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करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की
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पलवल। कृषि कानूनों को वापिस कराने की मांग को लेकर 9 महीने से आंदोलन कर रहे किसानों का धरना शनिवार को भी जारी रहा। धरने पर बैठे किसानों ने करनाल प्रशासन द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज करने की कड़े शब्दों में निंदा की। किसानों ने मुख्यमंत्री का पुतला भी फूंका। धरने में भुडेर पाल के किसानों ने हिस्सा लिया। राजकुमार ओहलियान द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता अर्जुन कुंडू अल्लिका ने की।
धरने में किसानों ने आंदोलन को जिले के गांव-गांव तक फैलाने के संकल्प के साथ 5 सितम्बर को मुजफ्फरनगर की किसान मजदूर रैली को कामयाब करने का आह्वान किया। धरने में उपस्थित किसानों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती व धर्मचन्द घुघेरा ने बताया कि किसान आन्दोलन ने सरकार के हमलों का मुकाबला करते हुए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह आंदोलन वास्तव में आत्मनिर्भरता के विकास का मार्ग है जो देश के नागरिकों के जीवन और आजीविका की रक्षा करता है।
किसान नेता बादाम सरपंच ने बताया कि सरकार गरीबों के राशन व सब्सिडी पर निशाना साध रही है। आवश्यक वस्तुओं विशेषकर ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जा रही है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं व शिक्षा क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपकर इनसे जनता को दूर कर रही है।
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किसान नेता जगन डागर ने कहा कि यह हमला केवल किसान व खेतीहर मजदूर तक सीमित नहीं है बल्कि ये नीतियां देश की मेहनतकश जनता के सभी वर्गों पर चौतरफा हमला कर रही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जैसे रेल, बिजली, प्राकृतिक गैस, दूरसंचार परियोजनाएं, खाद्य भण्डारण, बीमा व बैंक जो देश के नागरिकों को रोजगार व सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं अब सरकार इन्हें भी बेच रही है।
धरने में शामिल किसानों को बिजेंद्र सरपंच, प्रेमसिंह फौजी, ताराचन्द, बिजेंद्र लालवा, समयराम ककराली, रमेशचन्द गौडौता, नरेन्द्र सहरावत, अच्छेलाल, बीरसिंह, पोहप सिंह, रोशनलाल, चन्द्रमुनि, इन्द्रसिंह रावत, रमेश आर्य, किशन जाब व ब्रजलाल चौहान ने भी सम्बोधित किया।
----संवाद------
फोटो 28पीएएलपी-16 में हैं।
कैप्शन: पलवल धरने में बैठे किसान
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धरने में किसानों ने आंदोलन को जिले के गांव-गांव तक फैलाने के संकल्प के साथ 5 सितम्बर को मुजफ्फरनगर की किसान मजदूर रैली को कामयाब करने का आह्वान किया। धरने में उपस्थित किसानों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती व धर्मचन्द घुघेरा ने बताया कि किसान आन्दोलन ने सरकार के हमलों का मुकाबला करते हुए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह आंदोलन वास्तव में आत्मनिर्भरता के विकास का मार्ग है जो देश के नागरिकों के जीवन और आजीविका की रक्षा करता है।
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किसान नेता बादाम सरपंच ने बताया कि सरकार गरीबों के राशन व सब्सिडी पर निशाना साध रही है। आवश्यक वस्तुओं विशेषकर ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जा रही है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं व शिक्षा क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपकर इनसे जनता को दूर कर रही है।
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किसान नेता जगन डागर ने कहा कि यह हमला केवल किसान व खेतीहर मजदूर तक सीमित नहीं है बल्कि ये नीतियां देश की मेहनतकश जनता के सभी वर्गों पर चौतरफा हमला कर रही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जैसे रेल, बिजली, प्राकृतिक गैस, दूरसंचार परियोजनाएं, खाद्य भण्डारण, बीमा व बैंक जो देश के नागरिकों को रोजगार व सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं अब सरकार इन्हें भी बेच रही है।
धरने में शामिल किसानों को बिजेंद्र सरपंच, प्रेमसिंह फौजी, ताराचन्द, बिजेंद्र लालवा, समयराम ककराली, रमेशचन्द गौडौता, नरेन्द्र सहरावत, अच्छेलाल, बीरसिंह, पोहप सिंह, रोशनलाल, चन्द्रमुनि, इन्द्रसिंह रावत, रमेश आर्य, किशन जाब व ब्रजलाल चौहान ने भी सम्बोधित किया।
----संवाद------
फोटो 28पीएएलपी-16 में हैं।
कैप्शन: पलवल धरने में बैठे किसान