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Palwal News: खेतों में जलजमाव, बोआई को लेकर किसानों में चिंता
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खेतों में भरा पानी
ऐंचवाड़ी, गोकलपुर और नीमखेड़ा में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर जलभराव
सद्दाम हुसैन
पिनगवां। खेतों में जमा बरसाती पानी किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। पिनगवां खंड के ऐंचवाड़ी, गोकलपुर और नीमखेड़ा गांवों में 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलभराव की चपेट में है। खेतों में पानी भरा होने से किसानों को खरीफ फसल खराब होने के साथ-साथ अब आगामी रबी की बुवाई प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो गेहूं, सरसों और जौ की बुवाई में देरी हो सकती है।ग्रामीणों के अनुसार, तीनों गांवों में डहर वाली क्षेत्र की कृषि भूमि में लंबे समय से बरसाती पानी जमा है। किसानों ने बताया कि उन्होंने खेतों में ज्वार की फसल लगाई थी, लेकिन जलभराव के कारण फसल गलकर खराब हो गई।
खेती ही अधिकांश किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में फसल खराब होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और आगामी फसल को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं।किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भरा रहने से मिट्टी में नमी अधिक हो जाएगी, जिससे रबी फसलों की समय पर बुवाई करना मुश्किल हो सकता है। यदि बुवाई में देरी हुई तो इसका असर फसल के उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी बारिश के बाद खेतों में जलभराव की स्थिति बनी थी। कुछ किसानों ने अपने स्तर पर पानी निकालने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद रबी की फसल अच्छी नहीं हो सकी। उनका कहना है कि पिछले नुकसान के लिए भी उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।किसानों ने आरोप लगाया कि जलनिकासी की समस्या को लेकर प्रशासन की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन स्थायी समाधान के लिए धरातल पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही समस्या सामने आती है, जिससे खेती प्रभावित होती है।
किसान याकूब खान, साहिद, साजिद, आरिफ, खेरा और वाहिद ने बताया कि जलभराव की समस्या लगातार किसानों के सामने बनी हुई है। उन्होंने प्रशासन से खेतों का निरीक्षण कराकर तत्काल पानी की निकासी कराने और भविष्य में समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थायी जलनिकासी व्यवस्था करने की मांग की है।
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कोट
विभाग के पास जलभराव को लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा मामला है तो जल्द ही मौके का निरीक्षण कर उचित प्रबंध कराया जाएगा। -मुबारिक खान, कनिष्ठ अभियंता, सिंचाई विभाग
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सद्दाम हुसैन
पिनगवां। खेतों में जमा बरसाती पानी किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। पिनगवां खंड के ऐंचवाड़ी, गोकलपुर और नीमखेड़ा गांवों में 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि जलभराव की चपेट में है। खेतों में पानी भरा होने से किसानों को खरीफ फसल खराब होने के साथ-साथ अब आगामी रबी की बुवाई प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो गेहूं, सरसों और जौ की बुवाई में देरी हो सकती है।ग्रामीणों के अनुसार, तीनों गांवों में डहर वाली क्षेत्र की कृषि भूमि में लंबे समय से बरसाती पानी जमा है। किसानों ने बताया कि उन्होंने खेतों में ज्वार की फसल लगाई थी, लेकिन जलभराव के कारण फसल गलकर खराब हो गई।
खेती ही अधिकांश किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में फसल खराब होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और आगामी फसल को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं।किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भरा रहने से मिट्टी में नमी अधिक हो जाएगी, जिससे रबी फसलों की समय पर बुवाई करना मुश्किल हो सकता है। यदि बुवाई में देरी हुई तो इसका असर फसल के उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है। किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष भी बारिश के बाद खेतों में जलभराव की स्थिति बनी थी। कुछ किसानों ने अपने स्तर पर पानी निकालने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद रबी की फसल अच्छी नहीं हो सकी। उनका कहना है कि पिछले नुकसान के लिए भी उन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।किसानों ने आरोप लगाया कि जलनिकासी की समस्या को लेकर प्रशासन की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन स्थायी समाधान के लिए धरातल पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उनका कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही समस्या सामने आती है, जिससे खेती प्रभावित होती है।
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किसान याकूब खान, साहिद, साजिद, आरिफ, खेरा और वाहिद ने बताया कि जलभराव की समस्या लगातार किसानों के सामने बनी हुई है। उन्होंने प्रशासन से खेतों का निरीक्षण कराकर तत्काल पानी की निकासी कराने और भविष्य में समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थायी जलनिकासी व्यवस्था करने की मांग की है।
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कोट
विभाग के पास जलभराव को लेकर अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। अगर ऐसा मामला है तो जल्द ही मौके का निरीक्षण कर उचित प्रबंध कराया जाएगा। -मुबारिक खान, कनिष्ठ अभियंता, सिंचाई विभाग