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Palwal News: 58 लाख रुपये की साइबर ठगी में चार दोषियों को चार-चार साल की सजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:58 AM IST
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Four convicted in 58 lakh cyber fraud case
टेलीग्राम पर घर बैठे काम का झांसा देकर ठगी का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने करीब 58 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में चार दोषियों को विभिन्न धाराओं में कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर कुल 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

सीजेएम छवि गोयल की अदालत ने 31 जुलाई को सजा का आदेश जारी किया। इससे पहले 29 जुलाई को अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामला साइबर क्राइम थाना नूंह में दर्ज एफआईआर नंबर 114 दिनांक 4 जुलाई 2025 से संबंधित है।
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अदालत के आदेश के अनुसार, दोषी पवन कुमार बांकर, सुरेंद्र कुमार मीणा, गौतम और दीपक वर्मा उर्फ दीवाना, सभी राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र के निवासी हैं। इन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023 की विभिन्न धाराओं के तहत सुनवाई हुई।
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मामले के अनुसार, तावडू के वार्ड-4 निवासी दीपक पुत्र रामकिशोर ने बताया कि वह एमेजन कंपनी में एसोशिएट के पद पर काम करता है। कुछ दिन पहले उसकी टेलीग्राम आईडी पर घर बैठकर कार्य करने का ऑफर आया, जिसमें कमीशन कमाने का झांसा दिया गया। शुरुआत में छोटे भुगतान कर विश्वास जीतने के बाद उससे अलग-अलग बैंक खातों में कई किस्तों में रकम जमा कराई गई। शिकायतकर्ता के अनुसार उसके साथ करीब 58 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई। इसके बाद साइबर क्राइम थाना नूंह में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

सजा सुनाए जाने के दौरान दोषियों ने अदालत से आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की। किसी ने स्वयं को परिवार का एकमात्र कमाने वाला बताया तो किसी ने बीमार माता-पिता और बहनों की जिम्मेदारी का उल्लेख किया। वहीं, राज्य पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ता की जीवनभर की बचत हड़प ली गई है, इसलिए अधिकतम सजा दी जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साइबर ठगी जैसे अपराध समाज पर सीधा और गंभीर प्रभाव डालते हैं। यह सुनियोजित साजिश का मामला है, इसलिए दोषियों को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देना उचित नहीं होगा।


अदालत ने विभिन्न धाराओं में तीन से चार वर्ष तक के कठोर कारावास और प्रत्येक धारा में दो-दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर कुल 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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