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गढ़ी गांव हर साल करता है अपने बहादुर बेटे को सलाम
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होडल में शहीद राजवीर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते लोग। फाइल फोटो
- फोटो : Palwal
गढ़ी गांव हर साल करता है अपने बहादुर बेटे को सलाम
होडल। 12 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों के साथ लड़ते हुए शहीद हुए होडल के गांव गढ़ी निवासी लांस नायक राजवीर की पुण्यतिथि पर हर वर्ष रागिनी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। गांव में बड़ा कार्यक्रम आयोजित होता है और उसमें गांव सहित आसपास के सैकड़ों लोग अपने बहादुर बेटे को सलाम करने पहुंचते हैं। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले रागिनी कलाकारों को पुरस्कृत भी किया जाता है। पूरा गांव ही नहीं बल्कि होडल उपमंडल के अलावा दूर-दराज से भी लोग शहीद की पुण्यतिथि मनाने आते हैं, लेकिन सरकार की तरफ से आज तक कार्यक्रम में न तो कोई अधिकारी आया न ही कोई नेता। जबकि इस कार्यक्रम में जिले के सभी शहीदों के परिजनों को बुलाकर सम्मानित भी किया जाता है।
शहीद के बड़े भाई प्रताप सिंह बताते हैं कि राजवीर दसवीं करने के बाद 11 मार्च 1988 को सेना में भर्ती हुए थे। 17-जाट रेजीमेंट में शामिल राजवीर खेलों में भी हिस्सा लेते रहते थे। उन्हें बचपन से ही खेलों का शौक था। कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए देश के लिए शहीद हो गए। राजवीर की पुण्यतिथि पर 12 जुलाई को हर वर्ष ग्राम पंचायत की ओर से देशभक्ति से ओतप्रोत रागिनी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसमें लोग शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं। लेकिन सरकार या प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं होता।
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स्टेडियम बनाने की मांग
गढ़ी गांव का स्कूल और होडल की तरफ जाने वाली गांव की मुख्य सड़क शहीद राजवीर सिंह के नाम पर है। सरकार द्वारा निर्माण कराने के बाद इस सड़क का नाम शहीद राजवीर सिंह गढ़ी मार्ग रखा गया था। ग्रामीणों की मांग है कि शहीद के नाम पर गांव में खेल स्टेडियम का निर्माण भी कराया जाए, ताकि युवा वहां खेल गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।
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होडल। 12 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों के साथ लड़ते हुए शहीद हुए होडल के गांव गढ़ी निवासी लांस नायक राजवीर की पुण्यतिथि पर हर वर्ष रागिनी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। गांव में बड़ा कार्यक्रम आयोजित होता है और उसमें गांव सहित आसपास के सैकड़ों लोग अपने बहादुर बेटे को सलाम करने पहुंचते हैं। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले रागिनी कलाकारों को पुरस्कृत भी किया जाता है। पूरा गांव ही नहीं बल्कि होडल उपमंडल के अलावा दूर-दराज से भी लोग शहीद की पुण्यतिथि मनाने आते हैं, लेकिन सरकार की तरफ से आज तक कार्यक्रम में न तो कोई अधिकारी आया न ही कोई नेता। जबकि इस कार्यक्रम में जिले के सभी शहीदों के परिजनों को बुलाकर सम्मानित भी किया जाता है।
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शहीद के बड़े भाई प्रताप सिंह बताते हैं कि राजवीर दसवीं करने के बाद 11 मार्च 1988 को सेना में भर्ती हुए थे। 17-जाट रेजीमेंट में शामिल राजवीर खेलों में भी हिस्सा लेते रहते थे। उन्हें बचपन से ही खेलों का शौक था। कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए देश के लिए शहीद हो गए। राजवीर की पुण्यतिथि पर 12 जुलाई को हर वर्ष ग्राम पंचायत की ओर से देशभक्ति से ओतप्रोत रागिनी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसमें लोग शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं। लेकिन सरकार या प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं होता।
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स्टेडियम बनाने की मांग
गढ़ी गांव का स्कूल और होडल की तरफ जाने वाली गांव की मुख्य सड़क शहीद राजवीर सिंह के नाम पर है। सरकार द्वारा निर्माण कराने के बाद इस सड़क का नाम शहीद राजवीर सिंह गढ़ी मार्ग रखा गया था। ग्रामीणों की मांग है कि शहीद के नाम पर गांव में खेल स्टेडियम का निर्माण भी कराया जाए, ताकि युवा वहां खेल गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।