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Palwal News: पशुओं के इलाज की उम्मीदों पर ताला
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बिछौर गांव स्थित पशु चिकित्सालय पर लटका ताला।
बिछौर के पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों के नहीं पहुंचने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। पशुओं को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए खोला गया बिछौर गांव का पशु चिकित्सालय खुद बदहाली का शिकार है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां डॉक्टर नियमित रूप से नहीं बैठते। कई वर्षों से बनी इस समस्या के चलते पशुपालकों को इलाज और दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है। सोमवार को भी दोपहर करीब 12 से एक बजे के बीच चिकित्सालय पर ताला लटका मिला। अस्पताल परिसर में अवैध कब्जे का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, कभी-कभार एक कर्मचारी सुबह अस्पताल का ताला खोलने आता है और कुछ घंटे बाद ही चला जाता है। डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में पशुओं का उपचार नहीं हो पाता। ऐसे में पशुपालकों को मजबूरी में प्राईवेट डॉक्टरों से पशुओं का इलाज कराने के साथ साथ निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
ग्रामीण मुकेश कुमार, सुनील कुमार, कासम खान, मोहम्मद असलम और जाकिर हुसैन ने बताया कि पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों को नियमित रूप से देखना तो दूर, कई बार दवाइयों के लिए भी खाली हाथ लौटना पड़ता है। ग्रामीणों ने चिकित्सालय परिसर पर अवैध कब्जे की भी जांच कराने की मांग की है।
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कोट
बिछौर का पशु चिकित्सालय सुचारु रूप से चल रहा है। संभव है कि स्टाफ किसी बैठक में गया हो। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी। पशुपालकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। - डॉ. वीरेंद्र सहरावत, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। पशुओं को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए खोला गया बिछौर गांव का पशु चिकित्सालय खुद बदहाली का शिकार है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां डॉक्टर नियमित रूप से नहीं बैठते। कई वर्षों से बनी इस समस्या के चलते पशुपालकों को इलाज और दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है। सोमवार को भी दोपहर करीब 12 से एक बजे के बीच चिकित्सालय पर ताला लटका मिला। अस्पताल परिसर में अवैध कब्जे का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, कभी-कभार एक कर्मचारी सुबह अस्पताल का ताला खोलने आता है और कुछ घंटे बाद ही चला जाता है। डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में पशुओं का उपचार नहीं हो पाता। ऐसे में पशुपालकों को मजबूरी में प्राईवेट डॉक्टरों से पशुओं का इलाज कराने के साथ साथ निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
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ग्रामीण मुकेश कुमार, सुनील कुमार, कासम खान, मोहम्मद असलम और जाकिर हुसैन ने बताया कि पशु चिकित्सालय में डॉक्टरों को नियमित रूप से देखना तो दूर, कई बार दवाइयों के लिए भी खाली हाथ लौटना पड़ता है। ग्रामीणों ने चिकित्सालय परिसर पर अवैध कब्जे की भी जांच कराने की मांग की है।
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बिछौर का पशु चिकित्सालय सुचारु रूप से चल रहा है। संभव है कि स्टाफ किसी बैठक में गया हो। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी। पशुपालकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। - डॉ. वीरेंद्र सहरावत, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग