विभिन्न स्थानों पर भिजवाकर रोपा जाएगा।

विज्ञापन


जैसे-जैसे हम आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे ही हम प्रकृति की कुछ चीजों को मिटा रहे हैं, जोकि हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। पलवल की नर्सरी में पसैन्दु नामक एक ऐसे पौधे की पौध तैयार की जा रही है, जिसको कुछ समय पहले मिटा चुके हैं और जिसका नाम तक शायद लोगों ने नहीं सुना होगा।
विज्ञापन


इस पौधे के बारे में जिला वन अधिकारी किरण सिंह रावत ने बताया कि पसैन्दु लुप्त होती हुई प्रजाति है। कुछ समय पहले तो ये पौधे तालाबों, नहरों, जंगलों में देखने को मिल भी जाते थे, लेकिन आज के समय में इनका मिलना लगभग असंभव सा हो गया है। इस पौधे को लुप्त होने से बचाने के लिए ही नर्सरी ने इस पौधे का बीज तैयार करके इसकी पौध तैयार की है, ताकि इस तरह के औषधीय पौधे लुप्त न हो सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन


वन विभाग का कहना है कि पसैन्दु नामक इस पौधे की पौध केवल पलवल नर्सरी ने ही तैयार की है, किसी ओर जिले की नर्सरी में यह पौध नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि हमारी नर्सरी में इसका एक बड़ा पौधा था, जिससे बीज तैयार करके इसकी पौध बनाई गई है। इस पौधे को 8 से 10 फुट तक बढ़ने में 5 से 6 साल लग जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed