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छाता के किसानों के साथ पुलिस द्वारा अभद्र व्यवहार की निंदा
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पलवल। तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग के संबंध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज के अटोहां चौक पर किसानों का धरना जारी रहा। इस दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा करमन बॉर्डर पर छाता के किसानों के साथ किए गए अभद्र व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की और रोष जताया। साथ ही जिला प्रशासन से मांग की गई कि इस प्रकार की घटनाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए। किसानों को तंग न करें। सभी किसान शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चला रहे हैं। किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में मंगलवार को धरने की अध्यक्षता ब्रह्मसिंह कोटवन ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओलिहान ने किया।
किसान नेता रतन सिंह सौरौत ने कहा कि पिछले छह माह से देश के अन्नदाता शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। केंद्र सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं से बात करके समस्या का समाधान करना चाहिए। देश के तमाम क्षेत्रों में गिरावट के बावजूद वर्तमान में कृषि क्षेत्र ने देश की डूबती नैया को बचाए रखा है। इसके बावजूद सरकार ने 22 जनवरी के बाद किसानों से बातचीत करना बंद कर दिया। केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हौसलों की परीक्षा ले रही है। किसानों नेताओं ने कहा कि बिना कृषि कानूनों को वापस लिए आंदोलन खत्म नहीं होगा।
धरने में किसान नेता धर्मचंद घुघेरा, पूर्व चेयरमैन जगपाल सिंह, सोहनपाल चौहान, रूपराम तेवतिया, डॉ. रघुबीर सिंह, दिगंबर हथाना, रोशन लाल, किशनचंद, दरियाब सिंह, रमेश चंद, बीरसिंह औरंगाबाद, नरेंद्र सहरावत आदि ने भी अपने विचार रखे।
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किसान नेता रतन सिंह सौरौत ने कहा कि पिछले छह माह से देश के अन्नदाता शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। केंद्र सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार को संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं से बात करके समस्या का समाधान करना चाहिए। देश के तमाम क्षेत्रों में गिरावट के बावजूद वर्तमान में कृषि क्षेत्र ने देश की डूबती नैया को बचाए रखा है। इसके बावजूद सरकार ने 22 जनवरी के बाद किसानों से बातचीत करना बंद कर दिया। केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हौसलों की परीक्षा ले रही है। किसानों नेताओं ने कहा कि बिना कृषि कानूनों को वापस लिए आंदोलन खत्म नहीं होगा।
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धरने में किसान नेता धर्मचंद घुघेरा, पूर्व चेयरमैन जगपाल सिंह, सोहनपाल चौहान, रूपराम तेवतिया, डॉ. रघुबीर सिंह, दिगंबर हथाना, रोशन लाल, किशनचंद, दरियाब सिंह, रमेश चंद, बीरसिंह औरंगाबाद, नरेंद्र सहरावत आदि ने भी अपने विचार रखे।
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