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मांगों को लेकर नौ अगस्त को उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे मजदूर-किसान
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पलवल। सीटू व किसान सभा के तत्वावधान में सोमवार को बैठक का आयोजन किया गया। इसमें आगामी नौ अगस्त को जिला उपायुक्त कार्यालय पर मजदूर-किसानों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा की गई। प्रदर्शन की तैयारी में गांवों में 30 जुलाई से सात अगस्त तक टीमें आम मजदूरों-किसानों से जनसंपर्क करेंगी। सीटू जिला प्रधान श्रीपाल सिंह भाटी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक संचालन किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने किया।
बैठक में सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान ने कहा कि भाजपा सरकार घमंड में चूर है। सरकार पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बन गई है। देश का किसान आठ महीने से सड़कों पर बैठा है। तीन कानूनों को वापस लेने की बजाय भाजपा सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करने के हथकंडे अपना रही है। किसानों की सरकार सुन नहीं रही। सरकार ने चार लेबर कानून पारित करके करोड़ों मजदूरों को मालिकों के रहमों करम पर छोड़ दिया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कोरोना की दोनों लहरों ने देश में लाखों लोगों की जिंदगी को छीन लिया।
भागीरथ बेनीवाल ने कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों और चारों लेबर कोड्स को रद्द करे, सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये दिहाड़ी मिले। सभी जरूरतमंद परिवारों को फ्री राशन व 7500 रुपये महीने नकद दिए जाए। सरकार सरकारी विभागों को बेचना बंद करे व स्थाई भर्ती की जाए। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य प्रमुख मुद्दा है जिसे लेकर जनता में भारी संकट है, लेकिन सरकार इसके लिए कोई कदम नहीं उठा रही। न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये हो और सभी कच्चे व ठेका कर्मचारी पक्के हों। महंगाई वापस हो।
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इन मुद्दों को लेकर 30 जुलाई से जत्था चलेगा, जो गांवों में मजदूर-किसानों के बीच जाएंगे। नौ अगस्त को जिला उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक को सोहनपाल, दरियाब सिंह, उर्मिला रावत, आशा देवी, कृष्णा, ज्ञानेंद्र, बबली, राजबाला, राजेंद्र सरपंच, जोगेंद्र ने संबोधित किया।
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बैठक में सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान ने कहा कि भाजपा सरकार घमंड में चूर है। सरकार पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बन गई है। देश का किसान आठ महीने से सड़कों पर बैठा है। तीन कानूनों को वापस लेने की बजाय भाजपा सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करने के हथकंडे अपना रही है। किसानों की सरकार सुन नहीं रही। सरकार ने चार लेबर कानून पारित करके करोड़ों मजदूरों को मालिकों के रहमों करम पर छोड़ दिया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कोरोना की दोनों लहरों ने देश में लाखों लोगों की जिंदगी को छीन लिया।
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भागीरथ बेनीवाल ने कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों और चारों लेबर कोड्स को रद्द करे, सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये दिहाड़ी मिले। सभी जरूरतमंद परिवारों को फ्री राशन व 7500 रुपये महीने नकद दिए जाए। सरकार सरकारी विभागों को बेचना बंद करे व स्थाई भर्ती की जाए। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य प्रमुख मुद्दा है जिसे लेकर जनता में भारी संकट है, लेकिन सरकार इसके लिए कोई कदम नहीं उठा रही। न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये हो और सभी कच्चे व ठेका कर्मचारी पक्के हों। महंगाई वापस हो।
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इन मुद्दों को लेकर 30 जुलाई से जत्था चलेगा, जो गांवों में मजदूर-किसानों के बीच जाएंगे। नौ अगस्त को जिला उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक को सोहनपाल, दरियाब सिंह, उर्मिला रावत, आशा देवी, कृष्णा, ज्ञानेंद्र, बबली, राजबाला, राजेंद्र सरपंच, जोगेंद्र ने संबोधित किया।