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Palwal News: दिखावा बन रही जिले में हरियाणा की भावांतर भरपाई योजना

Mon, 17 Apr 2023 10:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 17 Apr 2023 10:24 PM IST
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Haryana's Bhavantar Bharti Yojna is becoming a show-off in the district
कैप्शन: 6- भावांतर भरपाई योजना के लिए वर्ष 2021 में पोर्टल पर किए हुुए पंजीकरण की फोटो कापी
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कैप्शन:7- अकिल किसान
कैप्शन: 8-मकसूद किसान
कैप्शन: 9-अरमान किसान
जिले के 800 किसानों ने दो साल पहले किया हुआ है पंजीकरण, लेकिन आज तक नहीं मिला मुआवजा
किसान फिर रहे मारे-मारे, कोई नहीं दे रहा ठीक से जवाब
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2017 में शुरू की गई हरियाणा भावांतर भरपाई योजना जिले में फेल साबित हो रही है। इस योजना का लाभ पाने के लिए जिले के किसान पिछले दो सालों से अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं, लेकिन योजना का लाभ तो दूर कोई अधिकारी ठीक से किसानों को जवाब भी नहीं दे रहा है। यह हाल तो तब है जब किसान इस योजना का लाभ पाने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा बनाए पोर्टल पर पंजीकरण भी करा चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी बाजरा फसल का मुआवजा किसानों को आज तक नहीं मिला है। किसानों की माने तो भरपाई योजना केवल दिखावा है। हरियाणा भावांतर भरपाई योजना में जिले के करीब 800 किसानों ने वर्ष 2021 में मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण किया था, लेकिन आज तक बाजरा की फसल का भावांतर भरपाई योजना का लाभ किसानों को नहीं मिला है। इस योजना में हथीन उपमंडल के गांव उटावड़ के ही अकेले 25 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने 2021 में पोर्टल पर पंजीकरण किया था, लेकिन जिले में 800 से अधिक किसानों में से मात्र पांच से 10 किसानों को ही योजना का लाभ मिला हैै। बाकी आज भी भटकते फिर रहे हैं।
क्या है भावांतर योजना
हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कई तरह की योजनाओं का संचालन कर उन्हें कृषि में होने वाले नुकसान से राहत दिलाने का प्रयास किया जाता है। इसी के चलते किसानों के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा 30 सितंबर 2017 को हरियाणा भावांतर भरपाई योजना शुरू की, ताकि किसानों को उनकी फसलों की सही कीमत प्रदान की जा सके। योजना द्वारा राज्य के किसानों को उनकी उत्पादन फसलों की सही कीमत प्रदान करने के लिए की गई है, जिसके माध्यम से आवेदक किसानों को सरकार द्वारा मंडी में उत्पादन फल और सब्जियों को बेचने पर कम कीमत मिलने से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए भरपाई की जाती है। लेकिन यह योजना पलवल जिले में पूरी तरह से दिखावा साबित हो रही है। इस योजना का किसानों का कोई फायदा नहीं हो रहा है। भावांंतर भरपाई योजना के तहत पलवल जिले के 800 से अधिक किसानों को बाजरा की फसल का मुआवजे के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार ने बाजरा उत्पादक किसानों को 450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मुआवजा की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिले के कुछ किसानों को तो मुआवजा मिल गया है, वहीं भारी संख्या में किसान मुआवजा पाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उटावड़ के किसान मकसूद, आकिब खान, जुबेर खान सहित अकेले उटावड़ के 25 किसान भटक रहे हैं।
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मैंने 13 जुलाई 2021 को मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर बाजरा के लिए पंजीकरण किया था, ताकि भावांतर भरपाई योजना का लाभ मिले, लेकिन आज तक मुझे लाभ नहीं मिला है। मैं मुुआवजा पाने के लिए उसी दिन से भटक रहा हूं। -अरमान, किसान
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मैंने 11 जुुलाई 2021 को पंजीकरण कराया था, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला है। अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहा हूंं, लेकिन कोई सुुनवाई करने वाला नहीं है। सरकार की योजना पूरी तरह से फेल है। -अकिल, किसान
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मैंने 18 जून 2021 को भावांतार भरपाई योजना के लिए पंजीकरण किया था, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। न तो मुआवजा मिल रहा है और न ही कोई जवाब दे रहा है। योजना केवल दिखावा है। -मकसूद अली किसान

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इस संदर्भ में विभाग की तरफ से मुख्यालय को किसानों की समस्या बता दी गई है। भावांतर भरपाई योजना की राशि सीधे मुख्यायलय से किसानों के खाते में आती है। इस बारे में मेरी जानकारी में कुछ नहीं है। जिन किसानों की शिकायतें मिलीं, वे मुख्यालय में भिजवा दी गई हैं। -पवन शर्मा, उपनिदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पलवल
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