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हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर: पलवल से सोनीपत तक रेलवे निर्माण तेज, व्यापार को लगेंगे पंख
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- फर्रुखनगर टोल प्लाजा से हुआ निर्माण कार्य शुरू, पलवल को मिलेगा लाभ
-121 किमी लंबी रेल लाइन बनाने की है योजना, 15 नए रेलवे स्टेशन भी बनेंगे
फोटो-06-पलवल रेलवे स्टेशन की फोटो
पलवल। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना के तहत पलवल से सोनीपत तक 121 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। हाल ही में, सोहना-रेवाड़ी रोड इंटरचेंज के पास स्थित फर्रुखनगर टोल प्लाजा से निर्माण कार्य की शुरुआत हो चुकी है। इसके अलावा, मानेसर स्थित मारुति-सुजुकी प्लांट को दिल्ली-रेवाड़ी सेक्शन से जोड़ने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। परियोजना के पूरा होने से पलवल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा तथा कनेक्टिविटी बेहतर होने से व्यापार को पंख लगेंगे।
हरियाणा सरकार और रेलवे मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से परियोजना का कार्य पिछले कुछ वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। फरवरी 2025 के पहले सप्ताह में निर्माण की शुरुआत हुई, जिसमें प्राथमिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण और आधारभूत ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया। अब, फर्रुखनगर टोल प्लाजा के पास से इसकी भौतिक संरचना पर काम शुरू हो गया है। कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के चारों ओर एक वैकल्पिक रेलवे मार्ग विकसित करना है। जिससे माल परिवहन को बढ़ावा मिले और यात्री ट्रेनों पर दबाव कम हो। इस परियोजना से पलवल, गुरुग्राम, नूंह, झज्जर और सोनीपत जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना प्रदेश के औद्योगिक और परिवहन ढांचे को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। 2028 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। इससे हरियाणा के विभिन्न जिलों को नई कनेक्टिविटी मिलेगी और व्यापार को गति मिलेगी। पलवल इस कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा, जिससे यात्रियों और व्यापारियों दोनों को लाभ होगा।
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परियोजना के निर्माण के चरण
भूमि अधिग्रहण (2023-2024):
67 गांवों की लगभग 665.92 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई।
प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी हुई।
बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण कार्य (2025-2026)
रेलवे पटरियों की बिछाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पुलों, सुरंगों और स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा।
मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों को रेलवे कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा।
ट्रैक इलेक्ट्रिफिकेशन और ट्रायल रन (2027-2028):
विद्युतीकरण कार्य पूरा किया जाएगा।
ट्रेनों का परीक्षण होगा।
पूर्ण रूप से संचालन शुरू किया जाएगा।
पलवल को ऐसे मिलेगा फायदा
पलवल इस कॉरिडोर के सबसे महत्वपूर्ण स्टेशनों में से एक होगा। इस नए रेलवे नेटवर्क से पलवल के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को दिल्ली, गुरुग्राम और सोनीपत से बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना के तहत न्यू पलवल नामक एक नया स्टेशन विकसित किया जाएगा, जो शहर के विस्तार और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बेहतर कनेक्टिविटी:
पलवल के यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए वैकल्पिक और तेज रूट मिलेगा।
मालवाहक ट्रेनों का सीधा संचालन होगा, जिससे उद्योगों को फायदा होगा।
आर्थिक विकास:
कॉरिडोर के बनने से पलवल के आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
यातायात का दबाव होगा कम:
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के रेलवे नेटवर्क पर भार कम होगा।
दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में भीड़भाड़ कम होगी।
कॉरिडोर की विशेषताएँ
121 किमी लंबा कॉरिडोर, जो कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के समानांतर बनेगा।
15 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें न्यू पलवल, सोहना, मानेसर और खरखौदा शामिल हैं।
ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे होगी।
प्रतिदिन 5 करोड़ टन माल ढुलाई की क्षमता होगी।
-- -- --
वर्जन
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यह परियोजना आधुनिक तकनीक और उच्च मानकों के अनुरूप पूरी की जा रही है। – डीसी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
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-121 किमी लंबी रेल लाइन बनाने की है योजना, 15 नए रेलवे स्टेशन भी बनेंगे
फोटो-06-पलवल रेलवे स्टेशन की फोटो
पलवल। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना के तहत पलवल से सोनीपत तक 121 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। हाल ही में, सोहना-रेवाड़ी रोड इंटरचेंज के पास स्थित फर्रुखनगर टोल प्लाजा से निर्माण कार्य की शुरुआत हो चुकी है। इसके अलावा, मानेसर स्थित मारुति-सुजुकी प्लांट को दिल्ली-रेवाड़ी सेक्शन से जोड़ने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। परियोजना के पूरा होने से पलवल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा तथा कनेक्टिविटी बेहतर होने से व्यापार को पंख लगेंगे।
हरियाणा सरकार और रेलवे मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से परियोजना का कार्य पिछले कुछ वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। फरवरी 2025 के पहले सप्ताह में निर्माण की शुरुआत हुई, जिसमें प्राथमिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण और आधारभूत ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया। अब, फर्रुखनगर टोल प्लाजा के पास से इसकी भौतिक संरचना पर काम शुरू हो गया है। कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के चारों ओर एक वैकल्पिक रेलवे मार्ग विकसित करना है। जिससे माल परिवहन को बढ़ावा मिले और यात्री ट्रेनों पर दबाव कम हो। इस परियोजना से पलवल, गुरुग्राम, नूंह, झज्जर और सोनीपत जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।
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हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना प्रदेश के औद्योगिक और परिवहन ढांचे को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। 2028 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। इससे हरियाणा के विभिन्न जिलों को नई कनेक्टिविटी मिलेगी और व्यापार को गति मिलेगी। पलवल इस कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा, जिससे यात्रियों और व्यापारियों दोनों को लाभ होगा।
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परियोजना के निर्माण के चरण
भूमि अधिग्रहण (2023-2024):
67 गांवों की लगभग 665.92 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई।
प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी हुई।
बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण कार्य (2025-2026)
रेलवे पटरियों की बिछाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पुलों, सुरंगों और स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा।
मुख्य औद्योगिक क्षेत्रों को रेलवे कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा।
ट्रैक इलेक्ट्रिफिकेशन और ट्रायल रन (2027-2028):
विद्युतीकरण कार्य पूरा किया जाएगा।
ट्रेनों का परीक्षण होगा।
पूर्ण रूप से संचालन शुरू किया जाएगा।
पलवल को ऐसे मिलेगा फायदा
पलवल इस कॉरिडोर के सबसे महत्वपूर्ण स्टेशनों में से एक होगा। इस नए रेलवे नेटवर्क से पलवल के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को दिल्ली, गुरुग्राम और सोनीपत से बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना के तहत न्यू पलवल नामक एक नया स्टेशन विकसित किया जाएगा, जो शहर के विस्तार और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बेहतर कनेक्टिविटी:
पलवल के यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए वैकल्पिक और तेज रूट मिलेगा।
मालवाहक ट्रेनों का सीधा संचालन होगा, जिससे उद्योगों को फायदा होगा।
आर्थिक विकास:
कॉरिडोर के बनने से पलवल के आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
यातायात का दबाव होगा कम:
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के रेलवे नेटवर्क पर भार कम होगा।
दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में भीड़भाड़ कम होगी।
कॉरिडोर की विशेषताएँ
121 किमी लंबा कॉरिडोर, जो कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के समानांतर बनेगा।
15 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें न्यू पलवल, सोहना, मानेसर और खरखौदा शामिल हैं।
ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे होगी।
प्रतिदिन 5 करोड़ टन माल ढुलाई की क्षमता होगी।
वर्जन
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यह परियोजना आधुनिक तकनीक और उच्च मानकों के अनुरूप पूरी की जा रही है। – डीसी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ