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Palwal News: फिर धंसी जमीन, गेल गैस पाइपलाइन भी तीसरी बार मुड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2026 11:57 PM IST
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Ground sinks again; GAIL gas pipeline bends for the third time
बुधवार सुबह ; किसानों ने निर्माण कंपनी पर लगाया लापरवाही का आरोप
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एक महीने में तीन बार धंसी निर्माणाधीन टनल, अब मकानों में आई दरारें; दहशत में पीपाका के ग्रामीण
प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने का किया दावा

संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। उपमंडल के ग्राम पंचायत सेहसोला के गांव पीपाका में हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर की निर्माणाधीन टनल ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। एक महीने के भीतर तीन बार जमीन धंसने की घटनाओं के बाद अब ग्रामीणों के मकानों में भी दरारें आने लगी हैं। बुधवार सुबह एक बार फिर टनल के ऊपर का कुछ हिस्सा धंसने से गांव में दहशत का माहौल बन गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि जमीन धंसने का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो उनके मकानों और जान-माल को बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं, गेल कंपनी की गैस पाइपलाइन भी तीसरी बार मुड़कर सतह पर दिखाई देने की बात सामने आई है। लगातार हो रही घटनाओं के बीच किसानों ने निर्माण कंपनी पर लापरवाही और प्रशासन पर मामले को गंभीरता से नहीं लेने के आरोप लगाए हैं।

प्रशासन की ओर से किसानों को जमीन अधिग्रहण और नुकसान का मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज करने का दावा किया जा रहा है। उपायुक्त अखिल पिलानी के अनुसार टनल के ऊपर से गुजरने वाली करीब 3 से 3.5 किलोमीटर के दायरे की जमीन अधिग्रहण करने की सिफारिश रेलवे विभाग को भेजी जा चुकी है। वहीं, खेतों में हुए नुकसान और फसलों का आकलन भी कराया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने और ग्रामीणों की संतुष्टि तक निर्माण कार्य बंद रहेगा। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अभी तक जांच और अधिग्रहण को लेकर कोई आधिकारिक नोटिस या लिखित सूचना नहीं मिली है।
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5 अक्तूबर को शुरू हुआ था जमीन धंसने का सिलसिला

गांव पीपाका में टनल धंसने की पहली बड़ी घटना 5 अक्टूबर को सामने आई थी। उस दिन निर्माणाधीन टनल का करीब 30 मीटर हिस्सा अचानक जमीन में धंस गया था। घटना के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से शिकायत की थी। इसके बावजूद पांच दिन बाद 10 अक्टूबर को दोबारा बड़ा हादसा हो गया। इस बार करीब तीन एकड़ से अधिक जमीन का 500 मीटर से ज्यादा हिस्सा धंस गया। इसकी चपेट में आने से एक मकान और एक सरकारी भवन पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि एक अन्य सरकारी भवन को भी नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा जामनगर से दिल्ली-एनसीआर तक गैस आपूर्ति करने वाली गेल कंपनी की पाइपलाइन भी जमीन से बाहर आ गई थी। इससे इलाके में बड़े हादसे का खतरा पैदा हो गया था।
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जमीन अधिग्रहण की हुई थी सिफारिश
लगातार दो घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीसी ज्योति के नेतृत्व में सात सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी को सात दिन के भीतर जांच पूरी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों के अलावा एसडीएम तावडू, डीएसपी, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार और बीडीपीओ सहित संबंधित अधिकारी शामिल किए गए थे। कमेटी ने ग्रामीणों और निर्माण कंपनी के पदाधिकारियों से बातचीत की थी। इस दौरान ग्रामीणों ने टनल के ऊपर से गुजरने वाली जमीन का अधिग्रहण करने की प्रमुख मांग उठाई थी। प्रशासन ने जांच के बाद करीब 3 से 3.5 किलोमीटर के दायरे की जमीन अधिग्रहण करने की सिफारिश रेलवे विभाग को भेज दी थी। किसानों ने इसे अपनी मांग की जीत माना था, लेकिन अभी तक अधिग्रहण की प्रक्रिया का आधिकारिक नोटिस जारी नहीं हुआ है।

ग्रामीणों को गैस रिसाव का डर
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने सात दिन में जांच पूरी करने का भरोसा दिया था, लेकिन करीब एक महीना बीतने के बावजूद उन्हें कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। 30 अक्टूबर को भी गांव में जमीन धंसने की घटना हुई थी। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक बुधवार सुबह फिर जमीन का कुछ हिस्सा धंस गया। इससे आसपास के मकानों में दरारें आने की शिकायत भी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार घटनाएं होने के बावजूद निर्माण कंपनी और प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्हें न तो जांच की रिपोर्ट दी गई है और न ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के बारे में कोई लिखित जानकारी मिली है।

टनल धंसने की घटनाओं के साथ गेल कंपनी की गैस पाइपलाइन का बार-बार प्रभावित होना भी चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार पाइपलाइन दो बार पहले भी मुड़कर जमीन की सतह पर आ गई थी और बुधवार को फिर ऐसी स्थिति सामने आई। इससे लोगों में गैस रिसाव और किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। हालांकि, गेल कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि पाइपलाइन की स्थिति पर उनकी टीम लगातार नजर रख रही है। 10 अक्तूबर की घटना के बाद से ही तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर तैनात हैं और सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। उनके मुताबिक फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और गैस की आपूर्ति भी लगातार जारी है।


जांच पूरी होने तक बंद रहेगा निर्माण कार्य : उपायुक्त
उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित कमेटी लगातार काम कर रही है। ग्रामीणों की मांग के अनुसार जमीन अधिग्रहण की सिफारिश रेलवे विभाग को भेज दी गई है और उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में नोटिस जारी होगा। बुधवार को दोबारा जमीन धंसने का मामला भी उनके संज्ञान में आया है, जिसकी जांच कराई जाएगी। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर निर्माण कार्य बंद करवा दिया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती और ग्रामीण पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते, तब तक काम शुरू नहीं किया जाएगा। इसके अलावा प्रभावित खेतों और फसलों के नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को फसल नुकसान का अलग से मुआवजा दिया जाएगा।
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