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घोड़ों में मिला ग्लैंडर्स रोग, तीन की रिपोर्ट पॉजिटिव
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पलवल। एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, वहीं अब घोड़ों में ग्लैंडर्स नामक बीमारी फैलने लगी है। जिले में तीन घोड़े पॉजिटिव मिले है। इससे पशु पालन विभाग बेहद चिंतित नजर आ रहा है। जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने अन्य पशुओं व लोगों को बचाने के लिए भी गाइडलाइन जारी कर दी हैं। बताया जा रहा है घोड़ों में पाई गई ग्लैंडर्स बेहद खतरनाक है तथा घोड़ों से यह बीमारी इंसानों में भी फैल सकती है। जिन तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है, उन्हें एकांत में अंदर बंद कर उनका उपचार शुरू करा दिया गया है।
क्या है ये ग्लैंडर्स बीमारी
ग्लैंडर्स घोड़ों की प्रजातियों में एक जानलेवा संक्रामक रोग है। इसमें घोड़े की नाक से खून बहना, सांस लेने में तकलीफ, शरीर का सूख जाना, पूरे शरीर पर फोड़े आदि लक्षण हैं। यह बीमारी दूसरे पालतू पशुओं में भी पहुंच सकती है। दरअसल यह बीमारी बरखोडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। यह बीमारी होने पर घोड़े को वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है।
मनुष्यों को भी है खतरा
घोड़ों से मनुष्यों में यह बीमारी आसानी से पहुंच जाती है। जो लोग घोड़ों की देखभाल करते हैं या फिर उपचार करते हैं, उनको त्वचा, नाक, मुंह और सांस के द्वारा संक्रमण हो जाता है। मनुष्यों में इस बीमारी से मांस पेशियों में दर्द, छाती में दर्द, मांसपेशियों की अकड़न, सिरदर्द और नाक से पानी निकलने लगता है।
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अन्य पशुओं के सैंपल जांच के लिए भेजा
पशु पालन विभाग पलवल के उपनिदेशक डॉ. इकबाल सिंह दहिया ने बताया कि दयानगर कॉलोनी के तीन घोड़े ग्लैंडर्स बीमारी से पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बाद राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार जिले में अश्व प्रजाति के पशुओं में ग्लैंडर्स रोग पाए जाने के बाद नियंत्रित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। उनके साथ रहने वाले अन्य घोड़े, गधे, खच्चर व अश्व प्रजाति के अन्य पशुओं की भी सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। तीनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है, ताकि अन्य पशुओं व उनके संपर्क में रहने लोगों में यह बीमारी न फैले। इसके साथ ही उन्हें पालने वाले लोगों से भी कोई भी बीमारी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने को कहा गया है।
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क्या है ये ग्लैंडर्स बीमारी
ग्लैंडर्स घोड़ों की प्रजातियों में एक जानलेवा संक्रामक रोग है। इसमें घोड़े की नाक से खून बहना, सांस लेने में तकलीफ, शरीर का सूख जाना, पूरे शरीर पर फोड़े आदि लक्षण हैं। यह बीमारी दूसरे पालतू पशुओं में भी पहुंच सकती है। दरअसल यह बीमारी बरखोडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। यह बीमारी होने पर घोड़े को वैज्ञानिक तरीके से मारना ही पड़ता है।
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मनुष्यों को भी है खतरा
घोड़ों से मनुष्यों में यह बीमारी आसानी से पहुंच जाती है। जो लोग घोड़ों की देखभाल करते हैं या फिर उपचार करते हैं, उनको त्वचा, नाक, मुंह और सांस के द्वारा संक्रमण हो जाता है। मनुष्यों में इस बीमारी से मांस पेशियों में दर्द, छाती में दर्द, मांसपेशियों की अकड़न, सिरदर्द और नाक से पानी निकलने लगता है।
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अन्य पशुओं के सैंपल जांच के लिए भेजा
पशु पालन विभाग पलवल के उपनिदेशक डॉ. इकबाल सिंह दहिया ने बताया कि दयानगर कॉलोनी के तीन घोड़े ग्लैंडर्स बीमारी से पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बाद राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार जिले में अश्व प्रजाति के पशुओं में ग्लैंडर्स रोग पाए जाने के बाद नियंत्रित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। उनके साथ रहने वाले अन्य घोड़े, गधे, खच्चर व अश्व प्रजाति के अन्य पशुओं की भी सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। तीनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है, ताकि अन्य पशुओं व उनके संपर्क में रहने लोगों में यह बीमारी न फैले। इसके साथ ही उन्हें पालने वाले लोगों से भी कोई भी बीमारी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने को कहा गया है।